देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी स्वादिष्ट खानपान संस्कृति और स्वच्छता के लिए पहचान बना चुके इंदौर में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लापरवाही बरती जा रही …और पढ़ें

HighLights
- इंदौर में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब
- सिर्फ 15 दिन ही करती है जांच
- इंदौर में सेहत से खिलवाड़ हो रहा
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी स्वादिष्ट खानपान संस्कृति और स्वच्छता के लिए पहचान बना चुके इंदौर में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। जिस शहर को खानपान की राजधानी कहा जाता है, वहां खाद्य पदार्थों की त्वरित जांच के लिए उपलब्ध मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब महीने में केवल 15 दिन ही सक्रिय रह पाती है।
बाकी समय यह वाहन धार सहित अन्य जिले में जांच कार्य में लगा रहता है। ऐसे में करोड़ों रुपए के खाद्य कारोबार और लाखों उपभोक्ताओं की सेहत की निगरानी महज औपचारिकता बनकर रह गई है।
दो जिलों के बीच बंटा है वाहन
खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा इंदौर को एक चलित मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब वाहन उपलब्ध कराया गया है। जानकारी अनुसार माह में लगभग 25 कार्य दिवसों में से 15 दिन इंदौर और 10 दिन धार में जांच की जाती है। ऐसे में इंदौर में जांच के लिए एक बड़ा हिस्सा छूट जाता है। बता दें कि इंदौर में मिलावट के मामले बढ़ते जा रहे हैं। हाल ही में हल्दी, आइसक्रीम और मिर्च में मिलावट पाई गई थी।
एक माह में सिर्फ 250 सैंपल का लक्ष्य
चलित लैब को एक माह में 250 सैंपल जांचने का लक्ष्य दिया है। यानी प्रतिदिन औसतन 15 से 20 नमूनों की जांच होती है। लेकिन इंदौर जैसे विशाल शहर में जहां रोजाना हजारों खाद्य प्रतिष्ठानों, होटल-रेस्तरां, मिठाई दुकानों, डेयरी और सड़क किनारे खाद्य कारोबारियों के यहां लाखों लोग भोजन करते हैं, वहां इतनी कम संख्या में जांच होती है।
केवल प्राथमिक स्तर की होती है जांच
मोबाइल लैब में होने वाली जांच केवल प्राथमिक स्तर की होती है। दूध और दुग्ध उत्पादों, मसालों तथा कुछ अन्य खाद्य सामग्री की मौके पर प्रारंभिक जांच की जाती है। यदि कोई संदिग्ध नमूना मिलता भी है तो उसके आधार पर न तो सीधे कोई प्रकरण दर्ज किया जाता है और न ही जुर्माने की कार्रवाई होती है। यानी जांच का पूरा अभ्यास केवल प्रारंभिक संकेत तक सीमित रह जाता है।
मिलावटी खाद्य सामग्री से शरीर को ऐसे पहुंच रहा नुकसान
- लिवर और किडनी – हानिकारक कैमिकल शरीर में जमा होकर अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं।
- एलर्जी और सांस की बीमारी – त्वचा पर चकत्ते, सूजन, सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन बढ़ रही है।
- कैंसर का खतरा – प्रतिबंधित रंग और सिंथेटिक केमिकल लंबे समय में कैंसर का कारण बन सकते हैं।
- हार्मोनल गड़बड़ी – बच्चों और महिलाओं में हार्मोन असंतुलन और विकास संबंधी समस्याओं का खतरा।
ऐसे करें पहचान
- पानी में डालते ही तेज रंग छोड़ना।
- बहुत ज्यादा चमकीले मसाले संदिग्ध हो सकते हैं।
- मसाले हाथ पर रगड़ने पर कृत्रिम रंग छोड़ें तो सावधान हो जाएं।
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