लालरेमसियामी की कहानी:पिता के निधन पर भी नहीं छोड़ा था जापान, सात साल बाद उसी जज्बे से जीत दिलाई – Lalremsiami’s Japan Chapter: Played Through Grief, Returned To Win India Gold

लालरेमसियामी की कहानी:पिता के निधन पर भी नहीं छोड़ा था जापान, सात साल बाद उसी जज्बे से जीत दिलाई – Lalremsiami’s Japan Chapter: Played Through Grief, Returned To Win India Gold

पापा मर गया…सात साल पहले जापान के हिरोशिमा में एफआईएच सीरीज फाइनल्स के दौरान लालरेमसियामी को पिता की मौत का पता चला, तो कप्तान रानी रामपाल के पूछने पर सिर्फ इतना ही कह सकीं। सबने घर लौटने की सलाह दी, पर देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा ऐसा कि मिजोरम की इस खिलाड़ी ने इन्कार कर दिया। वह रोती रही, मगर खेलती रही। भारत ने तब खिताब भी जीता। आज उसी जापान की धरती पर लालरेमसियामी की बैकस्टिक से निकले गोल से भारत ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। संयोग यह भी कि यह उनके करियर का 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच था। सियामी के संघर्ष को सबसे करीब से देखने वाली रानी ने अमर उजाला से कहा कि सियामी के त्याग का असली इनाम उसे अब मिला है।


भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीत लिया। भारत ने चीन को फाइनल में 1-0 से हराया। भारत ने इस तरह 1982 के बाद पहली बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है। भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल का सूखा समाप्त किया। इस जीत के साथ ही भारतीय महिला हॉकी टीम ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया है। भारतीय टीम ने पहले क्वार्टर में बढ़त हासिल की और अंत तक इस बढ़त को बनाए रखा। भारत ने ना सिर्फ स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि चीन को स्वर्ण का बचाव करने से रोका।

शुरुआत से बनाया दबाव

भारतीय टीम ने चीन के खिलाफ पहले क्वार्टर से दबाव बनाया। बलजीत कौर को छठे मिनट में ग्रीन कार्ड मिला। लेकिन भारत ने चीन पर दबाव बनाया और भारत के लिए 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहीं लालरेमसियामी ने 10वें मिनट में मैदानी गोल दागा। इस तरह भारत ने शुरुआत में ही 1-0 की बढ़त बनाई। भारत को इसके बाद पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन भारतीय टीम बढ़त दोगुना करने से चूक गई। हालांकि, पहला क्वार्टर समाप्त होने तक भारतीय टीम बढ़त बनाए रखी।  

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