देशभर में हर साल पांच हजार करोड़ की संपत्तियों को नष्ट कर रहे दीमक और चूहे

देशभर में हर साल पांच हजार करोड़ की संपत्तियों को नष्ट कर रहे दीमक और चूहे

मच्छर, चूहे, काकरोच, खटमल और दीमक अब केवल घरेलू परेशानी नहीं रहे, बल्कि जनस्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और करोड़ों की संपत्ति के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 06 Jun 2026 10:26:11 AM (IST)Updated Date: Sat, 06 Jun 2026 10:26:11 AM (IST)

देशभर में हर साल पांच हजार करोड़ की संपत्तियों को नष्ट कर रहे दीमक और चूहे
कीट नियंत्रण को लेकर जानकारी देते पेस्ट कंट्रोल एसोसिएशन के पदाधिकारी। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. प्रोफेशनल कीट नियंत्रण जरूरी, विश्व कीट दिवस से चलेगा जागरूकता अभियान
  2. इंदौर पेस्ट कंट्रोल एसोसिएशन सरकारी स्कूलों में आयोजित करेगा जागरूकता सत्र
  3. 6 जून विश्व कीट दिवस से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदाैर। मच्छर, चूहे, काकरोच, खटमल और दीमक अब केवल घरेलू परेशानी नहीं रहे, बल्कि जनस्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और करोड़ों की संपत्ति के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वेक्टर जनित रोगों से हर साल सात लाख से अधिक मौतें होती है।

भारत में दीमक और चूहों के कारण हर साल करीब पांच हजार करोड़ की संपत्तियों का नुकसान हो रहा है। इन्हीं खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 6 जून विश्व कीट दिवस से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। स्कूलों में जागरूकता सत्र आयोजित होंगे और नि:शुल्क निरीक्षण और वेक्टर जनित बीमारियों से बचाव की जानकारी दी जाएगी।

इंदौर पेस्ट कंट्रोल एसोसिएशन द्वारा शहर में जून-जुलाई के दौरान सरकारी स्कूलों में जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे। इंदौर पेस्ट कंट्रोल एसोसिएशन द्वारा बताया गया कि कीट केवल असुविधा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा हैं। मच्छरों से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां फैलती हैं, जबकि चूहे, काकरोच और दीमक हर साल भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।

तेजी से विकसित हो रहे इंदौर में फूड इंडस्ट्री, वेयरहाउसिंग, होटल व्यवसाय और आवासीय क्षेत्र बढ़ने के साथ प्रोफेशनल कीट नियंत्रण अब जरूरत बन चुका है।गंभीर कीट संक्रमण की स्थिति में बिना लाइसेंस वाले रसायनों या घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। गलत उपचार से कीटों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

मधुमक्खिया और सांप इको फ्रेंडली

एसोसिएशन के आदित्य भावसार, अनिल सिंह राठौर ने बताया कि मधुमक्खियां और सांप दोनों पारिस्थितिकी तंत्र का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।इनको कभी भी नहीं मारना चाहिए।इन्हे प्रकृति का रक्षक माना जाता है।मधुमक्खिया फलों और पौधों में प्रजनन का 80 प्रतिशत से अधिक काम करती है।इन्हीं के कारण फसलों और सब्जियों की पैदावार बढ़ती है।वहीं सांप भी प्रकृतिक का रक्षण करते है। सांप चूहों, मेंढकों और अन्य हानिकारिक कीड़ों का प्राकृतिक शिकार करते हैं और फसलों को सुरक्षित करते है।

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