गर्भावस्था में पांचवें माह में एक शिशु की हो चुकी थी मौत, दूसरे का हुआ सुरक्षित प्रसव, जुड़वा थे दोनों

गर्भावस्था में पांचवें माह में एक शिशु की हो चुकी थी मौत, दूसरे का हुआ सुरक्षित प्रसव, जुड़वा थे दोनों

पूर्व रिकार्ड देखने पर ज्ञात हुआ कि गर्भ में जुड़वा शिशु थे, लेकिन एक की गर्भावस्था के पांचवें महीने में ही मृत्यु हो चुकी थी। दोनों शिशु एक ही थैली म …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 24 May 2026 09:47:10 AM (IST)Updated Date: Sun, 24 May 2026 09:49:44 AM (IST)

गर्भावस्था में पांचवें माह में एक शिशु की हो चुकी थी मौत, दूसरे का हुआ सुरक्षित प्रसव, जुड़वा थे दोनों
स्वस्थ बच्चे को दिया जन्म। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. शासकीय पीसी सेठी अस्पताल में हुआ जटिल प्रसव
  2. गर्भ में जुड़वा शिशु थे, लेकिन एक शिशु की पांचवें महीने में ही मृत्यु हो चुकी थी
  3. विशेषज्ञों ने महिला की शल्य क्रिया कर दूसरे शिशु का सुरक्षित प्रसव कराया

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के शासकीय पीसी सेठी अस्पताल में गर्भ में एक शिशु की मृत्यु के बावजूद दूसरे शिशु का सुरक्षित प्रसव हुआ। मां और बच्चा दोनों स्वस्थ है।

अस्पताल में 37 वर्षीय गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा के साथ पहुंची थी। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद पता चला कि महिला की गर्भावस्था नौ माह पूर्ण हो चुकी है। महिला के पूर्व रिकार्ड देखने पर ज्ञात हुआ कि गर्भ में जुड़वा शिशु थे, लेकिन दुर्भाग्यवश एक शिशु की गर्भावस्था के पांचवें महीने में ही मृत्यु हो चुकी थी। स्थिति जटिल थी क्योंकि दोनों शिशु एक ही थैली में थे।

विशेषज्ञों ने बिना विलंब किए महिला की शल्य क्रिया की और दूसरे शिशु का सुरक्षित प्रसव कराया। जन्म लेने वाला शिशु लगभग 3.75 किलोग्राम वजन का है और पूरी तरह स्वस्थ है। मां की जटिल स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रबंध किए। विशेषज्ञों के मुताबिक स्वस्थ शिशु का जन्म किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ा उपहार माना जाता है। चिकित्सकों और स्वास्थ्य संस्थानों की पहली प्राथमिकता हमेशा मां और शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सुरक्षित प्रसव कराना होती है।

12 हजार में एक ऐसा मामला

डॉ. कोमल विजयवर्गीय ने बताया कि इस तरह के प्रसव 12 हजार में एक होता हैं। आमतौर पर जुड़वा बच्चों में तीन माह में ही एक बच्चे की मौत हो जाती है। ऐसी स्थिति में बच्चा पीछे बच्चेदानी में चला जाता है। लेकिन इस मामले में बच्चा पांच माह तक जीवित रहा। जिससे संक्रमण होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। पीसी सेठी अस्पताल में इस तरह का यह पहला प्रसव है।

मृत शिशु कागज जैसी संरचना में हो चुका था परिवर्तित

विशेषज्ञों ने बताया कि मृत शिशु पूरी तरह कागज जैसी संरचना में परिवर्तित हो चुका था, फिर भी जीवित शिशु को किसी प्रकार का संक्रमण नहीं हुआ। महिला पहली बार अस्पताल में उपचार के लिए आई थी। इससे पहले वह निजी चिकित्सालय में उपचाररत थी। जटिल प्रसव प्रक्रिया को स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. कोमल विजयवर्गीय, निश्चेतना विशेषज्ञ डा. सुनीता भटनागर, डा. स्वाति, शिशु रोग विशेषज्ञ डा. दिव्याभ गहलोत, नर्सिंग स्टाफ रेखा और प्रीति ने सफलतापूर्वक संपन्न किया।

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