इंदौर जिले में साल भर में केवल 30 सैंपल की खानापूर्ति, जुर्माना भरकर छूट जाते हैं मिलावटखोर

इंदौर जिले में साल भर में केवल 30 सैंपल की खानापूर्ति, जुर्माना भरकर छूट जाते हैं मिलावटखोर

मिलावटी हल्दी से दूल्हा-दुल्हन समेत कई लोगों के बीमार पड़ने के बाद खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 13 May 2026 10:16:15 AM (IST)Updated Date: Wed, 13 May 2026 10:46:02 AM (IST)

इंदौर जिले में साल भर में केवल 30 सैंपल की खानापूर्ति, जुर्माना भरकर छूट जाते हैं मिलावटखोर
इंदौर में एक दुकान पर जांच करते हुए अधिकारी।

HighLights

  1. लाखों की आबादी वाले इंदौर जिले में हल्दी के सिर्फ 30 सैंपल
  2. जहरीली हल्दी गांवों-हाट बाजारों और किराना दुकानों तक पहुंच रही
  3. चार साल पहले भी पकड़ी थी नकली हल्दी, नेटवर्क खत्म नहीं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मिलावटी हल्दी से दूल्हा-दुल्हन सहित कई लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की घटना ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। लाखों की आबादी और बड़े खाद्य बाजार वाले इंदौर जिले में खाद्य विभाग पूरे साल में हल्दी के सिर्फ 30 सैंपल लेता है। जांच की यह धीमी व्यवस्था और कार्रवाई के नाम पर केवल जुर्माना वसूली ही मिलावटखोरों के हौसले बढ़ा रही है।

स्थिति यह है कि मिलावट पकड़े जाने के बाद भी आरोपित आसानी से जुर्माना भरकर छूट जाते हैं और कुछ समय बाद फिर बाजार में सक्रिय हो जाते हैं। यही कारण है कि जहरीली हल्दी और मसाले गांवों, हाट-बाजारों और छोटी किराना दुकानों तक पहुंच रहे हैं।

नईदुनिया द्वारा मामला प्रमुखता से उठाए जाने के बाद मंगलवार को खाद्य विभाग की टीम मूसाखेड़ी क्षेत्र के हाट बाजार और दुकानों पर पहुंची। टीम ने नौ दुकानों पर हल्दी की जांच की। मौके पर केमिकल विशेषज्ञ ने एसिड टेस्ट के जरिए प्राथमिक जांच भी की। अधिकारियों के अनुसार कुछ सैंपल लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं।

चार साल पहले भी पकड़ी गई थी नकली हल्दी

खाद्य विभाग की कार्रवाई पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले पकड़े गए मामलों में सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई। चार वर्ष पहले छोटा बांगड़दा क्षेत्र की एक फैक्ट्री में चावल के पाउडर और कृत्रिम रंग से नकली हल्दी बनाना पकड़ा गया था। जांच में सामने आया था कि पिसे हुए चावल में खतरनाक रंग मिलाकर हल्दी तैयार की जा रही थी। यह रंग स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक पाया गया, लेकिन कार्रवाई केवल जुर्माने तक सीमित रही।

इसके बाद भी मिलावट का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी बेहद कमजोर है। इसी का फायदा उठाकर मिलावटखोर सस्ती और नकली हल्दी हाट बाजारों और छोटी दुकानों तक पहुंचा देते हैं। आम लोग कम कीमत देखकर इसे खरीद लेते हैं और अनजाने में स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर बैठते हैं।

खरगोन जिले में भी जांच तेज

खरगोन, कसरावद, महेश्वर और बड़वाह क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मसालों के नमूने लिए हैं। हल्दी, मिर्च पाउडर और अन्य मसालों को जांच के लिए भोपाल लैब भेजा गया है। अधिकारियों ने कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद संबंधित फर्मों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

कानून में सजा का प्रविधान फिर भी कार्रवाई कमजोर

खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 272 और 273 के तहत मिलावटी खाद्य सामग्री बेचने पर छह महीने तक की सजा और जुर्माने का प्रविधान है। इसके बावजूद ज्यादातर मामलों में कार्रवाई केवल आर्थिक दंड तक सीमित रह जाती है।

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