बॉर्डर एरिया में अगर कोई भी सौर/पवन और हाइब्रिड प्रोजेक्ट लगाना है तो उसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, सीमावर्ती क्षेत्रों में सोलर पावर या एनर्जी से संबंधित दूसरे प्रोजेक्ट शुरू हो रहे हैं तो वहां पर काम करने वाले इंजीनियरों, कर्मियों और श्रमिकों को लेकर भी गृह मंत्रालय ने दिशा निर्देश जारी किए हैं। पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश से संबंधित कोई व्यक्ति, बॉर्डर एरिया में इंजीनियर या अन्य स्टाफ में हैं तो उसके लिए केंद्र सरकार से इजाजत लेनी होगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ये सब दिशा निर्देश, राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर जारी किए हैं।
क्या दिशा-निर्देश जारी हुए?
- प्रोजेक्ट की साइट पर निगरानी और वहां काम कर रहे स्टाफ की जांच के लिए समर्पित पुलिस चौकी स्थापित की जाए। वहां पर आने वाले विदेशी नागरिकों पर नजर रखी जाए। सीमावर्ती एरिया में जितना भी स्टाफ होगा, वहां प्रवेश करने से पहले उनका सत्यापन अनिवार्य होगा।
- बॉर्डर के आसपास कोई भी आवास/कैफेटेरिया आदि की सुविधाओं को लेकर भी दिशा निर्देश जारी हुए हैं। अगर इनके चलते बॉर्डर एरिया में भीड़ जुटने की संभावना है, सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है तो इनकी अनुमति न दी जाए।
- रहने का स्थान या होटल, ये सब बॉर्डर से पांच किलोमीटर की दूरी पर हों। प्रोजेक्ट के अंदर यानी परिसर में कैफेटेरिया खोलने की इजाजत दी जा सकती है।
- नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जो भी निर्माण होगा, उसकी ऊंचाई तय कर दी गई है। यदि एलओसी/एलएसी से आठ किलोमीटर दूर कोई निर्माण हो रहा है तो उसकी ऊंचाई तीन मीटर होगी। आठ से बीस किलोमीटर की दूरी है तो ऊंचाई पांच मीटर रहेगी। बीस से पचास किलोमीटर की दूरी है तो ऊंचाई 15 मीटर तक हो सकती है। पवन चक्की आदि पर यह नियम लागू नहीं होगा।
- सौर, पवन और हाइब्रिड एनर्जी प्रोजेक्ट का आवेदन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के पास जाएगा। इसके बाद वह फाइल गृह मंत्रालय के पास पहुंचेगी। वहां से सुरक्षा मंजूरी दी जाएगी। बाद में रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति पत्र हासिल करना होगा। कोई भी आवेदन, सीधे गृह मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय में नहीं आएगा। संबंधित मंत्रालय के तहत वह फाइल उक्त मंत्रालयों में पहुंचेगी। ऐसे मामलों का निपटारा गृह मंत्रालय द्वारा साठ दिन में किया जाएगा।
- बॉर्डर से 50 किलोमीटर के भीतर सौर, पवन और हाइब्रिड प्रोजेक्ट के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
- एक किलोमीटर क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यहां पर किसी तरह की कोई भी गतिविधि या प्रोजेक्ट लगाने की इजाजत नहीं मिलेगी। एक किलोमीटर से पचास किलोमीटर तक सुरक्षा मंजूरी या एक किलोमीटर से बीस किलोमीटर तक अनापत्ति प्रमाण पत्र देने का काम गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय का रहेगा।
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