नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। तिब्बत सीमा के निकट भोटे कोशी नदी के किनारे बसे गांवों में अचानक पानी का उफान आ गया, जिससे रसुवा और आसपास के जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए। सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद की स्थिति साफ नजर आ रही है।
नेपाल में बुधवार को आई भीषण और विनाशकारी बाढ़ ने देश के कई हिस्सों में भारी तबाही मचा दी है। तिब्बत सीमा के निकट भोटे कोशी नदी के किनारे बसे गांवों और क्षेत्रों में बाढ़ का पानी अचानक फैल गया, जिससे जानमाल का भारी नुकसान की खबर है। रसुवा जिले और उसके आसपास के इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इस आपदा में घरों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत संयंत्रों तथा अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर क्षति पहुंची है। कई गांव पूरी तरह तबाह हो गए हैं।
अब तक मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर 95 हो चुकी हैं। सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। खराब मौसम और प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप होने के कारण बचाव और राहत अभियान में काफी दिक्कतें आ रही हैं। नेपाली अधिकारी प्रभावित इलाकों तक पहुंचने और फंसे लोगों को निकालने के प्रयास लगातार जारी रखे हुए हैं। दूसरी ओर सैटेलाइल तस्वीरों से इस तबाही की भयावहता साफ नजर आ रही है।
प्लैनेट लैब्स द्वारा ली गई सैटेलाइट तस्वीरें नेपाल के कई क्षेत्रों में अचानक आई बाढ़ से पहले और बाद की स्थिति की तुलना कर रही हैं। इन तस्वीरों में 23 अगस्त 2026 को बाढ़ आने से पहले और 26 अगस्त 2026 को आपदा के बाद की स्थिति को दिखाया गया है। सैटेलाइट तस्वीरों में मनकामना गांव के पास की घाटियों को बाढ़ से पहले और बाद की स्थिति में देखा जा सकता है। इन तस्वीरों से नदी का उफान, गांवों का डूबना और आसपास के इलाकों में हुए व्यापक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
इसी तरह, एक अन्य सैटैलाइट तस्वीर में नेपाल के खड़गा भंज्यांग गांव को 23 अगस्त 2026 को अचानक बाढ़ आने से पहले और फिर 26 अगस्त 2026 को बाढ़ के बाद की स्थिति में दिखाया गया है। इन तस्वीरों से विनाश की भयावहता का पूरा अंदाजा लगाया जा सकता है। बाढ़ ने न केवल आबादी वाले क्षेत्रों को प्रभावित किया बल्कि आसपास के प्राकृतिक परिदृश्य को भी पूरी तरह बदल दिया है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड (NTB) के अनुसार, रसुवा जिले में आई इस विनाशकारी बाढ़ के बाद कुल 384 पर्यटक लापता हैं। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो कम से कम 500 लोग लापता है, जिनमें कम से कम 133 भारतीय नागरिक भी हैं।
वहीं, नेपाल में आई बाढ़ के बाद गंडक नदी के रास्ते बाढ़ की लहर के आगे बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के संवेदनशील क्षेत्रों में एनडीआरएफ की टीमें अलर्ट पर तैनात की गई हैं। एनडीआरएफ की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग (CWC) की सलाह और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर भारतीय सीमा से लगभग 160 किलोमीटर दूर नेपाल के फुरके खोला क्षेत्र में त्रिशुली नदी के जलस्तर में अचानक भारी वृद्धि देखी गई है।
अधिकारियों का मानना है कि यह वृद्धि नेपाल-चीन सीमा के पास हुई हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ से संबंधित हो सकती है। जारी बयान में कहा गया है कि बाढ़ की लहर गंडक नदी से होते हुए निचले इलाकों में पहुंचने की आशंका है। इसलिए बिहार और उत्तर प्रदेश के स्थानीय अधिकारियों, विशेषकर गंडक नदी के किनारे भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित क्षेत्रों के अधिकारियों को सतर्क रहने और स्थिति पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी गई है। एनडीआरएफ टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।
इस बीच, पीएम मोदी ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद अपने नेपाली प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बातचीत की। मोदी ने बाढ़ से हुई जानमाल की भारी हानि पर गहरा शोक व्यक्त किया और इस कठिन समय में भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि मैंने प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ से हुई जानमाल की हानि पर शोक व्यक्त किया। इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत बचाव और राहत कार्यों में नेपाल के साथ समन्वय कर रहा है।
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