Priyanka Gandhi Controversy | 215 Educationists Write Letter to Congress Leader

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7 मिनट पहले

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Priyanka Gandhi Controversy | 215 Educationists Write Letter to Congress Leader

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में 28 जुलाई को संसद में स्पीच दी थी- फाइल फोटो

देशभर के 215 वर्तमान और पूर्व कुलपतियों और शिक्षाविदों ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी को खुला पत्र लिखा है। इसमें प्रोफेसर वी. कामकोटि के खिलाफ उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई है।

पत्र में कहा गया है कि किसी शिक्षाविद् पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करते समय तथ्यों और गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

पत्र पर साइन करने वालों ने कहा कि प्रो. वी कामकोटि का एकेडमिक करियर और एजुकेशन में लंबा योगदान रहा है। उनके कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।

प्रो. कामकोटि फिलहाल IIT मद्रास के डायरेक्टर हैं।

प्रो. कामकोटि फिलहाल IIT मद्रास के डायरेक्टर हैं।

चिट्‌ठी में लिखी 5 बड़ी बातें…

  • भारत की संसद हमेशा से ऐसा मंच मानी गई है, जहां विचारों पर बहस होती है, असहमतियां गरिमा के साथ व्यक्त की जाती हैं। किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके तर्कों की मजबूती के आधार पर किया जाता है, न कि उसका उपहास उड़ाकर।
  • हमें आपके उस बयान पर निराशा है, जिसमें आपने IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को गौमूत्र विशेषज्ञ कहा। चाहे यह टिप्पणी व्यंग्य के रूप में की गई हो या राजनीतिक बयानबाजी के तहत। इससे कहीं व्यापक प्रभाव पड़ता है।
  • कामकोटि भारत के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों में से एक के प्रमुख हैं। हर शिक्षाविद की तरह उन्हें भी परिकल्पनाएं रखने, पारंपरिक ज्ञान पर चर्चा करने और वैज्ञानिक संवाद में भाग लेने का अधिकार है। किसी विद्वान के विचारों के सार पर चर्चा करने के बजाय उसे किसी लेबल से खारिज कर देना, उस वैज्ञानिक दृष्टिकोण को कमजोर कर सकता है।
  • इतिहास बताता है कि अनेक ऐसे विचार, जिन्हें कभी असंभव या अविश्वसनीय माना गया था, बाद में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हुए। कई व्यापक रूप से स्वीकार किए गए। विश्वास समय के साथ गलत साबित हुए और त्याग दिए गए।
  • इतनी ही चिंता की बात यह भी है कि ऐसी टिप्पणियां भारत के शैक्षणिक और शोध समुदाय को क्या संदेश देती हैं। उनके तर्कों की आलोचना कीजिए, उनके साक्ष्यों को चुनौती दीजिए, प्रमाणों के हाई स्टैंडर्ड की मांग कीजिए, लेकिन उनकी विद्वत्ता और शोध को कमतर मत आंकिए।

प्रियंका ने कहा था- नई कमेटी में गोमूत्र विशेषज्ञ, इन्हें शिक्षा के बारे में क्या पता

प्रियंका गांधी 28 जुलाई को लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा में शामिल हुईं थीं। वायनाड से सांसद प्रियंका ने अपनी स्पीच के दौरान कहा था- पीएम मोदी को अपने सलाहकार बदलने चाहिए, नई-नई कमेटी बनाने से कुछ नहीं होगा। अभी बनी नई कमेटी में तो एक गोमूत्र विशेषज्ञ भी हैं। इन्हें शिक्षा व्यवस्था के बारे में क्या पता।

कौन हैं प्रो. कामकोटि जिनका नाम संसद में उठाया गया

प्रो. कामकोटि ने IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में MS और पीएचडी की है। उनके नाम से 150 से ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश हो चुके हैं। वे 50 से ज्यादा रिसर्च-डेवपलमेंट प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं।

प्रो. कामकोटि DRDO अकादमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड, इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स सेमीकंडक्टर एसोसिएशन टेक्नो विजनरी अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिले हैं।

भारत के पहले इंडस्ट्री-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर के विकास में भी उनकी बड़ी भूमिका रही है। निस्संदेह वे देश के प्रमुख टेक्निकल माइंड्स में से एक हैं।

2025 में वायरल हुआ था कामकोटि का वीडियो

IIT मद्रास (चेन्नई) के डायरेक्टर प्रो. वी कामकोटि का एक वीडियो सामने आया था। जिसमें वे दावा करते नजर आ रहे थे कि गाय का यूरिन यानी गोमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं। ये कई बीमारियों को ठीक कर सकता है। इन बीमारियों में IBS या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम भी शामिल है।

आलोचनाओं के जवाब में कामकोटि ने कहा था- गोमूत्र के एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लैमेटरी गुणों को वैज्ञानिक तरीके से दिखाया गया है। USA की टॉप मैगजीन ने इसके साइंटिफिक प्रूफ पब्लिश किए हैं। लोगों की ये सोच गलत है कि गोमूत्र की मेडिकल प्रॉपर्टीज पर कोई ठोस एक्सपेरिमेंट या साइंटिफिक एविडेंस नहीं है।

प्रो. कामकोटि ने 2021 में पब्लिश नेचर जर्नल का लेख दिखाया था

अपनी बात को साबित करने के लिए प्रो. कामकोटि ने जून 2021 में साइंस जर्नल नेचर में पब्लिश लेख शेयर किया था। इसमें नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट के एनिमल बायोटेक्नोलॉजी सेंटर और सेल बायोलॉजी एंड प्रोटिओमिक्स लैब से जुड़े साइंटिस्ट्स ने ‘गाय के मूत्र में पेप्टाइड प्रोफाइलिंग के परिणाम’ पब्लिश किए थे।

  • साइंटिस्ट्स ने निष्कर्ष निकाला था- गाय के मूत्र में हजारों एन्डोजिनस पेप्टाइड्स की डिस्कवरी के लिए सिंपल मेथड बताई गई है। ये गोमूत्र से जुड़ी अलग-अलग बायोएक्टिविटी में योगदान करते हैं।
  • हमने ई. कोलाई और एस. ऑरियस के खिलाफ पेप्टाइड-मीडिएटेड एंटीमाइक्रोबियल एक्टिविटी के सबूत दिए हैं, लेकिन अन्य बायोएक्टिविटीज को मान्य करने के लिए और अधिक एक्सपेरिमेंट की जरूरत है।

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