फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप: फ़्रांस को हराकर स्पेन फ़ाइनल में, टूटा एम्बापे का सपना

फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप: फ़्रांस को हराकर स्पेन फ़ाइनल में, टूटा एम्बापे का सपना

फ़्रांस पर जीत का जश्न मनाते स्पेन के खिलाड़ी

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इमेज कैप्शन, स्पेन दूसरी बार वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में पहुंचा है

    • Author, सैम ड्रुअरी
    • पदनाम, बीबीसी स्पोर्ट
  • प्रकाशित

  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

स्पेन ने फ़्रांस को हराकर वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में जगह बना ली है. डलास स्टेडियम में खेले गए सेमीफ़ाइनल में उसने फ़ेवरेट मानी जा रही फ़्रांस की टीम को शानदार अंदाज़ में मात दी.

लुइस दे ला फ़ुएंते की टीम ने स्टार अटैकर्स से भरी फ़्रांस की टीम को पूरी तरह काबू में रखा. मैच में ज़्यादा मौक़े नहीं बने, लेकिन स्पेन ने खेल पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और मिकेल ओयारज़ाबाल और पेद्रो पोरो के गोल की बदौलत रविवार को होने वाले फ़ाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली.

पहले हाफ़ के बीच में स्पेन को पेनल्टी मिली. फ़्रांस के लेफ़्ट-बैक लुकास दीन्ये की ग़लती की वजह से फ़ॉरवर्ड लामिन यामाल को गेंद क्लियर करने की कोशिश के दौरान ज़ोरदार टक्कर लगी और रेफ़री ने पेनल्टी दे दी.

ओयारज़ाबाल ने पूरे आत्मविश्वास के साथ पेनल्टी को गोल पोस्ट के कोने में भेज दिया. बढ़त मिलने के बाद स्पेन ने मैच पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली.

पहले हाफ़ में फीके प्रदर्शन के बाद उम्मीद थी कि फ़्रांस दूसरे हाफ़ में ज़ोरदार वापसी करेगा. लेकिन हुआ इसका उल्टा. स्पेन ने एक बार फिर खेल पर अपना दबदबा बना लिया.

पेद्रो पोरो ने दानी ओल्मो के साथ शानदार वन-टू खेला और फिर नज़दीकी पोस्ट के पास से दूसरा गोल दाग दिया.

इसके बाद फ़्रांस के पास वापसी के लिए आधे घंटे से थोड़ा ज़्यादा समय था, लेकिन बेहद अनुशासित स्पेनिश टीम के सामने उसकी एक नहीं चली.

पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने अब तक सिर्फ़ एक गोल ही खाया है.

स्पेन का अनुशासित खेल

स्पेन के लामिन यामाल भले ही गोल नहीं कर पाए लेकिन उन्होंने शानदार खेल दिखाया

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मैच के आख़िर तक स्पेन ने पूरी शांति, संयम और बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया और आराम से जीत अपने नाम कर ली.

फ़्रांस के लिए लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप फ़ाइनल में पहुँचने का सपना यहीं टूट गया. अब वह शनिवार को तीसरे स्थान के मुक़ाबले में खेलेगा. यह टूर्नामेंट कोच दिदिए देशॉं के 14 साल के कार्यकाल का भी आख़िरी पड़ाव होगा, क्योंकि वह प्रतियोगिता के बाद टीम का साथ छोड़ देंगे.

वहीं, स्पेन अब न्यू जर्सी जाएगा, जहाँ वह बुधवार को इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच होने वाले दूसरे सेमीफ़ाइनल के विजेता का इंतज़ार करेगा.

स्पेन की नज़र अब दूसरी बार वर्ल्ड कप ख़िताब जीतने पर होगी.

स्पेन का डिफ़ेंस, फ़्रांस के अटैक पर पड़ा भारी

स्पेन की मज़बूत रक्षा पंक्ति ने फ़्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बापे को रोके रखा

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इस मुक़ाबले को इस वर्ल्ड कप की सबसे मज़बूत अटैकिंग टीम और टूर्नामेंट की सबसे मज़बूत डिफ़ेंस वाली टीम के बीच की टक्कर बताया जा रहा था.

लेकिन आख़िर में मुक़ाबला एकतरफ़ा साबित हुआ. स्पेन के डिफ़ेंडरों ने फ़्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बापे को भी क़ाबू में रखा और उन्हें अपनी टीम के लिए ख़तरा नहीं बनने दिया.

फ़्रांस ने पूरे टूर्नामेंट में अपने अटैक से कई बार सबको प्रभावित किया था. वहीं स्पेन ने बिना ज़्यादा सुर्खियाँ बटोरे, शांत और संतुलित अंदाज़ में अपना खेल दिखाया. उसका खेल भले ही उतना आकर्षक न लगा हो, लेकिन अगर उसकी क़ाबिलियत पर किसी को कोई शक था, तो अब वह पूरी तरह दूर हो जाना चाहिए.

यूरो 2024 जीतने वाली स्पेनिश टीम की सबसे बड़ी ताक़त लामिन यामाल और निको विलियम्स का शानदार विंग खेल था.

लेकिन इस बार चोटों की वजह से दोनों का असर सीमित रहा है और अब तक दोनों मिलकर सिर्फ़ एक गोल ही कर पाए हैं. हालांकि टूर्नामेंट आगे बढ़ने के साथ लामिन यामाल का प्रभाव लगातार बढ़ता गया है.

