वाई-फ़ाई स्लो है? घर में रखा माइक्रोवेव समेत ये 4 चीजें रोक सकती हैं स्पीड

वाई-फ़ाई स्लो है? घर में रखा माइक्रोवेव समेत ये 4 चीजें रोक सकती हैं स्पीड

वाई-फ़ाई डिजिटल वर्ल्ड की लाइफ़लाइन बन गया है

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इंटरनेट की दुनिया वाई-फ़ाई के सहारे चलती है. डिजिटल वर्ल्ड पर हमारी निर्भरता इस कदर बढ़ी है कि कह सकते हैं कि दुनिया ही वाई-फ़ाई के सहारे चल रही है.

लेकिन आपको ये जानकार हैरानी होगी कि आपके आसपास की कुछ चीजें वाई-फ़ाई के रास्ते में रुकावट बन सकती हैं. यहां तक कि आपका खाना भी इनमें शामिल है.

एलेक्स हिल्स दुनिया के उन पहले लोगों में शामिल थे, जिन्हें वाई-फ़ाई कनेक्शन की दिक्कतों से जूझना पड़ा था.

वह साल 1993 में अमेरिका की कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर थे. उन्होंने उस टीम का नेतृत्व किया, जिसने दुनिया के शुरुआती बड़े वाई-फ़ाई नेटवर्क में से एक तैयार किया था.

हिल्स ने अपनी किताब ‘वाई-फ़ाई एंड दे बैड बॉयज़ ऑफ़ रेडियो’ में इस कहानी का ज़िक्र किया है.

लेकिन यहां ‘बैड बॉयज़’ का मतलब उनकी टीम के इंटरनेट हैकरों से नहीं है.

हिल्स ने यह नाम उन चीज़ों और गतिविधियों को दिया था, जो वाई-फ़ाई के सही ढंग से काम करने में बाधा डालती हैं.

हो सकता है कि आपका घर भी ऐसे ‘बैड बॉयज़’ से भरा हो, जो आपके मीम देखने की राह में हर मुमकिन रुकावट डाल रहे हों.

कुछ बाधाएं हैरान नहीं करतीं. मसलन, मोटी दीवारें. लेकिन कुछ वजहें थोड़ी अजीब हैं.

इन रुकावटों की पहचान करने से आपको अपने वाई-फ़ाई कनेक्शन की समस्या ठीक करने में मदद मिल सकती है.

इतना ही नहीं, इससे आपकी ज़िंदगी की सबसे अहम तकनीकों में से एक को देखने का नज़रिया भी बदल सकता है.

माइक्रोवेव

माइक्रोवेव आपके वाई-फ़ाई सिग्नल में बाधा डाल सकता है

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ऑस्ट्रेलिया में खगोलविद 17 साल तक रहस्यमय रेडियो संकेतों को लेकर उलझन में रहे.

कुछ लोगों ने इसके लिए सौर ज्वालाओं को ज़िम्मेदार माना, जबकि आम लोगों को शक था कि इसके पीछे एलियन हो सकते हैं.

आखिरकार उन्हें पता चला कि असली वजह उनके बिल्कुल पास ही थी. उनका टेलीस्कोप दोपहर के खाने के समय दफ़्तर के माइक्रोवेव ओवन से निकलने वाली ऊर्जा तरंगों को पकड़ रहा था.

हानिकारक माइक्रोवेव तरंगों से सिर्फ़ टेलीस्कोप ही प्रभावित नहीं होते. ये आपके वाई-फ़ाई में भी बाधा डाल सकती हैं.

ज़्यादातर वायरलेस संचार तकनीकों की तरह वाई-फ़ाई भी रेडियो तरंगों के ज़रिए सूचनाएं भेजता है.

सरकारें ज़्यादातर रेडियो फ्रीक्वेंसी को ख़ास मक़सद के लिए रिजर्व रखती हैं.

मसलन, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, हवाई यातायात नियंत्रण और एएम और एफएम रेडियो स्टेशनों के लिए.

लेकिन कुछ फ्रीक्वेंसी बिना लाइसेंस के आम लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होती हैं.

