संसद के मानसून सत्र का आज 18वां दिन है। विपक्ष कई दिनों से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में पुलिस की कथित ज्यादती अन्य मुद्दों पर जवाब की मांग कर रहा है। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री ने गुरुवार को कहा कि वह कल दोपहर तीन बजे तक सभी सवालों का जवाब देंगे।
विपक्ष के विरोध पर गृह मंत्री अमित शाह ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में कहा, सभी लोग अपने सवाल लिखकर दें। मैं कल तीन बजे सभी सवालों का जवाब दूंगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने क्या-क्या कहा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, सबसे पहले ‘लापता’ और ‘भाग गए’ जैसे शब्द अब भारत के सार्वजनिक और संसदीय जीवन में लगातार सुनने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, मैं सत्र शुरू होने के बाद से लगातार संसद आ रहा हूं। मैं अपने कक्ष में बैठता हूं। लेकिन विपक्ष दोनों सदनों में संसद की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है। ऐसे में कोई क्या कर सकता है?
‘जनता तय करे चर्चा से कौन भाग रहा’
चर्चा को लेकर शाह ने कहा कि हमारे संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ कर दिया है कि सरकार नीट परीक्षाओं के विरोध को लेकर पूरी चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, हमने चर्चा के लिए समय तय करने और विपक्ष के तैयार रहने की बात कही थी। यह उनकी शुरुआती मांग थी और हमने इसे मान लिया था। शाह ने कहा, मैंने भी कहा है कि मैं संसद में किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं। लेकिन वे चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। उन्होंने कहा, अब जनता तय करे कि भाग कौन रहा है।
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‘सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं’
शाह ने विपक्ष से कहा कि वह आज दोपहर तीन बजे तक लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र दे। उन्होंने कहा कि सरकार आज दोपहर तीन बजे से कल दोपहर तीन बजे तक हर पहलू पर चर्चा के लिए तैयार है। शाह ने कहा, मैं सदन में बैठूंगा। मैं सभी की बात सुनूंगा और हर मुद्दे का जवाब दूंगा। सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।
‘संसद की कार्यवाही चलने दे विपक्ष’
उन्होंने कहा, मैं इस बात पर भी चर्चा करूंगा कि वे चर्चा क्यों नहीं होने देना चाहते थे। गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सिर्फ संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष को पत्र में क्या लिखा?
गृह मंत्री शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा, आपको विदित है कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने व्यापार सलाहकार समिति की बैठक में सरकार की ओर से संसद में नीट परीक्षा पर छात्र आंदोलन पर चर्चा के लिए सहमति दी है। मैं यह भी जिक्र करना चाहता हूं कि विपक्ष के आग्रह से पहले ही संसद के वर्तमान सत्र में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा हो चुकी है, जिसमें विपक्ष के किसी भी सांसद ने नीट परीक्षा के संबंध में सदन में कोई भी विचार व्यक्त नहीं किया। इसके बावजूद, सरकार फिर से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।
उन्होंने लिखा, मेरा आपसे अनुरोध है कि आप विपक्ष से चर्चा कर आपसी सहमति से आज से जितने समय, जितने घंटे आप उचित समझें, उतना समय आवंटित करने की कृपा करें। मैं निर्धारित समय के दौरान सदन में उपस्थित रहकर, इस मुद्दे पर चर्चा में भाग लेना चाहता हूं और विपक्ष के सभी प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार हूं।
उन्होंने आगे लिखा, लोकतंत्र में चर्चा और संवाद से ही समाधान निकलता है। मेरा लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं में अटूट विश्वास है और मेरा यह मानना है कि यह सदन चर्चा और संवाद के लिए ही है। इसलिए आपसे आग्रह है कि विपक्ष के नेताओं से चर्चा करके इस अहम विषय पर एक अच्छे माहौल में चर्चा कराने की कृपा करें, ताकि इस विषय पर पक्ष विपक्ष के सभी सदस्य अपने बहुमूल्य मत एवं विचार प्रस्तुत कर सकें।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने किया पलटवार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, विपक्ष ने साफ कहा है कि हमें अमित शाह का भाषण सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। जब मैं ‘हम’ कहता हूं, तो मेरा मतलब इस देश की युवा पीढ़ी से है।
उन्होंने कहा, छात्रों पर गोली किसने चलाई? छात्रों को कीलों वाली लाठियों से पीटने का आदेश किसने दिया? क्या अमित शाह ने हमारे बच्चों पर गोली चलाने का आदेश दिया था? अगर उन्होंने ऐसा आदेश दिया था, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया, पिछले 20 दिनों से अमित शाह ‘लापता’ हैं। भारत के गृह मंत्री में हिम्मत नहीं है। वह सदन में नहीं आ सकते।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कांग्रेस पर साधा निशाना
वहीं, भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा, जहां-जहां कांग्रेस सत्ता में है, वहां भ्रष्टाचार आम बात बन गया है। चाहे वह तेलंगाना हो, कर्नाटक हो या झारखंड। तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा, हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है। लेकिन कितनी सीटें होंगी और परिसीमन किस तरह किया जाएगा, यह फैसला संसद को करना है।
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