इंदौर में कक्षा नौवीं की छात्रा सानिका एस. शर्मा ने पर्यावरण पर कविता संग्रह की एक किताब प्रकाशित की है, जिसका विमोचन मंगलवार को हुआ। व्हिस्पर ऑफ वंडर नाम की इस किताब को बुकलिफ प्रकाशन ने छापा है। इतनी कम उम्र में किताब लिखने को लेकर सानिका ने कहा कि इस किताब को प्रकाशित करने की प्रेरणा उन्हें ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से मिली। इस अभियान ने पर्यावरण को संवेदनाओं से जोड़ा है। उनकी इस पुस्तक को एमिली डिकिंसन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
सानिका ने अपनी किताब में प्रकृति, भावनाओं और प्रकृति की छोटी-छोटी खूबसूरत जीतों को शब्दों में अभिव्यक्त किया है। बीज से लेकर जड़, तने, शाखा, पत्ते, फूल और फलों तक की जीवन यात्रा उन्होंने कविताओं में कही है। सानिका ने प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण से जुड़ाव का संदेश दिया है।
कम उम्र में अपनी कविताओं को पुस्तक का रूप देने वाली सानिका का कहना है कि व्यस्त जीवन में लोग अक्सर अपने आसपास मौजूद छोटी-छोटी खूबसूरत चीजों को देखना भूल जाते हैं। मैंने कोशिश की है कि मेरी कविताएं पाठकों को कुछ पल रुककर प्रकृति और अपने आसपास की दुनिया को महसूस करा सकें।
सानिका को साहित्यिक विरासत अपने परिवार से भी मिली है। उनके परनाना नटवरलाल स्नेही कवि रहे हैं और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने ‘गांधी मानस’ किताब लिखी थी। सानिका के पिता सिद्धार्थ शर्मा इंजीनियर हैं, जबकि मां पूनम शर्मा उद्यमी हैं।
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