बालाघाट अस्पताल में बच्चों के वार्डों में सुरक्षा बढ़ाई गई:  सीएस बोले- बीमारी के 5 फैक्टर पानी, कुपोषण, वैक्सीनेशन, इम्युनिटी और वातावरण जिम्मेदार – Balaghat (Madhya Pradesh) News

बालाघाट अस्पताल में बच्चों के वार्डों में सुरक्षा बढ़ाई गई: सीएस बोले- बीमारी के 5 फैक्टर पानी, कुपोषण, वैक्सीनेशन, इम्युनिटी और वातावरण जिम्मेदार – Balaghat (Madhya Pradesh) News

बालाघाट अस्पताल में बच्चों के वार्डों में सुरक्षा बढ़ाई गई:  सीएस बोले- बीमारी के 5 फैक्टर पानी, कुपोषण, वैक्सीनेशन, इम्युनिटी और वातावरण जिम्मेदार – Balaghat (Madhya Pradesh) News


बालाघाट जिला अस्पताल में बच्चों के वार्डों की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। अस्पताल प्रबंधन ने यह फैसला आदिवासी इलाकों से लगातार बच्चों के भर्ती होने और उनकी मौतों पर उठ रहे सवालों के बाद लिया है। अब बीमार बच्चों और उनके परिजनों के ठहरने वाले वार्डों में आने-जाने के लिए सिर्फ दो गेट खुले रहेंगे। इन वार्डों में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। साथ ही सुरक्षा गार्डों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है और पुलिस सुरक्षा भी तैनात की जाएगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब प्रशासन पर मीडिया से मरीजों और परिजनों को दूर रखने के आरोप लग रहे हैं। यह बदलाव मंगलवार रात कलेक्टर कुमार सत्यम के अस्पताल दौरे के बाद आया है। वे पहली बार बीमारी से भर्ती बच्चों को देखने पहुंचे थे। इस दौरान एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने उनसे बच्चों की मौत के आंकड़ों पर सवाल किए, लेकिन कलेक्टर बिना जवाब दिए चले गए। इसके बाद इन्फ्लुएंसर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस घटना के वीडियो पोस्ट किए। इसी घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने आदिवासी अंचल से आने वाले बीमार बच्चों और उनके परिजनों के लिए सुरक्षा घेरा बनाने का फैसला किया है। सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने आदिवासी क्षेत्र में बच्चों की बीमारी के पांच मुख्य कारण बताए हैं। इनमें पानी, कुपोषण, वैक्सीनेशन, इम्युनिटी और वातावरण शामिल हैं। हालांकि, जिले का मीडिया शुरुआत से ही बीमारी के लिए पानी, कुपोषण और वैक्सीनेशन को जिम्मेदार ठहराता रहा है। 35 नए बेड मिले डॉ. जैन ने बताया कि उनके पत्र लिखने के बाद 35 नए बेड मिले हैं। प्रशासन की ओर से मिल रहे बेड मिलाकर अब कुल 150 बेड हो गए हैं। इससे बच्चों को एक ही बेड पर एक साथ रखने की स्थिति नहीं बनेगी। उन्होंने यह भी बताया कि तीन शिशुरोग विशेषज्ञ और अतिरिक्त नर्सिंग स्टाफ भी बालाघाट आ रहा है। उन्होंने बताया कि लगातार बच्चों के जिला अस्पताल आने और उनके स्वास्थ्य होकर लौटने का सिलसिला जारी है। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन पूरा प्रयास कर रहा है कि बच्चों की बेहतर देखभाल हो।

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