
बदलते समाज में भाई-बहन का रिश्ता अब केवल भाई रक्षा करेगा, बहन आशीर्वाद देगी तक सीमित नहीं है। आज बहन भी परिवार की आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक जिम्मेदारियों में बराबर की हिस्सेदार है। मुलानी परिवार की कहानी इसी बदलाव को सामने लाती है। शोभा ने भाइयों के साथ सिर्फ दुकान नहीं संभाली, बल्कि परिवार के सफर में भी बराबर की भूमिका निभाई। भाइयों ने भी उन्हें केवल बहन के रूप में नहीं, बल्कि भरोसेमंद साथी और बराबर की भागीदार के रूप में स्वीकार किया। मुलानी परिवार की राखी इसलिए खास है, क्योंकि यहां कलाई पर बंधने वाला धागा सिर्फ सुरक्षा का वादा नहीं करता-वह बराबरी, भरोसे और साथ निभाने की कहानी भी कहता है।
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