Census 2027:लद्दाख और जम्मू-कश्मीर समेत इन राज्यों में आज से ऑनलाइन स्व-गणना शुरू, पूछे जाएंगे ये 40 सवाल – Census 2027 Online Self Enumeration Jammu And Kashmir, Himachal Pradesh, Uttarakhand Ladakh Caste Questions

Census 2027:लद्दाख और जम्मू-कश्मीर समेत इन राज्यों में आज से ऑनलाइन स्व-गणना शुरू, पूछे जाएंगे ये 40 सवाल – Census 2027 Online Self Enumeration Jammu And Kashmir, Himachal Pradesh, Uttarakhand Ladakh Caste Questions

जनगणना 2027 के लिए ऑनलाइन स्व-गणना की प्रक्रिया आज से शुरू होगी। इसकी शुरुआत लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के उन इलाकों से होगी, जहां सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है। इन जगहों पर लोग खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इनमें दूर-दराज के गांव और ऊंचे पहाड़ी इलाके भी शामिल हैं।

17 से 31 अगस्त तक इन इलाकों के लोग ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर तक जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों की जानकारी दर्ज करेंगे। इस बार कर्मचारियों को 40 सवाल पूछने होंगे। इनमें पहली बार जाति से जुड़ा सवाल भी होगा। माता-पिता की जानकारी और पहचान से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी पूछा जाएगा।

देश के बाकी हिस्सों में लोगों की गिनती अगले साल फरवरी में होगी। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जनगणना संचालन के मुख्य अधिकारी और निदेशक अमित शर्मा ने बताया कि इस बार जानकारी कागज पर कम और डिजिटल तरीके से ज्यादा दर्ज की जाएगी। बर्फबारी वाले इलाकों में मोबाइल एप की मदद ली जाएगी। लोग https://se.census.gov.in पर खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे।

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लद्दाख के सात जिलों में करीब 2 लाख 74 हजार लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी। जम्मू-कश्मीर के 16 जिलों में करीब 88 लाख 10 हजार लोगों की गिनती होगी। इनमें डोडा, पुंछ और कुपवाड़ा जैसे जिले भी शामिल हैं।

पहाड़ों और खराब रास्तों के बीच होगी जनगणना

इन इलाकों में जनगणना करना आसान नहीं है। कई गांव ऐसे हैं जहां सड़क नहीं है या पहुंचना बहुत मुश्किल है। लद्दाख के जंस्कार के कई गांवों में सड़क की सुविधा बहुत कम है। लेह का यिंगचेन गांव भी बहुत दूर है। यहां सिर्फ दो परिवारों के 11 लोग रहते हैं। पास के गांव तक पहुंचने में पैदल करीब 7 घंटे लगते हैं। इसी तरह चांगथांग का हानले गांव करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर है।

अमित शर्मा ने बताया कि कुछ बहुत ऊंचाई वाले इलाकों में कम घर हैं। फिर भी वहां जनगणना कर्मचारी भेजे जाएंगे। सेना और आईटीबीपी के जवान जहां रहते हैं, वहां भी खास इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी दूरदराज गांव में सिर्फ एक परिवार भी रहता है, तो कर्मचारी वहां भी पहुंचेंगे और उसकी जानकारी दर्ज करेंगे।

अधिकारियों की कोशिश है कि सोमवार सुबह सबसे पहले उपराज्यपाल वीके सक्सेना, सांसद हनीफा जान, कारगिल हिल विकास परिषद के अध्यक्ष मोहम्मद जाफर अखून और मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा की जानकारी दर्ज की जाए। मोहम्मद जाफर अखून ने कहा कि लद्दाख के लोग जनगणना को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना से यह पता चलता है कि इलाके में विकास और लोगों की आर्थिक-सामाजिक स्थिति कैसी है। इससे आगे की योजनाएं बनाने में मदद मिलती है।

हिमाचल प्रदेश में भी बर्फीले इलाकों से शुरुआत

हिमाचल प्रदेश के तीन जिलों में भी पहले जनगणना कराई जाएगी। इनमें कोमिक गांव भी शामिल है। यह स्पीति घाटी में करीब 15,049 फीट की ऊंचाई पर है। इसे दुनिया के सबसे ऊंचे ऐसे गांवों में गिना जाता है, जहां गाड़ी से पहुंचा जा सकता है। 2011 की जनगणना में कोमिक में 130 लोग रहते थे। यहां करीब 500 साल पुराना लुंडुप त्सेमो गोम्पा बौद्ध मठ भी है।

हिमाचल प्रदेश की जनगणना अधिकारी दीप शिखा शर्मा ने कहा कि जनगणना 2027 भारत की 16वीं जनगणना और आजादी के बाद 8वीं जनगणना होगी। पहली बार लोगों को खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी देने का मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के करीब 6,903 बर्फीले गांवों और इलाकों को पहले ही इस काम के लिए चुना गया है।

