इंदौर में ड्रेनेज का पानी घरों में घुसा तो जन-विश्वास शिविर में फूटा रहवासियों का गुस्सा

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत शनिवार को मूसाखेड़ी स्थित जोन-18 कार्यालय में लगे शिविर में वार्ड-52 के रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। स्कीम 94 की आइडीए मल्टी के निवासियों ने मंत्री, महापौर, विधायक और कलेक्टर के सामने ड्रेनेज के गंदे पानी की समस्या उठाते हुए नगर निगम के स्वच्छता दावों पर सवाल खड़े किए।

रहवासियों ने बताया कि ड्रेनेज का पानी सड़कों के साथ घरों में भी घुस जाता है। कई बार शिकायत के बाद भी सिर्फ खानापूर्ति होती है। एक रहवासी ने तो यहां तक कह दिया कि विधायक बाबा तो काम करवाना चाहते हैं, लेकिन पार्षद काम नहीं होने दे रहे। निगम के अधिकारी भी सुनवाई नहीं कर रहे। इससे बच्चे और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं और बीमारी का खतरा बना हुआ है।

लोगों ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतों के बाद भी फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। अधिकारी मौके पर आकर फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई समाधान नहीं होता। ठेकेदारों से मिलीभगत कर घटिया काम कराया जा रहा है और बजट का दुरुपयोग हो रहा है।

रहवासियों ने मांग की कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई हो। मामले की गंभीरता देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने मौके पर टीम भेजकर तत्काल समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने लंबे समय से समस्या को अनसुना करने वाले जोन-18 के कर्मियों पर कार्रवाई के आदेश दिए।

अवकाश के कारण शनिवार को लगा शिविर

दरअसल शुक्रवार को अवकाश होने के कारण इस बार शिविर शनिवार को आयोजित किया गया। यह जिले का चौथा जन-विश्वास शिविर था। पिछले तीन शिविरों की तुलना में यहां सजावट कम थी, लेकिन सड़कों की सफाई और गंदगी हटाने का काम कराया गया। सुबह 10.30 बजे से शुरू हुए शिविर में आमजन की संख्या कम, जबकि अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या अधिक रही। शिविर में मंत्री तुलसी सिलावट, विधायक महेंद्र हार्डिया, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र का भ्रमण कर शासकीय संस्थाओं और विकास कार्यों का जायजा भी लिया।

स्वास्थ्य जांच में दिखी सबसे ज्यादा भीड़

शिविर में विभिन्न विभागों के स्टाल लगे थे, लेकिन सबसे अधिक भीड़ स्वास्थ्य शिविरों में रही। एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक विभागों द्वारा बीपी, शुगर की जांच और दवाइयां वितरित की गईं। सफाईकर्मी और स्थानीय लोग भी जांच कराने पहुंचे।

प्रचार के अभाव में नहीं पहुंचे लोग

शहरी क्षेत्र में शिविरों का समुचित प्रचार न होने से आमजन को जानकारी नहीं मिल पा रही। शिविर स्थल खोजने में भी लोगों को परेशानी हुई। क्षेत्रीय निवासी कमलेश सिंह और राजेंद्र वर्मा ने कहा कि उन्हें शिविर की जानकारी नहीं थी। रास्ते से गुजरते समय पता चला तो आयुष्मान कार्ड की जानकारी लेने रुक गए।

जन-विश्वास शिविर की खास बातें

  • अवधि : सात अगस्त से लगाए जा रहे शिविर, आठ जनवरी तक हर शुक्रवार को लगेंगे।
  • अब तक : जिले में दो शहरी और दो ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर आयोजित हुए।
  • उद्देश्य : समस्या निवारण के साथ क्षेत्र भ्रमण और योजनाओं के हितग्राहियों से संवाद।
  • वितरण : योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को प्रमाण पत्र भी दिए जा रहे हैं।

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