इंदौर के स्टार्टअप ने बनाया काउंटर ड्रोन सिस्टम, जापान की कंपनियों को आया पसंद

इंदौर के स्टार्टअप ने बनाया काउंटर ड्रोन सिस्टम, जापान की कंपनियों को आया पसंद

डीप-टेक के क्षेत्र में इंदौर से 11 महीने पहले शुरू हुआ एक स्टार्टअप- मिराक एयारोस्पेस का काउंटर ड्रोन सिस्टम जापान तक अपनी तकनीकी पहचान बनाने जा रहा ह…और पढ़ें

Publish Date: Sun, 30 Aug 2026 08:46:52 PM (IST)Updated Date: Sun, 30 Aug 2026 08:56:33 PM (IST)

इंदौर के स्टार्टअप ने बनाया काउंटर ड्रोन सिस्टम, जापान की कंपनियों को आया पसंद
जापान स्थित कंपनी के साथ चर्चा में शामिल गौरव सिंह। गौरव सिंह द्वारा विकसित ड्रोन बोल्ट। (सौजन्य)

HighLights

  1. मिराक एयरोस्पेस से तीन कंपनियों की बातचीत जारी
  2. ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया विचार तो विकसित की तकनीक
  3. जापान में बनाए जा सकेंगे ये ड्रोन, सेना में चल रही ट्रॉयल-टेस्टिंग

भरत मानधन्या, नईदुनिया, इंदौर : डीप-टेक के क्षेत्र में इंदौर से 11 महीने पहले शुरू हुआ एक स्टार्टअप- मिराक एयारोस्पेस का काउंटर ड्रोन सिस्टम जापान तक अपनी तकनीकी पहचान बनाने जा रहा है। जापान की तीन कंपनियों ने इस स्टार्टअप के साथ काम करने में रुचि दिखाई है और जापान की जरूरतों के अनुसार ये ड्रोन विकसित करने पर शुरुआती बातचीत की है।

ये काउंटर ड्रोन हवा में ही दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं। इनमें से कुछ सिस्टम लक्ष्य आधारित कार्रवाई के लिए भी विकसित किए गए हैं। ड्रोन भारतीय सेना को उपलब्ध कराए गए हैं, जहां उनकी ट्रायल और टेस्टिंग की जा रही है।

गौरव ने इस तकनीक के लिए पेटेंट भी फाइल किया है

इंदौर के गौरव सिंह ने रूस और इजराइल सहित अन्य देशों की निर्माण एजेंसियों में काम करने के करीब 15 वर्षों के अनुभव के आधार पर आठ से नौ महीने के शोध के बाद यह तकनीक विकसित की। उनके अनुसार, आपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन आधारित खतरों से निपटने में महंगी तकनीकों के उपयोग ने उन्हें कम लागत वाला यह समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

उनके अनुसार, काउंटर ड्रोन सिस्टम का उपयोग अन्जान या संभावित खतरनाक ड्रोन की पहचान और उससे सुरक्षा के लिए किया जाता है। रडार, कैमरा और अन्य सेंसर की मदद से यह आसमान में ड्रोन की गतिविधियों का पता लगा सकता है। खतरे की स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देकर ड्रोन को रोकने या निष्क्रिय करने की कार्रवाई की जा सकती है।

हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल जापान गया था। इसमें देशभर से 71 स्टार्टअप चुने गए थे। इनमें मध्य प्रदेश से अकेला इंदौर का यह यह मिराक एयरोस्पेस स्टार्टअप था। गौरव के अनुसार, जापान की तीन कंपनियों के साथ फंडिंग और निर्माण को लेकर प्रारंभिक चरण की बातचीत हो चुकी है। मिराक एयरोस्पेस जापान की भौगोलिक और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार ड्रोन विकसित कर वहां आपूर्ति करने की दिशा में काम कर सकता है। इस पर आगे की बातचीत होनी है।

दो प्रकार के सिस्टम किए विकसित

पहला ड्रोन (रफ्तार 300 किमी प्रति घंटा):

  • यह दुश्मन के ड्रोन को हवा में ध्वस्त करने की क्षमता रखता है। यह अपने साथ विस्फोटक ले जाने में भी सक्षम है। इसे मैन्युअल भी आपरेट किया जा सकता है, यानी सेना अपने लक्ष्य सेट कर हमले कर सकती है। इस ड्रोन को एक से अधिक बार उपयोग किया जा सकता है।

दूसरा ड्रोन (रफ्तार 250 किमी प्रति घंटा)

  • हवाई जहाज के आकार का है। यह दुश्मन के क्षेत्र को ऑटोमेटिक लक्षित कर ध्वस्त सकता है। इसका उपयोग सिर्फ एक बार ही किया जा सकता है।

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