मिसाल के तौर पर, 2.4 गीगाहर्ट्ज़ वाई-फाई नेटवर्क और ब्लूटूथ उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली सबसे आम फ्रीक्वेंसी में से एक है.

यही फ्रीक्वेंसी आपका माइक्रोवेव ओवन बचे हुए खाने को गर्म करने के लिए इस्तेमाल करता है.

माइक्रोवेव ओवन को अच्छी तरह सील किया जाता है, ताकि खाना गर्म करने वाली तरंगें उपकरण के भीतर ही रहें.

लेकिन हिल्स कहते हैं कि अगर आपका माइक्रोवेव ओवन पुराना या ख़राब है, या खाना गर्म होने से पहले ही आप उसका दरवाज़ा खोल देते हैं, तो यह आपके वाई-फाई सिग्नल में बाधा डाल सकता है.

हिल्स कहते हैं, “यह उन प्रमुख बाधाओं में से एक है, जिनके बारे में लोग अक्सर बात करते हैं.”

फ्लोरोसेंट लाइट या कार के इग्निशन सिस्टम से निकलने वाली फ्रीक्वेंसी भी इसी तरह की समस्या पैदा कर सकती हैं.

हिल्स कहते हैं, “आजकल माइक्रोवेव इतनी बड़ी समस्या नहीं हैं.”

अब वाई-फ़ाई तकनीक बेहतर हो गई है और यह 2.4 गीगाहर्ट्ज़ के बजाय 5 गीगाहर्ट्ज़ बैंड पर भी काम कर सकती है.

लेकिन अगर आपका वाई-फाई सिस्टम या माइक्रोवेव ओवन पुराना है, तो खाना डीफ्रॉस्ट करते समय आपके मीम देखने में रुकावट आ सकती है.

एक्वेरियम

वाई-फाई

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इमेज कैप्शन, अगर आपके और राउटर के बीच मछली का एक्वेरियम रखा है, तो वहां ऐसा इलाका बन सकता है जहां वाई-फ़ाई उपलब्ध न हो

अगर आपके घर में मछलियां हैं यानी आप घर में एक्वरियम रखे हुए हैं तो ये भी वाई-फ़ाई की राह में अड़चन बन सकता है.

हिल्स कहते हैं, “दूरी बढ़ने के साथ रेडियो सिग्नल स्वाभाविक रूप से कमजोर होता जाता है. लेकिन कई बार जब यह किसी चीज के आर-पार जाता है, तो वो सिग्नल को कमजोर कर देती है.

इसे हम ‘शैडोइंग’ कहते हैं.”

वाई-फ़ाई और पानी की आपस में नहीं बनती.

दूसरी वजहों के अलावा पानी के अणु छोटे चुंबकों की तरह काम करते हैं और रेडियो सिग्नल की ऊर्जा को सोख लेते हैं.

अगर आपके और राउटर के बीच मछली का एक्वेरियम रखा है, तो वहां ऐसा इलाक़ा बन सकता है जहां वाई-फ़ाई उपलब्ध न हो.

हिल्स कहते हैं कि वाई-फ़ाई नेटवर्क में लोगों के सामने आने वाली सबसे बड़ी समस्या ‘शैडोइंग’ है. और इसकी वजह सिर्फ़ मछली के एक्वेरियम नहीं हैं.

रेडियो तरंगें लकड़ी और ड्राईवॉल जैसी कुछ चीज़ों के आर-पार अपेक्षाकृत आसानी से गुजर सकती हैं.

लेकिन अगर आपके घर की दीवारें ईंट या कंक्रीट जैसी ठोस सामग्री से बनी हैं, तो समस्या बढ़ सकती है.

हिल्स कहते हैं, “अपने राउटर और जिस उपकरण का आप इस्तेमाल करना चाहते हैं, उनके बीच एक सीधी रेखा की कल्पना कीजिए.”

सिग्नल कमरे में मौजूद चीज़ों से टकराकर दूसरी राह खोज सकता है. लेकिन रास्ते में जितनी ज़्यादा बाधाएं होंगी, उसके लिए आगे बढ़ना उतना ही मुश्किल होगा.

कम दूरी वाई-फ़ाई के लिए बेहतर होती है. इसलिए राउटर को घर के बीचोंबीच और जितना संभव हो, ऊंची जगह पर रखना अच्छा होता है.

