भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की न्यायिक जांच आयोग रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग जोर पकडने लगी है। मामले को लेकर याचिका दायर करने वाले पक्षकारों को कहना…और पढ़ें

HighLights
- भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की न्यायिक जांच आयोग रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
- पक्षकारों को कहना है कि रिपोर्ट देखे बगैर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता
- दिसंबर-जनवरी में भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से हुई 36 मौत हुई थी
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की न्यायिक जांच आयोग रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग जोर पकडने लगी है। मामले को लेकर याचिका दायर करने वाले पक्षकारों को कहना है कि रिपोर्ट देखे बगैर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।
चूंकि कोर्ट ने उन्हीं की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायिक आयोग गठित किया था। इस आयोग की जांच रिपोर्ट की प्रति उन्हें मिलना ही चाहिए, ताकि वे इसका अध्ययन कर तर्क कोर्ट के सामने रख सकें। जांच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने की मांग को लेकर याचिकाकर्ता कोर्ट में आवेदन देंगे। मामले में अगली सुनवाई भले ही 8 सितंबर को होना है, लेकिन हाई कोर्ट की रजिस्ट्री शनिवार 29 अगस्त को खुलेगी।
भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से हुई 36 मौत हुई थी
दिसंबर-जनवरी में भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से हुई 36 मौत हुई थी। इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं चल रही हैं। इन सभी की सुनवाई एक साथ होती है। याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था।
आयोग की सील बंद रिपोर्ट कोर्ट पटल पर रखी गई थी
25 अगस्त 2026 को आयोग की सील बंद रिपोर्ट कोर्ट पटल पर रखी गई थी। एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने का विरोध किया था जिसके बाद कोर्ट ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी है। अन्य याचिकाकर्ता इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि जांच आयोग की रिपोर्ट जानने का जनता को अधिकार है। वे इस बारे में कोर्ट में आवेदन देंगे और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करेंगे।
सुनवाई अलग से की जाए
याचिकाकर्ता महेश गर्ग की ओर से पैरवी करने वाले एडवोकेट मनीष यादव ने नईदुनिया से चर्चा में कहा कि वे आवेदन देकर मांग करेंगे कि उनकी याचिका की सुनवाई अलग से की जाए, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें। आवेदन में वे रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी उठाएंगे।
यह जनहित का मामला है, रिपोर्ट सार्वजनिक होना ही चाहिए
एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट रितेश इनाणी ने कहा कि यह जनहित का मामला है, रिपोर्ट सार्वजनिक होना ही चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस संबंध में कई न्याय दृष्टांत हैं। इनाणी ने कहा कि वे शनिवार को इस संबंध में आवेदन प्रस्तुत करेंगे।
इसके पहले भी अनेक मामले हैं जहां कोर्ट ने जनहित याचिकाओं में रिपोर्ट सार्वजनिक की है। इनाणी ने कहा कि हम यह मांग भी उठाएंगे कि इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग चालू रखी जाए, ताकि आमजन देख सकें कि कोर्ट में क्या सुनवाई हो रही है।
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