
आर्थिक दबाव से परेशान पिता की बेबसी भी सामने आई है। उसका कहना है- “पैसे कहां से लाऊं? सबका दबाव है… क्या करूं?” यह सवाल सिर्फ एक परिवार की आर्थिक परेशानी नहीं, बल्कि उस सामाजिक दबाव की तस्वीर है जिसमें बेटी के भविष्य से ज्यादा रकम और समझौते की चर्चा होने लगती है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू यह भी है कि एक नाबालिग बच्ची की जिंदगी को किसी पंचायत के आर्थिक फैसले से नहीं तौला जा सकता। उसे रकम या समझौते से ज्यादा सुरक्षा, शिक्षा, सम्मान और अपने भविष्य का अधिकार चाहिए। अधियनियम-2006 के तहत मामले में नाबालिग है, उसका विवाह हुआ, उसके साथ गलत भी हुआ है। ऐसी स्थिति में पूरे प्रकरण में जेजे और पॉक्सो एक्ट सहित बाल विवाह प्रतिषेध कायमी का नियम है।
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