अगर इससे भी बात न बने, तो आप वाई-फाई एक्सटेंडर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे सिग्नल की पहुंच बढ़ जाएगी. आप अपने राउटर की जगह मेश नेटवर्क भी लगा सकते हैं.

मेश नेटवर्क कई छोटे उपकरणों के ज़रिए पूरे घर में वाई-फ़ाई पहुंचाता है.

इससे आपको उन परेशान करने वाली मछलियों को हटाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

शीशे

आपका वाई-फाई

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इमेज कैप्शन, जिस तरह रोशनी शीशे जैसी चमकदार सतहों से टकराकर बिखरती या लौटती है, उसी तरह आपका वाई-फाई सिग्नल भी वापस लौट सकता है

रेडियो भी प्रकाश का ही एक रूप है.

जिस तरह रोशनी शीशे जैसी चमकदार सतहों से टकराकर बिखरती या लौटती है, उसी तरह आपका वाई-फाई सिग्नल भी वापस लौट सकता है.

टेलीविज़न जैसी कोई भी सपाट और चमकदार सतह ऐसी समस्या पैदा कर सकती है. अगर आपकी दीवारों में धातु की चादरों का इस्तेमाल हुआ है, तो भी यह दिक्कत हो सकती है.

अगर आपके घर के किसी हिस्से में वाई-फ़ाई सिग्नल कमजोर है, तो अपने और राउटर के बीच एक सीधी रेखा की कल्पना करें.

देखें कि क्या उस रास्ते में कोई शीशा या बड़ा टीवी है, जो सिग्नल की दिशा बदल सकता है.

आप ऐसी चीज़ों को दूसरी जगह रखने पर विचार कर सकते हैं.

अगर आप अपने घर की व्यवस्था नहीं बदलना चाहते, तो वाई-फाई एक्सटेंडर इस समस्या को हल करने में मदद कर सकता है.

ठंड

बर्फबारी

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इमेज कैप्शन, बर्फबारी किसी घर, मोहल्ले या पूरे शहर को इंटरनेट सेवा देने वाले बुनियादी ढांचे को ठप कर सकती है

अगर आप खुले इलाके के दूसरी ओर मौजूद किसी दूसरी इमारत के नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो बारिश आपके वाई-फ़ाई को नहीं रोकेगी.

लेकिन मौसम बहुत खराब होने पर हालात बिगड़ सकते हैं.

बर्फबारी किसी घर, मोहल्ले या पूरे शहर को इंटरनेट सेवा देने वाले बुनियादी ढांचे को ठप कर सकती है.

भीषण ठंड से केबल के भीतर मौजूद धातु को नुकसान पहुंच सकता है या जमी हुई बर्फ सैटेलाइट सिग्नल को रोक सकती है.

गर्मी भी इसी तरह की समस्याएं पैदा कर सकती है.

हालांकि मौसम ही अकेली समस्या नहीं है. जब आपके घर के सभी लोग अंदर बैठे एक ही समय पर यूट्यूब देख रहे हों, तो नेटवर्क की रफ़्तार धीमी हो सकती है.

इसका मतलब है कि मीम देखने में रुकावट जलवायु परिवर्तन का एक और नतीजा हो सकती है.

समाधान क्या है?

धरती को बचाने में अपनी भूमिका निभाने के साथ-साथ आप टेलीकॉम कंपनियों और स्थानीय अधिकारियों से पहले से जरूरी कदम उठाने की मांग कर सकते हैं.

जहां तक एलेक्स हिल्स की बात है, वह अब अलास्का में रहते हैं.

उन्होंने अपने कामकाजी जीवन का बड़ा हिस्सा दूरदराज के क़स्बों और गांवों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद करते हुए बिताया है.

सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं ने इस काम को काफ़ी आसान बना दिया है. लेकिन उनके अपने वाई-फ़ाई ‘बैड बॉयज़’ भी हैं.

कई बार बर्फीले तूफान में आपकी सैटेलाइट डिश बर्फ से ढक जाती है. ऐसे में आपको फावड़ा उठाकर उसे साफ़ करना पड़ सकता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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