MP High Court ने कहा- मकान मालिक के लिए इंदौर में रहना सुविधाजनक है या नहीं, यह वह तय करेगा, किराएदार नहीं

MP High Court ने कहा- मकान मालिक के लिए इंदौर में रहना सुविधाजनक है या नहीं, यह वह तय करेगा, किराएदार नहीं

मकान मालिक के लिए कौन सा शहर सुविधाजनक है, यह तय करने का अधिकार सिर्फ मकान मालिक और उसके परिवार को है, किराएदार को नहीं।

Publish Date: Thu, 20 Aug 2026 11:16:12 AM (IST)Updated Date: Thu, 20 Aug 2026 11:23:40 AM (IST)

MP High Court ने कहा- मकान मालिक के लिए इंदौर में रहना सुविधाजनक है या नहीं, यह वह तय करेगा, किराएदार नहीं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ। – फाइल फोटो

HighLights

  1. मामले के मुताबिक मकान मालिक ने 2003 में मकान 1100 रुपये मासिक पर दिया था
  2. किराएदार का कहना था कि वह सिर्फ 60 रुपये महीना देता है और नियमित भुगतान कर रहा
  3. मकान मालिक ने कोर्ट में कहा कि पति बीपी के मरीज और सेवानिवृत्त होने वाले हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मकान खाली कराने के लिए कोर्ट पहुंचे मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता पर सवाल उठाए जाने को हाई कोर्ट ने गलत बताया है। कोर्ट ने कहा कि जब मकान मालिक यह सिद्ध कर दे कि बेटे की पढ़ाई या परिवार के सदस्य के बेहतर इलाज के लिए उसे दूसरे शहर में रहना है तो शहर को चुनने का फैसला सही है या गलत, यह सिद्ध करने की उसे आवश्यकता नहीं।

आवश्यकतानुसार कौन-सी जगह उपयुक्त है, यह मकान मालिक और उसका परिवार तय करेगा। कोर्ट ने किराएदार की अपील निरस्त करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला खजराना क्षेत्र की कालोनी का है। मकान मालिक का कहना था कि वर्ष 2003 में उसने मकान 1100 रुपये मासिक किराए पर दिया था।

मकान मालिक ने यह कहते हुए मकान खाली कराने के लिए मुकदमा दायर किया था कि उसके पति बीपी के मरीज हैं और सेवानिवृत्त होने वाले हैं। बड़ा बेटा कंपनी सेक्रेटरी की पढ़ाई कर रहा है और पढ़ाई के लिए इंदौर में रहना चाहता है। छोटा बेटा 12वीं के बाद इंदौर में इंजीनियरिंग करना चाहता है। उसे मकान की वास्तविक आवश्यकता है।

60 रुपये महीने था किराया

किराएदार ने इस बातों का विरोध करते हुए कहा कि किराया सिर्फ 60 रुपये माह था, जिसका वह नियमित भुगतान कर रहा है। मकान मालिक से वर्ष 2009 में मकान का सौदा तीन लाख रुपये में हुआ था। मकान की कीमत बढ़ने की वजह से मकान मालिक अब बिक्री से पीछे हट रहा है।

विचारण न्यायालय ने मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता को स्वीकारते हुए मकान खाली करने का आदेश किराएदार को दिया था। किराएदार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। इस पर मामला हाई कोर्ट पहुंचा।

किराएदार ने तर्क रखा था कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि सीएस के कोर्स के लिए मकान मालिक के बेटे का इंदौर में रहना जरूरी है। कोर्ट ने उसके तर्क को गलत माना। कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक और उसका बेटा यह तय करते हैं कि कोर्स करते हुए इंदौर में रहना उनके लिए सुविधाजनक है तो यह उनकी पसंद है। कोर्ट ने किराएदार की याचिका निरस्त कर दी।

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