दिल्ली आग हादसाः पिता और बेटे ने समझदारी से बचाई कई लोगों की जान

दिल्ली आग हादसाः पिता और बेटे ने समझदारी से बचाई कई लोगों की जान

रियाज़ुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान मंसूरी.
इमेज कैप्शन, रियाज़ुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान मंसूरी

    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
    • ……..से, नई दिल्ली
  • प्रकाशित

  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के एक होटल में बुधवार को लगी भीषण आग ने 21 लोगों की ज़िंदगियां लील लीं, जिसमें 11 विदेशी नागरिक थे. इनमें अधिकांश अपने रिश्तेदारों के इलाज़ के लिए यहां ठहरे हुए थे.

इस घटना के दौरान एक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा, जिसमें रोड पर बिछे गद्दों पर कूदकर करीब 12 से 15 लोगों ने अपनी जान बचाई. यह सूझबूझ का काम होटल के ठीक सामने गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाज़ुद्दीन और उनके बेटे अरमान मंसूरी ने किया था.

उन्होंने न केवल घायलों को बाहर निकालने में मदद की, बल्कि कई लोगों को अस्पताल भिजवाने के लिए चादरें और ज़रूरी कपड़े दिए. हालांकि इस बचाव कार्य में उनकी दुकान का काफ़ी सामान नष्ट हो गया. और उनके इस नुकसान की भरपाई के लिए फिलहाल प्रशासन से कोई आगे नहीं आया है.

इसके बावजूद वे इस बात से संतुष्ट हैं कि उन्होंने लोगों की जान बचाने में योगदान दिया. साथ ही, उन्होंने बताया कि अगर होटल का दूसरा निकास द्वार खुला होता, तो और अधिक लोगों को बचाया जा सकता था.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

गद्दों पर कूदकर बचीं जानें, ऐसे किया इंतज़ाम

होटल के बाहर रोड पर गद्दे बिछाते लोग.

इमेज स्रोत, UGC

इमेज कैप्शन, होटल के बाहर रोड पर गद्दे बिछाते लोग

अरमान मंसूरी की रजाई-गद्दे की दुकान हौजरानी मार्केट में है. वह बताते हैं कि सुबह सवा आठ बजे के आसपास का टाइम था, जब किसी ने बताया कि मेरी दुकान के सामने आग लग गई है.

वह कहते हैं कि साढ़े आठ बजे वे वहां पहुंच गए और देखा कि सामने के होटल के ग्राउंड फ्लोर पर चारों तरफ आग फैली हुई थी और अफरा-तफरी का माहौल था. पर तब आग ऊपर की मंज़िलों तक नहीं फैली थी. इस बीच अचानक होटल से एक व्यक्ति दौड़कर बाहर निकला, फिर उसने बाहर से ही होटल के शीशे तोड़े लेकिन वो दोबारा अंदर नहीं जा सका क्योंकि आग बहुत भड़क गई थी.

सुबह का वक्त होने से होटल में मौजूद सभी गेस्ट लगभग सो रहे थे, कुछ स्टाफ ही वहां मौजूद था.

वह बताते हैं कि आग इतनी ज़्यादा फैल गई कि फिर न कोई बाहर निकल सकता था और न कोई अंदर बचाने जा सकता था.

जैसे ही पहली और दूसरी मंजिल तक धुआं फैला, वहां मौजूद लोग हेल्प..हेल्प कहते हुए चिल्लाने लगे.

रियाज़ुद्दीन

अरमान मंसूरी बताते हैं, “इस दौरान मैंने अपनी दुकान से मोटे-मोटे गद्दे निकालकर साथ वालों की मदद से सड़क पर बिछाने शुरू किए. फिर कई बंदे पहली और दूसरी मंजिल से जान बचाने को नीचे कूदे. गद्दों पर कूदने से उनकी जान बच गई, भले थोड़ी बहुत चोट आई हो.”

उनके पिता रियाज़ुद्दीन मंसूरी का कहना है, “जब हमने देखा कि लोग नहीं बच पाएंगे तो हमने अपने गद्दे बिछा दिए. एक बार में उस पर सात से आठ लोग कूदे, और फिर उनकी संख्या बढ़कर 12 से 15 हो गई. इनमें से किसी की मौत नहीं हुई है.”

वीडियो कैप्शन, दिल्ली के मालवीय नगर में लगी आग में जान बचाने वाले चश्मदीदों ने बताया उस दिन क्या हुआ था

मौके पर क्या-क्या हुआ?

