ईडी:260 करोड़ रुपये के बदले 120 करोड़ रुपये की कीमत के दिए प्लॉट, 14 साल बाद भी नहीं मिली 140 करोड़ की जमीन – Ed: Cash Worth Rs 43 Lakh, Jewellery Valued At Rs 12 Crore Seized; Two Bank Accounts With Rs 27 Lakh

ईडी:260 करोड़ रुपये के बदले 120 करोड़ रुपये की कीमत के दिए प्लॉट, 14 साल बाद भी नहीं मिली 140 करोड़ की जमीन – Ed: Cash Worth Rs 43 Lakh, Jewellery Valued At Rs 12 Crore Seized; Two Bank Accounts With Rs 27 Lakh

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए), 2002 के तहत 25 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर में वाटिका लिमिटेड और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर से जुड़ी सात रिहायशी और कमर्शियल जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान, ईडी ने कई ऐसे दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद किए हैं। इनमें वाटिका लिमिटेड के प्रमोटरों और डायरेक्टरों से जुड़े प्रॉपर्टी के दस्तावेज, ऑडिट किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट, टैली डेटा, फंड के लेन-देन/डायवर्जन से जुड़े रिकॉर्ड और शिकायतकर्ताओं से मिले फंड की जानकारी शामिल है। इसके अलावा, तीन महंगी लग्जरी गाड़ियां, गहने और बैंक अकाउंट/सिक्योरिटीज भी जब्त/फ़्रीज की गईं,  जिनकी कुल कीमत लगभग 33 करोड़ रुपये है।


ईडी ने वाटिका लिमिटेड, उसके प्रमोटर-डायरेक्टर (अनिल भल्ला, गौतम भल्ला और गौरव भल्ला) और अन्य लोगों के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की थी। यह ईसीआईआर, दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा आईपीसी, 1860 की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज कई केसों पर आधारित है। इन केसों में धोखाधड़ी से बहला-फुसलाकर पैसे लेने, रिहायशी प्लॉट न देने और दूसरे संबंधित अपराधों का आरोप लगाया गया है।

अब तक हुई जांच से ‘वाटिका इंडिया नेक्स्ट’ और ‘वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2’ प्रोजेक्ट से जुड़े लेन-देन में एक जैसा पैटर्न सामने आया है। इसमें शिकायत करने वालों से रिहायशी प्लॉट के अलॉटमेंट और बिक्री के लिए पहले ही बड़ी रकम ले ली गई थी, लेकिन कई डेडलाइन बीत जाने के बाद भी वादे के मुताबिक प्लॉट का एक बड़ा हिस्सा नहीं दिया गया। 2010 और 2012 के बीच पीड़ित पार्टियों से मिली लगभग 260.30 करोड़ रुपये की रकम के बदले लगभग 120 करोड़ रुपये कीमत के प्लॉट दिए गए। 

पीड़ित लोगों की कई कोशिशों के बावजूद, 14 साल बाद भी बाकी प्लॉट नहीं दिए गए। जांच में वाटिका ग्रुप से जुड़ी अलग-अलग जमीन की मालिक/ग्रुप कंपनियों और मुख्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। इसके अलावा, इसी प्रोजेक्ट में आरोपी लोगों ने पीड़ित कंपनी की मंजूरी लिए बिना चुपके से तीसरे पक्ष को 14 प्लॉट बेच दिए। 

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