रानी सराय के सैंकड़ों हरे-भरे पेड़ों पर फिलहाल कुल्हाडी नहीं चलेगी। कोर्ट ने इन पेडों की कटाई पर पूर्व में लगाई रोक यथावत रखते हुए पेडों पर रह रहे हजा…और पढ़ें

HighLights
- रानी सराय के सैंकड़ों हरे-भरे पेड़ों पर फिलहाल कुल्हाडी नहीं चलेगी
- मेट्रो कॉर्पोरेशन ने पेश की विशेषज्ञ की रिपोर्ट, अब सुनवाई 11 सितंबर को
- एनजीटी से मिली अनुमति की कॉपी पेश करने के लिए लिया समय
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : रानी सराय के सैंकड़ों हरे-भरे पेड़ों पर फिलहाल कुल्हाडी नहीं चलेगी। कोर्ट ने इन पेडों की कटाई पर पूर्व में लगाई रोक यथावत रखते हुए पेडों पर रह रहे हजारों परिंदों को राहत दे दी है। हालांकि मंगलवार को हुई सुनवाई में मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने विशेषज्ञ की रिपोर्ट पेश की है।
कॉर्पोरेशन का कहना है कि वह रानी सराय के पेड़ों का काटेगा नहीं बल्कि इन्हें ट्रांसप्लांट किया जाएगा। साथ ही इन ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों का पांच साल तक रखरखाव भी करेंगे। मंगलवार को कार्पोरेशन को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की अनुमति पेश करना थी, लेकिन उसने इसके लिए समय ले लिया। मामले में कोर्ट 11 सितंबर को अंतिम बहस सुनेगी।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका प्रियांशु जैन ने एडवोकेट लवेश सारस्वत के माध्यम से प्रस्तुत की है। याचिका में कहा है कि रानी सराय में हजारों परिंदे पेड़ों पर घरोंदा बनाकर रह रहे हैं। अगर पेड़ों को काटा गया तो हजारों परिंदों पर संकट आ जाएगा।
इसी मामले में एक अन्य याचिका डा. अमन शर्मा ने एडवोकेट अभिनव धनोतकर के माध्यम से प्रस्तुत की है। इस जनहित याचिका में मप्र वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने वर्ष 2024 में याचिकाओं की सुनवाई करते हुए एमओजी लाइन्स और मल्हाराश्रम क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी।
बार-बार कथन बदल रहा है कॉर्पोरेशन
याचिका की सुनवाई के दौरान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन बार-बार कथन बदल रहा है। कॉर्पोरेशन ने पहले कहा था कि रानी सराय में लगे पेड़ों को नहीं काटा जा रहा है, क्योंकि यहां मेट्रो का अंडर ग्राउंड स्टेशन प्रस्तावित है। इसके लिए पेड़ काटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
जब कोर्ट ने यह बात लिखित में मांगी तो कॉर्पोरेशन ने कहा कि उसे एनजीटी से पेड़ काटने की अनुमति मिल गई है। फिर जब कोर्ट ने एनजीटी की अनुमति पेश करने के लिए कहा तो अब कॉर्पोरेशन कह रहा है कि पेड़ काटे नहीं जाएंगे, बल्कि ट्रांसप्लांट किए जाएंगे। इन पेड़ों का पांच साल तक रखरखाव भी किया जाएगा।
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