संवाददाता को घटना का ब्योरा देते अरमान मंसूरी.
इमेज कैप्शन, बीबीसी संवाददाता को घटना का ब्योरा देते अरमान मंसूरी

अरमान बताते हैं, “इसके आधे घंटे के बाद फायर ब्रिगेड आई और उसने आग को बुझाया. फिर फायर ब्रिगेड के साथ करीब दस लोग अंदर गए जिसमें मैं भी था. मगर धुआं बहुत होने से मैं ज़्यादा अंदर जाने की हिम्मत नहीं कर सका. सिर्फ़ ग्राउंड फ्लोर पर गया. लेकिन वहां भी सांस लेना मुश्किल था. वहां मैंने चारों तरफ कैजुएलिटी देखीं, कई लोग बेहोश पड़े थे.”

वह होटल से बाहर निकाले गए लोगों के बारे में बताते हुए कहते हैं, “हम लोग करीब 12-15 लोगों को बाहर निकालकर लाए, हमने उन्हें होश में लाने के लिए गालों पर थपथपाया भी पर उनके शरीर में कोई रिस्पॉन्स नहीं था. फिर हमने एंबुलेंस के जरिए उन्हें मैक्स अस्पताल भिजवा दिया.”

अरमान मंसूरी

वह कहते हैं कि आग अचानक तेज़ी से भड़की, अगर होटल के आसपास रहने वाले लोग बचाने नहीं आते तो शायद नुक़सान ज़्यादा होता. शायद जितने लोगों को बचाया जा सका है, वो भी मुमकिन नहीं होता.

उनके पिता रियाज़ुद्दीन ने बताया कि शवों को ले जाने के लिए भी उन्होंने अपनी दुकान से रजाई के कवर, चादरें और दूसरे ज़रूरी कपड़े दिए.

‘ज़िंदगियां बचाने का सुकून’

दिल्ली के मालवीय नगर में आग

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, दिल्ली के मालवीय नगर स्थित इसी इमारत में आग लगी थी

अरमान कहते हैं कि मुझे इस बात पर गर्व है कि मैंने आग से अपने सामान को सुरक्षित करने के बजाय वहां फंसे लोगों की मदद करने के बारे में सोचा.

वह कहते हैं कि “सामान तो छह महीने, एक साल में रिकवर हो जाएगा, मेरा करीब डेढ़ से दो लाख रुपये का नुकसान हुआ है. मगर जिनकी जानें बचीं, उसके आगे इसकी कीमत कुछ नहीं है.”

हालांकि अरमान की दुकान में आग के बाद काफी नुकसान हुआ है. उनका माल रेस्क्यू के दौरान इस्तेमाल हुआ जो अब बिकने लायक नहीं है.

अरमान से पूछा गया कि क्या आग बुझाने में उनके सामान का जो नुक़सान हुआ, उसकी भरपाई के साथ स्थानीय प्रशासन ने उनसे संपर्क किया है?

इस पर वह कहते हैं, “मुझसे मिलने स्थानीय विधायक सतीश उपाध्याय जी आए थे और उन्होंने सराहना की और बोले कि हम आपकी मदद करने की कोशिश करेंगे, अगर कुछ हो सकेगा तो आपको बताएंगे.”

अरमान की दुकान का हाल.

इमेज स्रोत, Arman Mansoori

इमेज कैप्शन, आग के कारण अरमान की दुकान को भी नुकसान हुआ है

उधर, अरमान के पिता रियाजुद्दीन कहते हैं कि युद्ध के चलते वैसे ही मार्केट ठंडा है, ऊपर से उनकी दुकान का नुकसान हो गया है और बेटी की शादी तय है.

वह कहते हैं कि लोगों को बचाने से उन्हें सुकून तो मिला पर दुकान खाली हो जाने से समस्या पैदा हो गई है.

उन्होंने कहा, “हमारा डेढ़-दो लाख का नुक़सान है, अगर हेल्प हो जाएगी तो हम खड़े हो जाएंगे दोबारा से. वरना दिक्कत तो आएगी, ज़ाहिर सी बात है.”

“मेरे घर में दो महीने बाद बेटी की शादी है. उसके लिए मैं अरेंजमेंट कैसे करूंगा. माल ही खत्म हो गया. हम तो छोटे कारोबारी हैं, हमारे लिए ये बड़ी रकम है. इसी से हमारा काम चलता है, सिर्फ़ एक बेटा है और छह बेटियां हैं.”

अंत में वे कहते हैं कि अगर होटल के नीचे के हिस्से में आग नहीं लगती तो ज़्यादा लोगों की जान बचाई जा सकती थी क्योंकि मुख्य रास्ता नीचे ही था.

और एक दूसरा चैनल का गेट था लेकिन उसमें ताला लगा हुआ था. बाद में फायर ब्रिगेड ने पहुंचकर उसे काटा, तब उन्होंने कुछ शव निकाले और कुछ जिंदा लोगों को भी निकाला गया. रियाजुद्दीन कहते हैं- ये रास्ता खुला होता तो शायद ज़्यादा लोग बच पाते.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

Source link
#दलल #आग #हदस #पत #और #बट #न #समझदर #स #बचई #कई #लग #क #जन

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *