रिश्ते सलाह से नहीं, साथ देने से संभलते हैं:मुश्किल में फंसे व्यक्ति को तुरंत समाधान न बताएं, उसे सुनें-समझें, यही उसके लिए मदद है

रिश्ते सलाह से नहीं, साथ देने से संभलते हैं:मुश्किल में फंसे व्यक्ति को तुरंत समाधान न बताएं, उसे सुनें-समझें, यही उसके लिए मदद है




किसी अपने को दुख, तनाव या असफलता से जूझते देखकर हमारी पहली प्रतिक्रिया सलाह देने की होती है। लेकिन मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह सही नहीं है। सही मदद का मतलब समस्या का हल बताना नहीं, बल्कि उसे यह एहसास दिलाना है कि वह अकेला नहीं है। जब व्यक्ति महसूस करता है कि उसकी बात सुनी और समझी गई है, तभी वह बेहतर फैसला लेने की स्थिति में आता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, संकट के दौर से गुजर रहे व्यक्ति को सबसे पहले भावनात्मक सुरक्षा चाहिए। उसे तुरंत सलाह देने के बजाय पहले उसकी भावनाओं को स्वीकार करना और बिना निर्णय के सुनना अधिक असरदार होता है। इससे भरोसा बढ़ता है और व्यक्ति खुद समाधान तक पहुंचने में सक्षम बनता है। टेनेसी की मनोचिकित्सक एली स्पॉट्स-डी लाजर कहती हैं कि सलाह तब असर करती है, जब व्यक्ति पहले यह महसूस कर ले कि उसकी बात सचमुच सुनी गई है। इसलिए ‘यह बहुत कठिन होगा’ या ‘मैं तुम्हारे साथ हूं’ जैसी छोटी बातें ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं। लॉस एंजेलिस की विवाह एवं परिवार विशेषज्ञ शेरिल ग्रॉसकोफ के मुताबिक, सलाह देने की जल्दबाजी कई बार सामने वाले से ज्यादा हमारी अपनी बेचैनी को शांत करने की कोशिश होती है। हर समस्या का तुरंत समाधान संभव नहीं होता। ऐसे में अनिश्चितता को स्वीकार करने में मदद करना ज्यादा उपयोगी है। सवाल पूछें, आदेश न दें वर्जीनिया की क्लीनिकल सोशल वर्कर मैरी मैकलॉफलिन कहती हैं कि व्यक्ति अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा विशेषज्ञ खुद होता है। इसलिए ‘तुम्हें ऐसा करना चाहिए’, कहने के बजाय ‘तुम्हें क्या सही लगता है?’ या ‘तुम्हें सबसे बड़ी चिंता किस बात की है?’ जैसे सवाल व्यक्ति को अपने उत्तर खोजने में मदद करते हैं। इससे उसका आत्मविश्वास भी बना रहता है। न्यूयॉर्क की मनोवैज्ञानिक मेलिसा ग्लक बताती हैं कि सीधे पूछ लें- ‘तुम्हें अभी मेरी किस तरह की मदद चाहिए? सिर्फ सुनूं या कोई सुझाव दूं?’ इससे अनचाही सलाह देने की गलती नहीं होती। सवाल पूछें, बच्चों की देखभाल या छोटे कामों में मदद करें विशेषज्ञों के अनुसार, बातचीत के दौरान कुछ पल का शांत विराम भी मददगार होता है। मनोविज्ञान में इसे को-रेगुलेशन कहा जाता है, जिसमें शांत व्यवहार सामने वाले के तनाव को कम करने में मदद करता है। इसके विपरीत, जरूरत से ज्यादा घबराहट दिखाना उसकी चिंता और बढ़ा सकता है। अच्छी भावनात्मक मदद के 5 तरीके 1. पहले सुनें, बाद में सलाह दें। 2. व्यक्ति की भावनाओं को सही ठहराएं, उन्हें कमतर न आंकें। 3. ‘मैं क्या करूं?’ पूछकर उसकी जरूरत समझें। 4. सलाह देने के बजाय खुले सवाल पूछें। 5. जरूरत हो तो भोजन, बच्चों की देखभाल या छोटे कामों जैसी व्यावहारिक मदद भी कर सकते हैं।



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