कहते हैं कि इतिहास खुद को दोहराता है। कुछ ऐसा ही इतिहास बांकीपुर में भी दोहराया गया है। प्रशांत किशोर की जीत ने 59 साल पुरानी कहानी फिर याद दिला दी है। जब बांकीपुर यानी उस वक्त की पटना पश्चिम विधानसभा सीट के नतीजे आए थे। उन नतीजों ने बिहार की सियासत को पूरी तरह बदल दिया था। उस चुनाव में एक ‘जायंट किलर’ ने पटना पश्चिम सीट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री को मात दी थी। अब एक ‘जायंट किलर’ ने दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के गढ़ में सेंध मारी है।
59 साल पुरानी उस कहानी में और इस बार की कहानी में कई चीजें एक सी हैं। कुछ अलग भी हैं पर पहले बात एक सी बातों की। दोनों ही कहानियों में एक नेता होता है, दोनों कहानियों का मुख्य किरदार अपनी पार्टी छोड़कर एक नई पार्टी का बनाता है। दोनों ही कहानियों में नेता छात्रों के लिए सड़क पर उतरता है। दोनों कहानियों में नेता बांकीपुर यानी पहले की पटना पश्चिम सीट से चुनाव में उतरता है और एक गढ़ को ढहा देता है। पहली कहानी का नायक कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाता है तो दूसरी कहानी का नायक भाजपा का गढ़ बन चुकी उसी सीट पर सेंधमारी करता है। पहली कहानी के नायक थे बिहार के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा और नई कहानी के नायक हैं प्रशांत किशोर। आइये जानते दोनों की कहानियों में शामिल इन संयोगों का पूरा किस्सा….
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