इंदौर के स्कीम-114 में राजीव आवास विहार के खाली रो-हाउसेस में 20 साल से भी ज्यादा समय तक 11 परिवार अवैध तौर पर रह रहे थे। न तो उन्होंने उस संपत्ति को खरीदने के लिए पैसा भरा था और न ही आईडीए ने उन्हें रो-हाउस आवंटित किए थे। कुछ लोग तो उन्हें किराए पर देकर पैसा भी वसूल रहे थे। शुक्रवार को अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ इंदौर विकास प्राधिकरण ने सख्ती दिखाई और उनसे रो-हाउस खाली करा लिए। मुक्त कराई गई संपत्ति की कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा है। अब प्राधिकरण उन्हें बेचने की तैयारी कर रहा है।
स्कीम-114 में प्राधिकरण ने एक हजार से ज्यादा रो-हाउसेस बनाए थे। जो रो-हाउस नहीं बिक पाए थे, उनके ताले तोड़कर लोग रहने लगे थे। तत्कालीन अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन पिछले महीने प्राधिकरण ने अपनी जमीनों व संपत्तियों को कब्जे से मुक्त कराने का अभियान चलाया।
तब आईडीए के सीईओ को पता चला कि रो-हाउसेस पर भी कब्जे हैं। इसके बाद कब्जा करने वालों को नोटिस देकर हटने को कहा, लेकिन वे नहीं हटे। शुक्रवार को अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मकानों को खाली कराया। अधिकारियों ने अब ताले लगा दिए हैं। इन रो-हाउसेस की मरम्मत कर अब उन्हें नई गाइडलाइन के हिसाब से बेचा जाएगा।
डेढ़ लाख में बिके थे 90 के दशक में
इंदौर विकास प्राधिकरण ने कांग्रेस सरकार के समय स्कीम-114 में एक हजार रो-हाउसेस बनाए थे। तब इनकी कीमत डेढ़ लाख रुपये तय की गई थी। 90 के दशक में बने इन रो-हाउसेस को तब लोग खरीदने के लिए तैयार नहीं रहते थे, क्योंकि वे उन्हें शहर से दूर मानते थे। अब शहर राजीव आवास विहार से भी आगे तक फैल गया है।
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