इंदौर में जल संरक्षण के लिए डॉक्टरों ने उठाए फावड़े, एमजीएम की पहल पर बना रहे 100 वाटर रिचार्जिंग पांड

इंदौर में जल संरक्षण के लिए डॉक्टरों ने उठाए फावड़े, एमजीएम की पहल पर बना रहे 100 वाटर रिचार्जिंग पांड

इस पहल के लिए डॉक्टर, प्रोफेसर और अन्य कर्मचारी मैदान में उतरकर श्रमदान कर रहे हैं। सफेद कोट पहनकर इलाज करने वाले डॉक्टर फावड़ा उठाकर जल संरक्षण का सं …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 04 Jun 2026 08:27:53 AM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jun 2026 08:27:53 AM (IST)

इंदौर में जल संरक्षण के लिए डॉक्टरों ने उठाए फावड़े, एमजीएम की पहल पर बना रहे 100 वाटर रिचार्जिंग पांड
कॉलेज परिसर में श्रमदान करते हुए डॉक्टर। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. डॉक्टर खुद कर रहे श्रमदान, दावा देश का पहला मेडिकल कॉलेज जो इस तरह कर रहा कार्य
  2. जल संकट से मिली सीख, अब डॉक्टर खुद श्रमदान कर बढ़ा रहे भूजल स्तर, देश के लिए बना मिसाल
  3. मेडिकल कॉलेज परिसर में सूखते बोरवेल और गिरते भूजल स्तर ने बढ़ाई चिंता

विनय यादव, नईदुनिया, इंदौर। मरीजों की जान बचाने वाले डॉक्टर अब जल संरक्षण की ओर आगे बढ़े हैं। इस वर्ष हुई भीषण गर्मी के दौरान मेडिकल कॉलेज परिसर में सूखते बोरवेल और गिरते भूजल स्तर ने जब चिंता बढ़ाई, तब डॉक्टरों और मेडिकल प्रबंधन ने केवल चर्चा तक सीमित रहने के बजाय समाधान का रास्ता चुना।

इसी सोच के साथ एमजीएम मेडिकल कालेज, उससे जुड़े अस्पतालों और छात्रावास परिसर में बड़े स्तर पर जल संरक्षण अभियान शुरू किया गया है। इसके लिए करीब 100 बोरिंग के पास वाटर रिचार्जिंग पांड बनाए जा रहे हैं, ताकि वर्षा जल सीधे जमीन में पहुंच सके और भूजल स्तर को पुनर्जीवित किया जा सके।

यहां अब तक 10 रिचार्जिंग पांड तैयार किए जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में सभी बोरिंग के पास वाटर रिचार्जिंग पीट बनाए जाएंगे। खास बात है कि इस पहल के लिए डाक्टर, प्रोफेसर और अन्य कर्मचारी खुद मैदान में उतरकर श्रमदान कर रहे हैं। सफेद कोट पहनकर मरीजों का इलाज करने वाले डाक्टर फावड़ा उठाकर जल संरक्षण का संदेश भी दे रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि हम बड़े और छोटे साइज के पांड बना रहे हैं। इसके माध्यम से अगले वर्ष हमें गर्मी में पानी की समस्या नहीं होगी। मियावाकी फारेस्ट के पास भी वाटर रिचार्जिंग पाट बनाया है।

जल संकट ने गंभीरता से सोचने को मजबूर किया

इस वर्ष गर्मी के मौसम में मेडिकल कालेज और अस्पताल परिसर के कई बोरवेल सूख गए थे। इससे पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई और यह स्पष्ट हो गया कि भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। इस स्थिति ने कालेज प्रबंधन और चिकित्सा समुदाय को गंभीरता से सोचने पर मजबूर किया।

विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि केवल नए बोरिंग करवाना स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि वर्षा जल का संरक्षण और भूजल पुनर्भरण जरूरी है। इसी सोच के साथ वाटर रिचार्जिंग पांड बनाने की योजना तैयार की गई। इन संरचनाओं के माध्यम से बारिश का पानी सीधे जमीन में समाहित होगा और बोरवेलों को प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।

देश का पहला ऐसा मेडिकल कॉलेज, जहां बड़े स्तर पर हो रहा कार्य

कालेज प्रबंधन का दावा है कि यह देश का पहला मेडिकल कालेज है, जहां डाक्टरों की प्रत्यक्ष भागीदारी के साथ इतने बड़े स्तर पर जल संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है। आमतौर पर ऐसे कार्य स्थानीय निकायों या सामाजिक संगठनों के माध्यम से होते हैं, लेकिन यहां चिकित्सा समुदाय खुद नेतृत्व कर रहा है।

पांड में लगाए कमल के पौधे

रिचार्जिंग पांड को पर्यावरणीय दृष्टि से भी आकर्षक बनाने की योजना बनाई गई है। इनमें कमल के पौधे लगाए जाएंगे, जिससे परिसर की सुंदरता बढ़ेगी और हरियाली को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का एकीकृत मॉडल विकसित होगा।

यह सभी मिलकर कर रहे कार्य

  • विद्यार्थी- 4500
  • नर्सिंग स्टाफ- 1500
  • सीनियर डाक्टर- 350 आदि

शुरू किया है अभियान

जल संरक्षण को लेकर मेडिकल कॉलेज में एक अभियान शुरू किया है, जिसमें सभी डाक्टरों की भागीदारी है। कालेज, अस्पताल, होस्टल में करीब 100 बोरिंग है, इनके पास वाटर रिचार्जिंग पांड बनाए जा रहे हैं। इससे हम जल संरक्षण कर पाएंगे और आने वाले वर्षो में बोरिंग गर्मी में सुखेंगे नहीं। अब तक 10 रिचार्जिंग पांड तैयार कर दिए है। – डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कालेज

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