इन जगहों पर सर्दियों में बहुत ज्यादा बर्फ पड़ती है। बर्फबारी के कारण वहां पहुंचना और लोगों तक जाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए इन इलाकों में कड़ाके की सर्दी शुरू होने से पहले ही आबादी की गिनती पूरी कर ली जाएगी। इन इलाकों के लिए 1 अक्तूबर 2026 को जनगणना की तारीख माना जाएगा। किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के पांगी-भरमौर जैसे दूर-दराज इलाकों के लिए यह काम खास तौर पर जरूरी है।

लोग ऑनलाइन भी दे सकेंगे जानकारी

दीप शिखा शर्मा ने बताया कि लोगों की जानकारी दो तरीकों से ली जाएगी। इसके लिए Census 2027-PE नाम का मोबाइल एप इस्तेमाल होगा। इसके अलावा, लोग खुद भी ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे। लोग 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक सरकारी स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) पोर्टल पर अपनी जानकारी भर सकते हैं। जानकारी भरने के बाद उन्हें एक आईडी नंबर मिलेगा। जब जनगणना कर्मचारी घर आएंगे तो लोग यह नंबर उन्हें दे सकेंगे। इससे कर्मचारी दी गई जानकारी की जांच कर सकेंगे। शर्मा ने साफ कहा कि जनगणना के दौरान कोई ओटीपी नहीं मांगा जाएगा।


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हिमाचल प्रदेश में करीब 20,390 कर्मचारी और अधिकारी इस काम के लिए लगाए जाएंगे। मोबाइल एप और एक खास ऑनलाइन पोर्टल की मदद से अधिकारी यह भी देख सकेंगे कि जनगणना का काम कहां तक पहुंचा है। मोबाइल एप इंटरनेट के साथ और बिना इंटरनेट के भी काम करेगा। इससे उन जगहों पर भी जानकारी दर्ज की जा सकेगी जहां मोबाइल नेटवर्क बहुत कमजोर है।

दीप शिखा शर्मा ने कहा कि हिमाचल में जल्दी जनगणना कराने की मुख्य वजह मौसम और खराब रास्ते हैं। सर्दी बढ़ने के बाद इन इलाकों में पहुंचना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए सर्दी आने से पहले ही दूर-दराज के लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी।

उत्तराखंड के चार जिलों के 131 गांवों और तीन कस्बों में करीब 52 हजार लोगों की गिनती की जाएगी। इनमें उत्तरकाशी के 69 गांव, चमोली के 23 गांव, रुद्रप्रयाग के 4 गांव और पिथौरागढ़ के 35 गांव शामिल हैं। तीन कस्बे हैं- गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ। 

उत्तराखंड की जनगणना निदेशक ईवा श्रीवास्तव ने कहा कि दूसरे पहाड़ी राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में बर्फ से ढका इलाका कम है। उन्होंने बताया कि बर्फ वाले इलाकों में जनगणना की तैयारी चल रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कुछ अधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। जबकि बाकी कर्मचारियों का प्रशिक्षण आगे होगा।

इन इलाकों में करीब 162 जनगणना कर्मचारी और 34 अधिकारी लगाए जाएंगे। इसी दौरान बर्फ वाले इलाकों में रहने वाली सेना और अर्धसैनिक बलों की भी गिनती की जाएगी। सुरक्षा कारणों से सेना और अर्धसैनिक बलों की जानकारी कागज पर लिखी जाएगी। इसके बाद यह जानकारी संबंधित अधिकारियों के दफ्तर में कंप्यूटर पर दर्ज की जाएगी।

इस बार पूछे जाएंगे 40 सवाल

पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने जनगणना में पूछे जाने वाले 40 सवाल तय किए हैं। इनमें सबसे खास बात यह है कि आजादी के बाद पहली बार जाति के बारे में भी सवाल पूछा जाएगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण की ओर से जारी आदेश में बताया गया कि 2011 की जनगणना के मुकाबले इस बार 11 नए सवाल जोड़े गए हैं। 


इनमें माता-पिता की जानकारी के अलावा पासपोर्ट, आधार कार्ड, वोटर आईडी, मोबाइल नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस, कोरोना की वैक्सीन और स्थायी पते से जुड़े सवाल भी शामिल हैं। इन सवालों को लेकर लोगों की निजता यानी निजी जानकारी सुरक्षित रहने को लेकर चिंता भी सामने आई थी।

जाति का सवाल सूची में 10वें नंबर पर है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और जाति के बारे में पूछा जाएगा। लोग अपनी जाति जो बताएंगे, कर्मचारी वही दर्ज करेंगे। कर्मचारी यह जांच नहीं करेंगे कि बताई गई जाति पहले से बनी किसी सरकारी सूची में है या नहीं। 


एक अधिकारी ने बताया कि लोगों को खुद ऑनलाइन जानकारी देने की सुविधा जनगणना को डिजिटल बनाने का हिस्सा है। इसमें जनगणना कर्मचारी के घर आने से पहले ही परिवार के लोग अपने घर में रहने वाले सभी लोगों की जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे।

इससे कर्मचारियों को घर-घर जाकर जानकारी जुटाने में कम समय लगेगा और पूरा काम तेजी से हो सकेगा। जनगणना के पहले चरण में भी लोगों को खुद ऑनलाइन जानकारी भरने की सुविधा दी गई थी। उस चरण में घरों और मकानों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई थी।

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