स्पेन सिर्फ़ दूसरी बार वर्ल्ड कप फ़ाइनल में पहुँचा है. उसकी कोशिश 2010 की उस महान टीम की बराबरी करने की होगी, जिसने दक्षिण अफ़्रीका में वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी जीती थी.

फ़्रांस के ख़िलाफ़ मिडफ़ील्ड में रोड्री का प्रदर्शन शानदार रहा. उन्होंने कई हमलों को शुरुआत में ही रोक दिया, अपनी टीम के अटैक की नींव रखी और पूरे मैच की रफ़्तार को नियंत्रित किया.

एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट की गंभीर चोट के कारण लंबे समय तक बाहर रहने के बाद अब वह फिर उसी स्तर के क़रीब नज़र आ रहे हैं, जिसने उन्हें 2024 में बैलन डी’ऑर जिताया था.

उनके साथ फ़ाबियान रूइज़ ने भी बेहतरीन खेल दिखाया और बार्सिलोना के प्लेमेकर पेद्री की जगह टीम में चुने जाने के फ़ैसले को सही साबित किया. वहीं डिफ़ेंस ने भी एक बार फिर अपनी मज़बूती दिखाई.

यह सिर्फ़ डिफ़ेंडरों और गोलकीपर की नहीं, बल्कि पूरी टीम और कोच दे ला फ़ुएंते की रणनीति का नतीजा था कि फ़्रांस को मैच का पहला शॉट गोल की दिशा में लगाने के लिए 81वें मिनट तक इंतज़ार करना पड़ा.

अक्सर कहा जाता है कि बड़े टूर्नामेंट वही टीम जीतती है, जो सही समय पर अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाए. फ़्रांस जैसी मज़बूत टीम को जिस अंदाज़ में स्पेन ने हराया है, उसे देखकर लगता है कि वह ठीक उसी समय अपने चरम पर पहुँच रहा है.

स्पेन की राजधानी मैड्रिड में जीत का जश्न मनाते फ़ैंस

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फ़्रांस का फीका प्रदर्शन

किलियन एम्बापे

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इस वर्ल्ड कप में कई मौक़ों पर ऐसा लग रहा था कि बस दिन गिनने की देर है और आख़िर में ट्रॉफ़ी फ़्रांस ही उठाएगा.

किलियन एम्बापे की अगुआई में फ़्रांस का स्टार खिलाड़ियों से भरा अटैक पूरे टूर्नामेंट में शानदार फ़ॉर्म में दिखा और टीम आसानी से सेमीफ़ाइनल तक पहुँच गई.

नॉकआउट चरण में फ़्रांस ने स्वीडन को आराम से हराया, मज़बूत पैराग्वे के ख़िलाफ़ धैर्य और अनुशासन के साथ जीत हासिल की और फिर मोरक्को को भी आसानी से मात दे दी.

एम्बापे के साथ माइकल ओलीसे, उस्मान देम्बेले और डबल चैंपियंस लीग विजेता ब्रैडली बारकोला और देज़िरे डुए जैसे खिलाड़ी थे. ऐसे में अगर किसी दिन एम्बापे का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक़ नहीं भी रहता, तो भी टीम के पास मैच पलटने वाले खिलाड़ी मौजूद थे.

लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. स्पेन ने शानदार खेल दिखाया, लेकिन साथ ही फ़्रांस ने भी इस वर्ल्ड कप का अपना सबसे फीका प्रदर्शन किया. जिस टीम की पहचान अब तक तेज़ और आक्रामक फ़ुटबॉल थी, वही इस मैच में बेअसर नज़र आई.

लुकास दीन्ये की ग़लती की वजह से फ़्रांस टूर्नामेंट में पहली बार पिछड़ गया. इसके कुछ ही मिनट बाद विलियम सलीबा के चोटिल होकर बाहर होने से उसकी मुश्किलें और बढ़ गईं.

फ़्रांस की टीम अपने सबसे ख़तरनाक अटैकर्स को खुलकर खेलने का मौक़ा देने के इरादे से उतरी थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका. ख़ासकर दूसरे हाफ़ में स्पेन की शानदार रणनीति ने यह सुनिश्चित किया कि फ़्रांस के सबसे ख़तरनाक खिलाड़ियों को गेंद सिर्फ़ ऐसी जगह मिले, जहाँ उन्हें आसानी से रोका जा सके.

ऐसा लग रहा था कि अगर फ़्रांस एक गोल कर दे, तो मैच का रुख़ बदल सकता है. लेकिन स्पेन ने गेंद के साथ और बिना गेंद के भी खेल पर ऐसा नियंत्रण रखा कि फ़्रांस के लिए गोल का मौक़ा बनाना बेहद मुश्किल हो गया.

पूरे टूर्नामेंट में रोमांचक खेल दिखाने वाली फ़्रांस की टीम के लिए यह सफ़र बेहद निराशाजनक अंदाज़ में ख़त्म हुआ.

उसकी उम्मीद थी कि वह कोच दिदिए देशॉं को उनके कार्यकाल का दूसरा वर्ल्ड कप ख़िताब दिलाकर शानदार विदाई देगा.

लेकिन अब देशॉं का आख़िरी मैच सिर्फ़ तीसरे स्थान के लिए होने वाला प्ले-ऑफ़ होगा.

हालांकि इस मैच में एम्बापे के पास गोल्डन बूट की दौड़ में अपनी दावेदारी और मज़बूत करने का मौक़ा रहेगा. वह वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज़्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी भी बन सकते हैं. लेकिन जिस ट्रॉफ़ी के लिए वह और फ़्रांस यहाँ आए थे, उसके लिए अब उन्हें अगले चार साल का इंतज़ार करना होगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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