नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चोंं के लिये पहुंचने वाला मध्यान्ह भोजन गुणवत्ता युक्त हैं या नहीं यह देखने की जिम्मेदारों को फुर्सत ही नहीं हैं। समूहों द्वारा सारणीवार भोजन बनाकर बिना जांच के ही स्कूलों में पहुंचाया जा रहा हैं और स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाएं भी बच्चों को भोजन परोसकर अपना कर्तव्य पूरा कर रहे हैं। जबकि मध्यान्ह भोजन की कहानी ही कुछ और हैं।
मध्यान्ह भोजन से गुणवत्ता पूरी तरह से गायब हैं। सब्जी में पानी ही पानी दिख रहा हैं, पुड़ियां कच्ची ही परोसी जा रही हैं और चावल और पानी को खीर कहा जा रहा हैं, दूध सिर्फ नाम मात्र का ही डाला जा रहा हैं। मध्यान्ह भोजन की स्थिति ऐसी हैं की बच्चे यह भोजन खा ही नहीं रहे हैं, अधिकांश बच्चे घरों से ही टिफिन लेकर आते हैं। मामले में डीपीसी कह रहे हैं की शिकायत आएगी तो जांच करवाई जाएगी।

मध्यान्ह भोजन में मंगलवार को परोसी गई सब्जी में सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा था। खीर में दूध नहीं सिर्फ चावल डाले गए। (नईदुनिया प्रतिनिधि)
स्कूलों में पहुंचने वाला मध्यान्ह भोजन नौनिहालों के गले नहीं उतर रहा हैं। सब्जी में पानी ही पानी, खीर में दूध तक नहीं डाला जा रहा हैं। कच्ची रोटियां व कच्ची पुड़ियां परोसी जा रही हैं। भोजन की गुणवत्ता पर लगातार सवाल बने हुए हैं। गुणवत्ता युक्त न होने के कारण नौनिहाल मध्यान्ह भोजन से दूरी बना रहे हैं।
स्कूलों में पहुंचने वाला मध्यान्ह भोजन सभी बच्चे नहीं खा रहे हैं। कई बच्चे घरों से टिफिन लेकर आ रहे हैं। कच्ची पुड़ियां व कच्ची रोटियां रोज की बात हो गई हैं। वहीं खीर में दूध की बजाय सिर्फ चावल ही पकाये जा रहे हैं और सब्जी में भी पानी ही पानी दिखता हैं।
मंगलवार को नईदुनिया टीम ने स्कूलों में पहुंचकर मध्यान्ह भोजन की स्थिति को देखा। कालाखेत मैदान परिसर में संचालित हो रहे शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक-शिक्षिकाओं के अनुसार 123 बच्चे अध्ययनरत हैं। मंगलवार को यहां करीब चार लीटर की केटली में सब्जी और इतनी ही बड़ी केटली में खीर व पुड़ी पहुंची थी।
जब पूछा की बच्चे भोजन क्यों नहीं कर रहे हैं तो वहां मौजूद शिक्षिकाओं ने बताया कि बच्चों ने भोजन कर लिया है, जबकि बच्चों ने बताया कि हम हमारे घर से टिफिन लेकर आते हैं। केटली में सब्जी और खीर भरी हुई थी, आलू-छोले की सब्जी मंगलवार को आई थी, लेकिन सब्जी में पानी ही पानी था, खीर में दूध नहीं था। इसके कारण सभी बच्चों ने मध्यान्ह भोजन नहीं खाया।
सब्जी में पानी ही पानी, बच्चे स्कूल के बाहर नाश्ता करने चले गए
नूतन माध्यमिक विद्यालय व समीप संचालित होने वाले प्राथमिक विद्यालय का भोजन एक साथ ही पहुंचता हैं। लेकिन गुणवत्ता युक्ता न होने के कारण स्कूल के अधिकांश बच्चों ने मध्यान्ह भोजन नहीं ग्रहण किया। भोजन की छुट्टी होने पर बच्चे स्कूल के बाहर नाश्ता करने चले गए थे, वहीं कुछ बच्चे जो साथ में घर से टिफिन लाए थे वहीं भोजन ग्रहण कर रहे थे। मध्यान्ह भोजन नहीं खाने का कारण पूछने पर कुछ बच्चों ने बताया की अच्छा नहीं आता हैं। बच्चे मध्यान्ह भोजन नहीं ग्रहण करते इसके कारण भोजन व्यर्थ ही फेंका जाता हैं।
शिकायत आएगी तो जांच करेंंगे
स्कूलों में पहुंच रहे मध्यान्ह भोजन की सभी व्यवस्थाएं समूहों के भरोसे ही हैं। भोजन की जांच भी वे ही करते हैं। हमारे पास इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आई हैं, शिकायत प्राप्त होगी तो हम जांच करेंगे। -अनिल पटेल, डीपीसी
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