इंदौर शहर के विभिन्न इलाकों में कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए पांच बसों में तोड़फोड़ किए जाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस पूरी वारदात से बस संचालकों और चालकों में भारी दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। जानकारी के अनुसार यह सुनियोजित वारदात इंदौर के छोटी ग्वालटोली, तिलकनगर, भंवरकुआं और संयोगितागंज थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले रूटों पर घटित हुई है। घटना से आक्रोशित बस संचालकों ने सीधे तौर पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि यह पूरा विवाद और हिंसक टकराव बसों की अनधिकृत एजेंट बनने को लेकर चल रही खींचतान का नतीजा है। इस पूरे मामले में हैरान करने वाली बात यह रही कि पीड़ित पक्ष द्वारा दो अलग-अलग थानों में आरोपियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज करवाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय पुलिस द्वारा कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई। इसी अकर्मण्यता से परेशान होकर शनिवार को तमाम पीड़ित बस संचालक न्याय की गुहार लगाने सीधे पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पहुंचे।
बस यूनियन ने पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह से की मुलाकात
थाना स्तर पर कार्रवाई न होने से दुखी देवास बस यूनियन के पदाधिकारियों और चौहान ट्रेवल्स के मुख्य संचालक धर्मेंद्र चौहान ने शनिवार को इंदौर के पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह से विशेष मुलाकात की और उन्हें पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। पुलिस कमिश्नर को सौंपे गए शिकायती पत्र में उन्होंने बताया कि उनकी बसें मुख्य रूप से देवास-इंदौर मार्ग और इंदौर-इच्छापुर रूट पर नियमित रूप से संचालित की जाती हैं। धर्मेंद्र चौहान ने लिखित शिकायत में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि विगत 25 जून को राहुल सोनकर नामक व्यक्ति और उसके अन्य अज्ञात साथियों ने उनकी बस क्रमांक एमपी 41 पी 0815 के चालक और परिचालक समेत अन्य स्टाफ के साथ सरेआम बेरहमी से मारपीट की थी। इसके बाद उपद्रवियों ने बस के भीतर घुसकर जमकर तोड़फोड़ भी की। इस जानलेवा हमले और तोड़फोड़ की तत्काल सूचना ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने डायल 112 नंबर पर कॉल करके पुलिस को दी थी। बस संचालकों ने यह भी आरोप लगाया कि इस पहली घटना के बाद आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने अगले दो दिनों के भीतर ही शहर के अलग-अलग हिस्सों में उनकी करीब चार अन्य बसों को भी निशाना बनाया और उनमें जमकर तोड़फोड़ की। जिस समय इन वारदातों को अंजाम दिया गया, उस वक्त बसों के भीतर बड़ी संख्या में यात्री सवार थे, जिससे कोई भी बड़ी अनहोनी या जानमाल की क्षति हो सकती थी।
गुंडागर्दी के साथ अवैध वसूली का भी लगाया गंभीर आरोप
पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करने पहुंचे बस यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस पूरे विवाद के पीछे अवैध वसूली का खेल होने का भी बड़ा आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मुख्य आरोपी राहुल सोनकर के साथ कपिल नाम का एक अन्य व्यक्ति भी पिछले काफी समय से बस संचालकों पर लगातार अनुचित दबाव बना रहा है। यह दोनों आरोपी खुद को बसों का एजेंट बताकर जबरन अवैध वसूली करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। इस जबरन वसूली और डराने-धमकाने के संबंध में पीड़ित पक्षों द्वारा भंवरकुआं और तिलकनगर पुलिस थानों में साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने या उन पर अंकुश लगाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसी ढुलमुल रवैए के कारण बस संचालकों ने अब सीधे पुलिस कमिश्नर से सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई करने की जोरदार मांग की है।
कमिश्नर ने दिया निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का ठोस आश्वासन
पीड़ित बस संचालकों और यूनियन के पदाधिकारियों की गंभीर शिकायतों को सुनने और पूरे मामले को समझने के बाद इंदौर के पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने इस विषय को बेहद संवेदनशीलता से लिया है। उन्होंने बस संचालकों को पूरी तरह आश्वस्त करते हुए कहा है कि शहर में किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने तत्काल संबंधित थाना प्रभारियों को मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। पुलिस कमिश्नर ने पीड़ित पक्ष को यह अटूट भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कानून का उल्लंघन करने वाले और तोड़फोड़ में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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