क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो का हाल भी क्या मादुरो जैसा होगा

क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो का हाल भी क्या मादुरो जैसा होगा

 राउल कास्त्रो

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इमेज कैप्शन, अमेरिका ने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो अमेरिकी विमानों को गिराने का आरोप लगाया है

अमेरिका ने क्यूबा के 94 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर हत्या का आरोप लगाया है. इसके बाद अटकलें तेज़ हो गई हैं कि अमेरिका की तख़्तापलट सूची में अगला नाम क्यूबा का हो सकता है.

अमेरिका की ”मैक्सिमम प्रेशर’ नीति की वजह से क्यूबा में दशकों का सबसे बड़ा ईंधन और बिजली संकट पैदा हो गया है.

इसी बीच, अमेरिकी अधिकारियों का एक वर्ग लगातार यह कह रहा है कि 66 साल से सत्ता में मौजूद कम्युनिस्ट सरकार का अंत होना चाहिए.

हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि ‘तनाव बढ़ाने’ की ज़रूरत पड़ेगी.

लेकिन व्हाइट हाउस ने यह भी चेतावनी दी है कि वह अमेरिका के तट से सिर्फ 144 किलोमीटर दूर किसी ‘बाग़ी राष्ट्र’ को बर्दाश्त नहीं करेगा.

आगे क्या होगा, इसका कोई अंदाज़ा नहीं है- आर्थिक पतन, घरेलू अशांति या अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप.

यहां तीन संभावित परिणामों का आकलन किया गया है.

राउल कास्त्रो को अमेरिका पकड़ सकता है

राउल कास्त्रो

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इमेज कैप्शन, राउल कास्त्रो (खाकी वर्दी में) अब भी प्रभावशाली हैं और उनका प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़ा है. ज़रूरी नहीं है कि उनकी गिरफ़्तारी से क्यूबा की सरकार का अंत हो जाएगा

राउल कास्त्रो पर कई आरोप लगाए गए हैं. इनमें से 1996 में क्यूबा के दो लड़ाकू विमानों की ओर से अमेरिकी विमानों को गिराने का आरोप है.

अब ये चर्चा गर्म है कि अमेरिका कोई सैन्य अभियान चलाकर उन्हें गिरफ़्तार कर सकता है. उन्हें अमेरिका लाकर उनपर मुक़दमा चलाया जा सकता है.

वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के मामले में पहले भी ऐसा हो चुका है.

इस साल जनवरी में अमेरिकी कमांडो ने वेनेज़ुएला में एक बेहद तेज़ रफ़्तार अभियान चलाकर निकोलस मादुरो को गिरफ़्तार कर लिया था. मादुरो क्यूबा के क़रीबी सहयोगी माने जाते थे.

अमेरिका उन पर ड्रग्स तस्करी और हथियारों से जुड़े आरोप लगाकर न्यूयॉर्क ले गया था.

1989 में अमेरिका ने ‘ऑपरेशन जस्ट कॉज़’ के तहत हज़ारों सैनिकों के साथ पनामा पर हमला कर वहां के तत्कालीन नेता मैनुअल नोरिएगा को सत्ता से हटाकर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था.

हालांकि ट्रंप ने अब तक यह साफ़ नहीं किया है कि क्या वह क्यूबा में भी ऐसा अभियान चलाने पर विचार कर रहे हैं.

लेकिन कई अमेरिकी सांसद खुलकर इसकी मांग कर चुके हैं. फ़्लोरिडा के सीनेटर रीक स्कॉट ने कहा, “हमें किसी भी विकल्प को ख़ारिज़ नहीं करना चाहिए. मादुरो के साथ जो हुआ वही राउल कास्त्रो के साथ भी होना चाहिए.”

विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य दृष्टि से कास्त्रो को पकड़ना संभव है. लेकिन इसमें कई जोखिम होंगे.

उनकी उम्र काफ़ी अधिक है और सुरक्षा भी बहुत कड़ी है.

वॉशिंगटन ऑफ़िस ऑन लैटिन अमेरिका के विशेषज्ञ एडम इसाकसन ने कहा कि कास्त्रो का प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़ा है, इसलिए उनकी सुरक्षा भी मजबूत है. लेकिन उन्हें पकड़ना असंभव नहीं है.

हालांकि उनका मानना है कि कास्त्रो को गिरफ़्तार करने से क्यूबा की सत्ता संरचना पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा.

क्योंकि उन्होंने 2018 में ही राष्ट्रपति पद छोड़ दिया था और अब उनकी भूमिका प्रतीकात्मक ज़्यादा मानी जाती है.

इसाकसन ने कहा, “कास्त्रो का परिवार अब भी असर रखता है, लेकिन ये पूरी व्यवस्था का केंद्र नहीं है. हालांकि घरेलू राजनीति के लिहाज़ से यह अमेरिका के लिए बड़ी जीत जैसा दिख सकता है.”

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन घरेलू राजनीतिक कारणों से, यह शायद सफल साबित होगा. वे कास्त्रो परिवार को अपमानित करना और 1959 के पुराने क्रांतिकारियों में से एक को जेल भेजना चाहेंगे. लेकिन रणनीतिक उपयोगिता बहुत अधिक नहीं है.”

