patriotic cinema shifts focus from war to human emotions


अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे भारत में देशभक्ति की कहानियों का अंदाज भी बदल रहा है। वीरता के अतिरंजित किस्सों, युद्धभूमि पर जीत और जोशीले राष्ट्रवाद से इतर अब ऐसी कहानियां भी जगह बना रही हैं, जो देशभक्ति को कहीं अधिक मानवीय, सहज और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर सामने रखती हैं। सिनेमा घरों से लेकर ओटीटी मंचों और टेलीविजन तक यह बदलाव दिखाई दे रहा है।

हालांकि, बड़े बजट की फिल्में अब भी दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। ‘बॉर्डर 2’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्में बड़े पैमाने के युद्ध दृश्यों, एक्शन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कथानक पर जोर देती हैं, वहीं ‘इक्कीस’, ‘अमरन’ और ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ जैसी फिल्में और वेबसीरीज सैनिकों और उनके परिवारों की भावनात्मक यात्रा को कहानी के केंद्र में रखती हैं। पिछले एक दशक में देशभक्ति की बदलती सिनेमाई को आकार देने वाली कुछ प्रमुख फिल्में और वेबसीरीज इस प्रकार हैं: ‘राजी’ (2018): मेघना गुलजार की यह जासूसी फिल्म हरिंदर सिक्का के उपन्यास ‘कॉलिंग सहमत’ पर आधारित थी।

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आलिया भट्ट ने सहमत की भूमिका निभाई, जो 1971 में पाकिस्तानी सैन्य परिवार में विवाह के बाद भारत के लिए जासूसी करती है। फिल्म ने देश के लिए बलिदान के साथ जासूसी के व्यक्तिगत और नैतिक दुष्परिणामों को भी सामने रखा। ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ (2019): आदित्य धर की यह फिल्म 2016 की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से प्रेरित थी।

विक्की कौशल अभिनीत फिल्म ने सैन्य कार्रवाई को जोशीले अंदाज में पेश किया और ‘हाउ इज द जोश?’ संवाद को बेहद लोकप्रिय बना दिया। ‘द फैमिली मैन’ (2019): मनोज बाजपेयी अभिनीत इस सीरीज ने जासूसी को मध्यमवर्गीय पारिवारिक जीवन के साथ जोड़ा। श्रीकांत तिवारी देश की सुरक्षा के साथ पत्नी और बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने की जद्दोजहद करता है।

‘शेरशाह’ (2021): सिद्धार्थ मल्होत्रा अभिनीत यह फिल्म कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर आधारित है। कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि में सैनिक की वीरता के साथ उनकी निजी जिंदगी और मंगेतर डिंपल चीमा के साथ रिश्ते को भी प्रमुखता दी गई। ‘अमरन’ (2024): शिवकार्तिकेयन और साई पल्लवी अभिनीत इस तमिल फिल्म में मेजर मुकुंद वरदराजन की सैन्य यात्रा के साथ उनके परिवार और पत्नी इंदु की भूमिका को भी केंद्र में रखा गया है।

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फिल्म सैनिक के बलिदान के साथ पीछे छूट जाने वालों की पीड़ा को भी सामने लाती है। ‘स्काई फोर्स’ (2025): अक्षय कुमार और वीर पहाड़िया अभिनीत यह फिल्म 1965 के युद्ध में भारतीय वायुसेना की कार्रवाइयों पर आधारित है। हवाई युद्ध और सैन्य वीरता पर केंद्रित यह फिल्म बड़े पैमाने की युद्ध फिल्मों के प्रति दर्शकों की रुचि को दर्शाती है।

‘धुरंधर’ (2026): रणवीर सिंह की दो भागों वाली जासूसी पर आधारित फिल्म में जस्कीरत सिंह रंगी के हमजा अली मजारी नाम से पाकिस्तान में गुप्त अभियान चलाने की कहानी है। कंधार विमान हाईजैक, 2001 संसद हमला और 26/11 मुंबई हमलों जैसी घटनाओं की पृष्ठभूमि वाली यह फिल्म जासूसी और बड़े पैमाने की कार्रवाई को जोड़ती है। ‘इक्कीस’ (2026): श्रीराम राघवन की यह फिल्म सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के जीवन पर आधारित है।

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1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि में यह युवा सैनिक के साहस और बलिदान को अपेक्षाकृत संयमित और मानवीय दृष्टिकोण से पेश करती है। यह दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म भी थी। ‘बॉर्डर 2’ (2026): जे. पी. दत्ता की 1997 की फिल्म की अगली कड़ी में सनी देओल के साथ वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी हैं।

अनुराग सिंह निर्देशित यह फिल्म 1971 के युद्ध को बड़े पैमाने और भव्यता के साथ पेश करती है। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ (2026): नेटफ्लिक्स की यह सीरीज 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना की भूमिका पर केंद्रित है। सिद्धार्थ, जिमी शेरगिल और अभय वर्मा अभिनीत सीरीज में लड़ाकू पायलटों के साहस के साथ उनकी दोस्ती, स्क्वाड्रन की संस्कृति और सैन्य जीवन के भावनात्मक दबाव को भी उभारा गया है।



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