![]()
मप्र राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (मप्र-सिया) में अध्यक्ष और सदस्य सचिव के बीच 83 दिनों तक चली खींचतान के कारण बिना बैठक के दी गईं 237 पर्यावरण मंजूरियां (ईसी) अब कानूनी सवालों के घेरे में हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा है कि पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना 2006 में किसी भी तरह की डीम्ड क्लीयरेंस का प्रावधान नहीं है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि इन 237 मामलों में एसईएसी अपना मूल्यांकन पूरा कर चुकी थी, लेकिन सिया की बैठक नहीं होने के कारण अंतिम फैसला नहीं हो सका। इसलिए अब इन सभी मामलों को मप्र-सिया की औपचारिक बैठक में रखकर दोबारा फैसला लेना ही कानूनी रूप से सही कदम होगा। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट में पेश फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एसईएसी या सिएक) केवल एक मूल्यांकन और सिफारिशी निकाय है। अंतिम मंजूरी देने का कानूनी अधिकार केवल राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएआई या सिया) को ही है। ईआईए अधिसूचना 2006 के तहत किसी भी प्राधिकारी (राज्य के अफसरों) के पास डीम्ड क्लीयरेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई जांच, इसी में खुलासा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पर्यावरण मंत्रालय ने 2025 में अतिरिक्त सचिव डॉ. अमनदीप गर्ग की अध्यक्षता में फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई। जांच में सामने आया कि मप्र-सिया की 83 दिन बैठक नहीं हुई। इस दौरान 237 डीम्ड ईसी जारी की गईं। इनमें 186 ईसी, 37 टीओआर, 10 रिजेक्शन और 4 ट्रांसफर/वैलिडिटी एक्सटेंशन के मामले थे।
Source link
#मधयपरदश #म #परयवरण #मजर #नयम #वरदधअब #सय #बठक #म #फसल #कदर #न #कह #डमड #कलयरस #क #परवधन #नह #अकटबर #क #सनवई

