ताशकंद में मोदी:यात्रा का व्यापक क्षेत्रीय महत्व, यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था पर सहमति भी अहम – Pm Modi In Tashkent Uzbekistan Visit Significant Regional Event Long-term Uranium Supply Deal Also Crucial

ताशकंद में मोदी:यात्रा का व्यापक क्षेत्रीय महत्व, यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था पर सहमति भी अहम – Pm Modi In Tashkent Uzbekistan Visit Significant Regional Event Long-term Uranium Supply Deal Also Crucial

प्रधानमंत्री मोदी ऐसे समय में मध्य एशिया की अपनी चार दिवसीय यात्रा पर हैं, जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है और मध्य एशिया आर्थिक, सामरिक और ऊर्जा संबंधी हितों का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव से उनकी मुलाकात के साथ शुरू हुई यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अब इस क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को महज ऐतिहासिक व सांस्कृतिक निकटता तक सीमित रखने के बजाय व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और संपर्क के व्यापक रणनीतिक ढांचे में बदलना चाहता है।


ऐसे में, इस यात्रा को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ जैसी पहलों के समानांतर ‘एक्ट सेंट्रल एशिया’ नजरिये को मजबूत करने के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए। मध्य एशिया के संसाधनों तक विश्वसनीय और दीर्घकालिक पहुंच भारत की आर्थिक सुरक्षा का अहम हिस्सा बन सकती है। दूसरी तरफ, मध्य एशियाई देश भी चीन व रूस पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। हालांकि इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती संपर्क की है, क्योंकि मध्य एशिया तक भारत की सीधी स्थलीय पहुंच नहीं है और पाकिस्तान के साथ ऐसे संबंध नहीं हैं कि उसके रास्ते व्यापारिक संपर्क पर निर्भर रहा जा सके।

ऐसे में जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे विकल्पों को प्रभावी बनाया जाए। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह चौथी उज्बेकिस्तान यात्रा है और सत्ता में आने के एक वर्ष बाद वह मध्य एशिया में सबसे पहले उज्बेकिस्तान ही गए थे। रविवार को हुई इस वार्ता के बाद दोनों देशों द्वारा अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने और यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक व्यवस्था बनाए जाने पर सहमति जताना महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि यूरेनियम आपूर्ति पर पिछले करीब दो महीने के भीतर यह दूसरी बड़ी उपलब्धि है।

इससे पहले जुलाई में अपनी ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी ने एक अहम समझौता किया था। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का दूसरा अहम पक्ष उज्बेकिस्तान के बाद किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी है, जो इस पूरे दौरे को व्यापक क्षेत्रीय महत्व देती है। ताशकंद यात्रा की अहमियत सिर्फ उज्बेकिस्तान के साथ संबंधों तक सीमित नहीं है। यह भारत की उस व्यापक विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच नए साझेदारों, नए बाजारों और नए रणनीतिक विकल्पों की तलाश की जा रही है। इस दौरान होने वाली घोषणाएं अगर सही ढंग से जमीन पर उतरती हैं, तो ताशकंद से शुरू हुई पहल मध्य एशिया में भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक उपस्थिति की मजबूत नींव बन सकती है।

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