मंडी शुल्क में बदलाव: निमाड़ के किसानों पर सरकार की मेहरबानी, मालवा-विंध्य-महाकौशल हुए पराए

मंडी शुल्क में बदलाव: निमाड़ के किसानों पर सरकार की मेहरबानी, मालवा-विंध्य-महाकौशल हुए पराए

असल में 16 जून को अधिसूचना जारी कर सरकार ने कपास पर मंडी शुल्क में आधा प्रतिशत की कमी कर दी। दूसरी ओर अन्य सभी अनाज और दलहन-तिलहन से लेकर अन्य उपजों प…और पढ़ें

Publish Date: Wed, 01 Jul 2026 11:00:52 AM (IST)Updated Date: Wed, 01 Jul 2026 11:00:52 AM (IST)

मंडी शुल्क में बदलाव: निमाड़ के किसानों पर सरकार की मेहरबानी, मालवा-विंध्य-महाकौशल हुए पराए
अपनी उपज के साथ किसान। (एआई इमेज)

HighLights

  1. 16 जून को अधिसूचना जारी कर सरकार ने कपास पर मंडी शुल्क में आधा प्रतिशत की कमी कर दी
  2. अन्य सभी अनाज और दलहन-तिलहन से लेकर अन्य उपजों पर मंडी शुल्क आधा प्रतिशत बढ़ा दिया
  3. ऐसे में सिर्फ निमाड़ के किसान, जिनिंग मिल संचालक और व्यापारियों को राहत मिली है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। निमाड़ के किसान-व्यापारियों पर सरकार मेहरबान है तो मालवा-निमाड़, महाकौशल से लेकर विंध्य तक के किसान-व्यापारियों को सजा क्यों दी जा रही है? मंडी शुल्क में हुए बदलाव के बाद अब यह सवाल खड़ा हो रहा है।

असल में 16 जून को अधिसूचना जारी कर सरकार ने कपास पर मंडी शुल्क में आधा प्रतिशत की कमी कर दी। दूसरी ओर अन्य सभी अनाज और दलहन-तिलहन से लेकर अन्य उपजों पर मंडी शुल्क आधा प्रतिशत बढ़ा दिया। दरअसल प्रदेश में कपास की पैदावार ज्यादातर सिर्फ निमाड़ बेल्ट में होती है। ऐसे में सिर्फ निमाड़ के किसान, जिनिंग मिल संचालक और व्यापारियों को राहत मिली है। जबकि प्रदेश के दूसरे हिस्से में अनाज से लेकर दाल और तिलहन जैसी फसलें उगा रहे किसान व कारोबारी ठगा महसूस कर रहे हैं।

प्रदेश में पहले सभी कृषि उपजों पर मंडी शुल्क 1 प्रतिशत की दर से लगता था। 16 जून से दर परिवर्तित हो गई। कपास पर शुल्क आधा प्रतिशत (0.50) कर दिया गया। दूसरी ओर कपास को छोड़ अन्य सभी उपजों पर मंडी शुल्क बढ़ाकर 1.50 प्रतिशत कर दिया गया। यानी गेहूं, चना, सोयाबीन से लेकर तमाम दलहन, मसालों, तिलहन और सब्जियों व फल पर भी मंडी शुल्क बढ़ा दिया गया।

इस बढ़त ने व्यापारी व किसानों को हैरान कर दिया। इसके विरोध स्वरूप बीते सप्ताह प्रदेश भर की मंडियों में एक दिन के बंद का ऐलान किया गया। प्रदेश के सकल अनाज-तिलहन व्यापारी महासंघ ने विरोध का ऐलान किया है। मंडी शुल्क घटाने की मांग की जा रही है। दूसरी ओर निमाड़ के जिनिंग मिल और काटन व्यापारियों ने निर्णय का स्वागत करते हुए बीते दिनों भोपाल पहुंचकर प्रदेश के नेताओं का अभिनंदन और स्वागत कर दिया।

भेदभाव क्यों

मंडी शुल्क के इस बदलाव के पीछे क्या तर्क है यह समझ से परे हैं। इंदौर अनाज-तिलहन व्यापारी संघ के अध्यक्ष मनोज काला के अनुसार बढ़े हुए मंडी शुल्क का असर सीधे किसान और उपभोक्ता पर ही पड़ेगा। मंडी शुल्क की राशि निकालने के लिए फसल की दाम में किसानों के हिस्से में से कमी होगी। दूसरी ओर उपभोक्ता के लिए बढ़ोतरी हो जाएगी। जबकि नकदी फसल कपास की पैदावार सिर्फ निमाड़ क्षेत्र में होती है।

शुल्क में बढ़ोतरी अन्य सभी क्षेत्र के किसानों को नुकसान होगा। आल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के अनुसार मंडी शुल्क बढ़ाने से प्रदेश के दाल उद्योग पीड़ित महसूस कर रहे हैं। ना केवल प्रदेश बल्कि बाहर से आने वाले और आयातित दलहन पर भी प्रदेश में अलग से शुल्क लिया जा रहा है। इससे यहां की दालों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। नतीजा प्रदेश की दाल मिलें या बंद हो रही है या फिर अन्य प्रदेश में पलायन कर रही है।

अगले सप्ताह बैठक

प्रदेश के अनाज-तिलहन व्यापारी महासंघ ने अगले सप्ताह प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाने का ऐलान किया है। बैठक में मंडी शुल्क वृद्धि के विरोध आंदोलन का अगले चरण पर चर्चा होगी। इस बीच इंदौर में व्यापारी मुख्यमंत्री से मिलने की योजना बना रहे हैं। यदि सरकार ने शुल्क घटाने का निर्णय नहीं लिया तो व्यापारी प्रदेश स्तर पर कृषि उपज मंडियों को बंद करने का ऐलान कर सकते हैं।

प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की प्रमुख फसलें

  • मालवा: सोयाबीन, गेहूं, चना, मक्का व अन्य दलहनी व सब्जियों की फसलें
  • निमाड़: कपास, गेहूं, सोयाबीन, मिर्च, चना व सब्जियों की फसल
  • महाकौशल: मूंग, गेहूं, उड़द, चना व अन्य अनाज व दलहन की फसल
  • चंबल-विंध्य: सरसों-राई, धान, उड़द, मटर, धान, मसूर, चना, मक्का व अन्य सब्जियां
  • बुंदेलखंड- मसूर, मटर, चना, उड़द, मक्का व सब्जियों के साथ

आधा प्रतिशत मंडी शुल्क बढ़ाने के विरोध में प्रदेश की 270 मंडियों में रही हड़ताल, इंदौर में ढाई सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित

Source link
#मड #शलक #म #बदलव #नमड #क #कसन #पर #सरकर #क #महरबन #मलववधयमहकशल #हए #परए

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *