जिला कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, करौली के CMHO डॉ. जयंती लाल मीना पर सरकारी कार्यों में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप है।

जिला कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, करौली के CMHO डॉ. जयंती लाल मीना पर सरकारी कार्यों में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप है।
करौली जिले में प्रशासनिक लापरवाही और महिला कर्मचारी के उत्पीड़न के आरोपों पर करौली जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर ने दो अलग-अलग मामलों में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जयंती लाल मीना और सामान्य चिकित्सालय के लैब असिस्टेंट दीपक कुमार गर्ग के खिलाफ चार्जशीट जारी करते हुए उनके वार्षिक वेतन इंक्रीमेंट पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। वहीं, एक अन्य मामले में डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ओ.पी. मीना को जांच के बाद राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी चार्जशीट को निरस्त कर दिया गया।
CMHO पर लापरवाही का आरोप, 1 साल का इंक्रीमेंट रोका
जिला कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, करौली के CMHO डॉ. जयंती लाल मीना पर सरकारी कार्यों में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप है। बताया गया कि जिले में 1800 से अधिक विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (UDID) के आवेदन लंबे समय से लंबित पड़े थे।
कलेक्टर कार्यालय की ओर से इस संबंध में कई बार मौखिक और लिखित निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद आवेदनों के निस्तारण की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसे प्रशासनिक जिम्मेदारी की अनदेखी मानते हुए कलेक्टर ने डॉ. मीना के खिलाफ चार्जशीट जारी की और उनके एक वार्षिक वेतन इंक्रीमेंट पर रोक लगाने का आदेश दिया।
महिला कर्मचारी को प्रताड़ित करने के आरोप में लैब असिस्टेंट पर कार्रवाई
दूसरे मामले में करौली के सामान्य चिकित्सालय में कार्यरत लैब असिस्टेंट दीपक कुमार गर्ग के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है। आरोप है कि उन्होंने अस्पताल में कार्यरत एक महिला कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और उसके साथ अनुचित व्यवहार किया।
मामले की जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जिला कलेक्टर ने दीपक कुमार गर्ग के खिलाफ चार्जशीट जारी करते हुए दो वर्षों तक उनके वार्षिक वेतन इंक्रीमेंट पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। प्रशासन ने इसे कार्यस्थल पर अनुशासन और महिला कर्मचारियों की गरिमा बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना है।
डिप्टी डायरेक्टर को जांच के बाद मिली राहत
इसी प्रकरण में सामान्य चिकित्सालय करौली के उपनिदेशक (डिप्टी डायरेक्टर) डॉ. ओ.पी. मीना के खिलाफ भी पहले चार्जशीट जारी की गई थी। हालांकि विभागीय जांच और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पुष्ट नहीं पाए गए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला कलेक्टर ने डॉ. ओ.पी. मीना के खिलाफ जारी चार्जशीट को ड्रॉप करने का आदेश दिया, जिससे उन्हें विभागीय कार्रवाई से राहत मिल गई।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
कलेक्टर की इस कार्रवाई को सरकारी विभागों में जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। एक ओर लंबित सरकारी कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की गई, वहीं दूसरी ओर कार्यस्थल पर महिला कर्मचारी के उत्पीड़न के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारी के खिलाफ भी सख्त विभागीय कदम उठाए गए।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी सेवाओं में लापरवाही, आदेशों की अवहेलना और कर्मचारियों के साथ अनुचित व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
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