पेजेश्कियन ने ईरान में बढ़ते जन-असंतोष को भी स्वीकार किया, जहां युद्ध के कारण गंभीर आर्थिक कठिनाइयां और बढ़ गयी हैं। उन्होंने कहा कि अगर समाज में असंतोष या शिकायतें हैं, तो इसका मतलब है कि हमने उस तरह काम नहीं किया जैसा हमें करना चाहिए था।

अमेरिका के साथ युद्ध तभी खत्म हो, जब हमारा पलड़ा भारी हो; ईरान के राष्ट्रपति की दो टूक
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिका के साथ युद्ध आखिरकार खत्म होना ही चाहिए, लेकिन उस समय समाप्त करना बेहतर होगा, जब हमारा पलड़ा भारी हो। ‘इस्लामिक एसोसिएशन ऑफ ईरान्स मेडिकल कम्युनिटी’ की 31वीं आम सभा को संबोधित करते हुए पेजेश्कियान ने कहा, “यह बेहतर है कि युद्ध को आज ही खत्म कर दिया जाए, जब हम मजबूत और सम्मानित स्थिति में हैं।” उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ईरान की जीत को स्वीकार किया है और विद्यालयों, अस्पतालों तथा बुनियादी ढांचे पर हमलों के लिए अमेरिका को दुनिया भर में निंदा का सामना करना पड़ा है।
पेजेश्कियन ने ईरान में बढ़ते जन-असंतोष को भी स्वीकार किया, जहां युद्ध के कारण गंभीर आर्थिक कठिनाइयां और बढ़ गयी हैं। उन्होंने कहा, “अगर समाज में असंतोष या शिकायतें हैं, तो इसका मतलब है कि हमने उस तरह काम नहीं किया जैसा हमें करना चाहिए था।” राष्ट्रपति ने अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरानी बंदरगाहों एवं जहाजों की नौसैनिक नाकेबंदी के प्रभाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन कदमों ने देश के आयात और निर्यात को बाधित कर दिया है। उन्होंने पेट्रोल खरीदने की सरकारी लागत और देश के भीतर बेचे जाने वाले दाम के अंतर का जिक्र करते हुए ईरान की ईंधन अनुदान के लंबे समय तक जारी रहने पर भी सवाल उठाया।
पेजेश्कियन ने सवाल किया, “किसने कहा कि सरकार 1,30,000 तोमान (0.10 डॉलर) में पेट्रोल खरीदे और फिर उसे 1,500 तोमान (0.0011 डॉलर) में बेचे?” उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा अनुदान जारी रखने से सरकार के पास खाद्य अनुदान और बीमा सहित अन्य आवश्यक कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धन नहीं बचेगा, जिससे श्रमिकों, पेंशनभोगियों और सरकारी कर्मचारियों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है। अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध के लगभग छह महीने बीत जाने के बाद, अनगिनत प्रतिबंधों और बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरानी अर्थव्यवस्था को भारी झटका लग रहा है। इस नाकेबंदी से देश के लिए अपनी आर्थिक जीवनरेखा यानी तेल का निर्यात करना बेहद मुश्किल हो गया है।
वर्षों से पाबंदियों का सामना करने के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से रास्ता निकालने में माहिर होने के बावजूद ईरान प्रतिबंधों में राहत के लिए दबाव बना रहा है। साथ ही वह अपने सबसे मुख्य हथियार होर्मुज जलडमरूमध्य पर इतना नियंत्रण हासिल करना चाहता है, ताकि ऊर्जा व अन्य सामान ले जाने वाले जहाजों से टोल वसूल सके।
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