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भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग इस समय एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कार बाजार और ग्राहकों के सामने कई तरह की नई परिस्थितियां आई हैं:
- E20 और इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा: सरकार लगातार E20 और उच्च इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को अपनाने पर जोर दे रही है।
- मास मार्केट से डीजल का गायब होना: आम खरीदारों के लिए डीजल कारों के विकल्प धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं।
- सीएनजी का महंगा होना और लंबी कतारें: सीएनजी (CNG) की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और पेट्रोल पंपों पर सीएनजी वाहनों की लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं।
- ईवी का दायरा और सीमाएं: हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की लोकप्रियता बढ़ी है। लेकिन फिर भी खरीदारों के एक बड़े वर्ग के लिए ये पारंपरिक पेट्रोल कारों का सीधा और आसान विकल्प नहीं बन पाए हैं।

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MG Motor HS PHEV at Auto Expo 2025
– फोटो : Amar Ujala
दशक का सबसे बड़ा बदलाव किस रूप में आने वाला है?
अगले एक साल के भीतर भारतीय बाजार में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा पावरट्रेन बदलाव देखने को मिल सकता है। इसका कारण केवल यह नहीं है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां अचानक हर तरफ छा जाएंगी, बल्कि न्यू एनर्जी व्हीकल्स (NEVs) की भारत में दस्तक इसकी मुख्य वजह है।
- प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) का इतिहास: प्लग-इन हाइब्रिड तकनीक नई नहीं है। लग्जरी कार निर्माता इसे वर्षों से पेश करते आए हैं।
- स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड का प्रदर्शन: मारुति सुजुकी और टोयोटा की स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ियों ने साबित कर दिया है कि बिना बाहरी चार्जिंग के भी इलेक्ट्रिफिकेशन से माइलेज को काफी बढ़ाया जा सकता है।
- प्रीमियम कीमतों की वजह से सीमित दायरा: महंगी कीमतों की वजह से हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड तकनीक अब तक केवल एक खास या सीमित वर्ग तक ही सिमटी रही है।

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Toyota Prius PHEV
– फोटो : अमर उजाला
ग्लोबल और चीनी कार निर्माता भारतीय बाजार के लिए क्या नए विकल्प ला रहे हैं?
अब हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड तकनीक का समीकरण तेजी से बदल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में चीनी वाहन निर्माताओं ने इस तकनीक पर भारी निवेश किया है। और अब ये उत्पाद भारत सहित वैश्विक बाजारों में आ रहे हैं:
- BYD और MG की नई तकनीक: बीवाईडी (BYD) ने अपनी नवीनतम पीढ़ी की DM तकनीक पेश की है, जबकि एमजी (MG) ने अपना NEV प्लेटफॉर्म दिखाया है जो कई इलेक्ट्रिफाइड पावरट्रेन को सपोर्ट करता है। ये प्लेटफॉर्म 900 किमी से अधिक की कंबाइंड ड्राइविंग रेंज का वादा करते हैं। जो पेट्रोल कार की सुविधा के साथ ईंधन की भारी बचत देते हैं। इंडोनेशिया में BYD की DM-i तकनीक ने अनुकूल परिस्थितियों में 65 किमी प्रति लीटर का असाधारण माइलेज देकर इसकी क्षमता साबित की है।
- JSW मोटर्स और चेरी मॉडल: JSW मोटर्स चुपचाप Jetour T2 i-DM और चेरी (Chery) पर आधारित अन्य मॉडलों को भारत लाने पर काम कर रही है।
- किआ (Kia) की तैयारी: किया भारत में Sorento Hybrid को लॉन्च करने की तैयारी में है।
- मास मार्केट में तकनीक का विस्तार: आने वाले समय में हाइब्रिड तकनीक आम गाड़ियों तक भी पहुंचेगी, जिसमें नेक्स्ट-जेनरेशन सेल्टोस (Seltos) शामिल है।
- वैश्विक निर्माताओं का रुख: कड़े होते उत्सर्जन मानकों और ग्राहकों की बदलती उम्मीदों को देखते हुए कई अन्य वैश्विक कार निर्माता भी भारतीय बाजार के लिए ऐसी ही तकनीकों का मूल्यांकन कर रहे हैं।

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Audi RS 5 PHEV
– फोटो : Audi
क्या आने वाले समय में हाइब्रिड कारें सस्ती और आम लोगों की पहुंच में होंगी?
अब तक भारत में होंडा या मारुति सुजुकी से स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार खरीदने के लिए ग्राहकों को उसी कार के साधारण पेट्रोल वेरिएंट के मुकाबले लगभग 4 लाख रुपये अधिक कीमत चुकानी पड़ती थी।
इसकी मुख्य वजहें सीमित प्रतिस्पर्धा, महंगे पुर्जे और कम लोकल मैन्युफैक्चरिंग थीं। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है-
- प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी: जब ज्यादा कंपनियां स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड और अन्य इलेक्ट्रिफाइड पावरट्रेन के साथ मैदान में उतरेंगी, तो प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी।
- लागत में कमी: ज्यादा स्थानीयकरण, अधिक उत्पादन और मार्केट शेयर के लिए कंपनियों की होड़ से धीरे-धीरे कारों की कीमतें कम होंगी।
- सभी के लिए सुलभ तकनीक: जो तकनीक पहले प्रीमियम और सीमित मानी जाती थी, वह जल्द ही व्यापक ग्राहकों की पहुंच में होगी।

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Jetour T2 hybrid SUV
– फोटो : Jetour
कार खरीदारों को चुनने के लिए कौन-कौन से विकल्प मिलेंगे और कौन सी तकनीक किसके लिए सही होगी?
अब तक कार खरीदने की चर्चा सिर्फ ‘पेट्रोल बनाम डीजल’ या ‘पेट्रोल बनाम ईवी’ तक सीमित रहती थी। लेकिन आने वाले समय में ग्राहकों को उनकी ड्राइविंग जरूरतों के हिसाब से कई वास्तविक विकल्प मिलेंगे:
- उपलब्ध पावरट्रेन विकल्प: ग्राहक अब पेट्रोल, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड, रेंज-एक्सटेंडर ईवी, बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) या सीएनजी में से चुनाव कर सकेंगे।
- मल्टी-पावरट्रेन का सह-अस्तित्व: रातों-रात कोई एक तकनीक हावी नहीं होगी, बल्कि अलग-अलग जरूरतों वाले ग्राहकों के लिए अलग-अलग तकनीकें साथ-साथ चलेंगी।
ड्राइविंग जरूरत के हिसाब से सही विकल्प:
- शहर में दैनिक ड्राइविंग करने वाले: इनके लिए प्लग-इन हाइब्रिड सबसे सही विकल्प हो सकता है।
- हाईवे पर सफर करने वाले: जहां उपलब्ध हो, उनके लिए कुशल पेट्रोल या डीजल विकल्प बेहतर रहेंगे।
- रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले: इनके लिए पूरी तरह से इलेक्ट्रिक गाड़ियां सटीक होंगी।
- बिना चार्जिंग झंझट के ज्यादा माइलेज चाहने वाले: इनके लिए स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड एक बेहतरीन संतुलन साबित होगा।
लगभग दो दशक पहले जब डीजल कारें मुख्यधारा बनी थीं। उसके बाद से यह भारतीय ऑटो उद्योग में सबसे बड़ा बदलाव है। यह नई क्रांति पेट्रोल को पूरी तरह इलेक्ट्रिक से बदलने की नहीं, बल्कि भारतीय खरीदारों को विकल्पों की आजादी देने की है।
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