सिस्टम की लापरवाही:  35 करोड़ की 15 ई-बसें 8 साल में ही बनीं कबाड़; पार्ट्स-बैटरी नहीं मिले तो सीटों पर भर दिए फ्लेक्स – Indore News

सिस्टम की लापरवाही: 35 करोड़ की 15 ई-बसें 8 साल में ही बनीं कबाड़; पार्ट्स-बैटरी नहीं मिले तो सीटों पर भर दिए फ्लेक्स – Indore News

सिस्टम की लापरवाही:  35 करोड़ की 15 ई-बसें 8 साल में ही बनीं कबाड़; पार्ट्स-बैटरी नहीं मिले तो सीटों पर भर दिए फ्लेक्स – Indore News

इंदौर को प्रदूषण मुक्त बनाने और जनता को आधुनिक सफर का अहसास कराने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से जो वातानुकूलित (AC) इलेक्ट्रिक बसें खरीदी गई थीं, उनमें से करीब 15 बसें सिस्टम की लापरवाही का शिकार होकर वर्कशॉप में दम तोड़ रही हैं।

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राजीव गांधी चौराहा स्थित AICTSL की वर्कशॉप की तस्वीरें हैरान करने वाली हैं। जिन बसों में रोजाना 40 हजार से अधिक यात्रियों को सफर करना था, वे अब विज्ञापन के होर्डिंग्स, फ्लेक्स और कबाड़ रखने का गोदाम बन चुकी हैं। बसों के भीतर सीटों से लेकर गैलरी तक कचरा भरा हुआ है और आलम यह है कि इनके दरवाजे तक ठीक से बंद नहीं हो पा रहे हैं। कबाड़ हो रही बसों की अनुमानित कीमत करीब 30-35 करोड़ रुपए है।

फेम इंडिया योजना 40 बसें मिली थीं

केंद्र सरकार की ‘फेम इंडिया योजना’ के तहत 2018 में इंदौर को 9 मीटर लंबाई की 40 इलेक्ट्रिक सिटी बसें मिली थीं। शून्य उत्सर्जन वाली इन बसों का मकसद शहर की हवा को साफ रखना था।

  • पुर्जों का टोटा : करीब 25 बसें महीनों से वर्कशॉप में धूल खा रही हैं, क्योंकि उनके जरूरी स्पेयर पार्ट्स और बैटरी उपलब्ध नहीं हैं।
  • बैटरी की समस्या : एक बार बैटरी खराब होने के बाद नई बैटरी की व्यवस्था समय पर नहीं की गई, जिससे करोड़ों की गाड़ियां सड़क से बाहर हो गईं।
  • मेंटेनेंस का अभाव : समय पर मरम्मत न होने से वर्कशॉप में खड़ी इन बसों की हालत लगातार बदतर होती जा रही है।

फर्स्ट ईवी मॉडल, कंपनी पर पेनल्टी भी लगाई थी यह बसें 2018 में खरीदी थीं। जिस कंपनी से यह बस खरीदी गई थी, यह उसका फर्स्ट ईवी मॉडल था। एआईसीटीएसएल प्राइवेट ऑपरेटर के माध्यम से शहर और शहर के बाहर बसों का संचालन करता है। बस को खरीदते समय जो एवरेज बताया गया था, उतना किमी यह बसें नहीं चल पा रही थीं। एआईसीटीएसएल ने कंपनी पर पेनल्टी भी लगाई थी।

संचालन में तकनीकी इशू था बसों के संचालन में तकनीकी इशू के कारण परेशानी आई थी। ऑपरेटर को भी नुकसान हो रहा था। इसके पार्ट्स मिलने की भी समस्या थी। – अर्थ जैन, सीईओ

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