उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही मतदाताओं को साधने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके 10 साल के वर्चस्व को खत्म कर देगा। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में हमारी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात बदायूं जिले की सहसवान विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं सहसवान विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन जिलों में एक जिला बदायूं है। जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बिसौली, सहसवान, बिसौली, बदायूं, शेखूपुर और दातागंज शामिल हैं। सीटों के समीकरण की इस कड़ी में आज हम सहसवान विधानसभा सीट की बात करेंगे। बदायूं जिले की सहसवान विधानसभा सीट साल 1956 में परिसीमन के बाद पहली बार अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव साल 1957 में हुआ था। यहां से पहले विधायक उल्फत सिंह बने थे, जिन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था।
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