अमेरिका क्यूबा में नेतृत्व परिवर्तन कर सकता है

डेल्सी रॉड्रिग्ज़

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इमेज कैप्शन, कुछ लोगों का मानना है कि अमेरिका हवाना में वेनेज़ुएला वाला मॉडल दोहराना चाहता है, जहां डेल्सी रॉड्रिग्ज़ ने सत्ता संभाली है

ट्रंप समेत कई अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि क्यूबा में नेतृत्व की नई व्यवस्था उभर सकती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक़, यह वेनेजुएला जैसा मॉडल हो सकता है, जहां सरकार पूरी तरह नहीं बदली, लेकिन नई व्यवस्था ने ट्रंप प्रशासन से सीधी बातचीत शुरू की है.

ट्रंप ने कई बार कहा है कि वह क्यूबा के अंदर मौजूद कुछ लोगों से संपर्क में हैं, जो आर्थिक संकट के बीच अमेरिका से मदद चाहते हैं.

उन्होंने 12 मई को ट्रुथ सोशल पर लिखा, “क्यूबा मदद मांग रहा है और हम बातचीत करेंगे.”

कुछ दिनों बाद सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ़ ने क्यूबा के अधिकारियों से मुलाक़ात की.

इनमें कास्त्रो के पोते राउल गिलर्मो रोड्रिगेज़ कास्त्रो और गृह मंत्री लाजारो अल्वारेज कासास शामिल थे.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, ”हम क्यूबा से बातचीत करेंगे. आख़िरकार उन्हें फैसला लेना होगा. उनकी व्यवस्था अब काम नहीं कर रही है.”

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता ‘बातचीत के ज़रिये समझौता.’

अमेरिका क्यूबा में कई बदलावों की उम्मीद कर रहा है.

उनमें अर्थव्यवस्था को खोलना, विदेशी निवेश बढ़ाना, निर्वासित क्यूबाई समूहों को भागीदारी देना और क्यूबा में रूसी या चीनी खुफ़िया एजेंसियों की मौजूदगी ख़त्म करना शामिल हो सकता है.

लेकिन इन बदलावों के बावजूद क्यूबा की मौजूदा सरकार काफ़ी हद तक बनी रह सकती है.

जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर माइकल शिफ़्टर ने कहा, “जैसे वेनेज़ुएला में अस्थिरता से बचने की कोशिश की गई थी, वैसे ही क्यूबा में भी अस्थिरता से बचना चाहेंगे. जबरन सत्ता परिवर्तन बहुत जोखिम भरा होगा.”

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्यूबा में ऐसा स्पष्ट रूप से कोई ऐसा नेता नहीं दिखता, जिसे इस नई व्यवस्था के चेहरे के तौर पर पेश किया जा सके.

क्यूबा आर्थिक दबाव से खुद ही ढह सकता है

 क्यूबा

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इमेज कैप्शन, ईंधन की कमी के कारण क्यूबा के लोग पिछले कई दशकों के सबसे गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं

तीसरी संभावना है कि क्यूबा भारी आर्थिक दबाव के सामने खुद ही ढह जाय क्योंकि इस समय क्यूबा में लंबी बिजली कटौती चल रही है. खाने-पीने की चीज़ों की भारी कमी है.

ट्रंप ने इस सप्ताह कहा, ”तनाव बढ़ाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. वो देश (क्यूबा) खुद बिखर रहा है. वहां हालात ख़राब हैं और सरकार का नियंत्रण कमजोर पड़ गया है.”

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तस्वीर इससे कहीं ज़्यादा जटिल है. आर्थिक संकट के बावजूद क्यूबा की सरकार और उसकी सुरक्षा व्यवस्था अब भी काफ़ी हद तक अपना नियंत्रण बनाए हुए है.

माइकल शिफ़्टर ने कहा, “क्यूबा की अर्थव्यवस्था और क्यूबा की सरकार को अलग-अलग समझना होगा. अर्थव्यवस्था ढह सकती है. टूट भी रही है. लेकिन सरकारी व्यवस्था ख़ासकर सुरक्षा तंत्र अब भी काम कर रहा है.”

अगर हालात और बिगड़े और बड़ी संख्या में क्यूबाई लोग देश छोड़ने लगे तो यह ट्रंप प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकता है.

अगर क्यूबा के लोगों ने अमेरिका की ओर पलायन शुरू किया तो उसके लिए ख़ासी मुसीबत खड़ी हो सकती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर व्यवस्था ढहती है तो बड़ी संख्या में लोग किसी भी तरह देश छोड़ने की कोशिश करेंगे जैसा वर्षों से हैती के लोगों के साथ देखा गया है.

एडम इसाकसन ने कहा,”फ्लोरिडा सबसे नजदीकी जगह है, लेकिन कुछ लोग मैक्सिको की ओर भी जा सकते हैं.”

उन्होंने कहा कि उन्हें हैरानी है कि अब तक इतना बड़ा पलायन शुरू नहीं हुआ.

उनके मुताबिक़, “लोग शायद रोज़ सिर्फ 1000 से 1500 कैलोरी पर गुजारा कर रहे हैं और उन्हें बुनियादी इलाज तक नहीं मिल पा रहा. ऐसी स्थिति में आपको लगेगा कि लोग अब तक अपनी नावें बनाना शुरू कर चुके होंगे.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

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