मौत के मुंह से दोस्त को बचाया:गहरे पानी में बोट पलटी, दूर तक मदद नहीं; ढाई घंटे बर्फीले पानी में तैरती रहीं

मौत के मुंह से दोस्त को बचाया:गहरे पानी में बोट पलटी, दूर तक मदद नहीं; ढाई घंटे बर्फीले पानी में तैरती रहीं



मौत के मुंह से दोस्त को बचाया:गहरे पानी में बोट पलटी, दूर तक मदद नहीं; ढाई घंटे बर्फीले पानी में तैरती रहीं


कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच पर जेट स्की का रोमांच दो दोस्तों डोना ड्युब्रे (47) और पॉल कार्बुलिडो (53) के लिए मुसीबत बन गया। अचानक समुद्र में गिरने व बोट बह जाने के बाद दोनों अंधेरे प्रशांत महासागर में बिछड़ गए। पर डोना ने हिम्मत नहीं हारी। कैसे बचाया उन्होंने पॉल को, बता रही हैं डोना… ‘गर्मी की उमस भरी शाम, मैं और पॉल थोड़ी राहत के लिए जेट स्की लेकर समुद्र में निकले। हमें अंदाजा भी नहीं था कि वेंडर की लापरवाही और सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव बन जाएगी। ब्रेकवाटर (समुद्र किनारा) पार करते ही विशाल लहर ने पॉल को जेट स्की से उछाल दिया। वे पीठ के बल पानी में गिरे और जेट स्की दूर बह गई। मैं मदद के लिए बढ़ी, पर मेरी जेट स्की भी बंद पड़ गई। पॉल घबरा गए थे। उन्हें बचाने के लिए मैंने तुरंत समुद्र में छलांग लगा दी। कुछ ही पलों में दोनों जेट स्की और मेरा फोन समंदर में गायब हो चुके थे। अंधेरा घिर चुका था और बर्फीली लहरें हमें हर पल मौत के करीब धकेल रही थीं। पॉल सदमे में थे। तभी दूर क्षितिज पर मुझे रोशनी दिखाई दी। आंखों में आंसू लिए मैंने उनसे कहा,‘मैं मदद लेकर लौटूंगी, तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊंगी।’ तैराकी मेरा जुनून रही थी। नशे की गिरफ्त से निकलने के बाद पानी ही मेरा सहारा बना था, पर उस रात समुद्र बेहद खौफनाक लग रहा था। मैं हर कुछ स्ट्रोक के बाद पॉल का नाम पुकारती, मगर जवाब में सिर्फ सन्नाटा मिलता। जब शरीर सुन्न पड़ने लगता, तो बेटी का चेहरा याद कर हौसला जुटाती। अब मेरे पास जीने की वजह भी थी और पॉल से किया वादा भी। करीब ढाई घंटे तक मौत से जूझते हुए मैं दूर दिख रही रोशनी, जो ऑयल रिग की थी, को निशाना बनाकर तैरती रही और आखिरकार चट्टानों तक पहुंच गई। पर संघर्ष अभी बाकी था। उफनती लहरों ने मुझे बार-बार नुकीले पत्थरों पर पटका। मेरा पैर चट्टानों में फंस गया और शरीर जगह-जगह से लहूलुहान हो गया। मैंने पास से गुजर रही एक नाव को आवाज दी। रात करीब 10.30 बजे लाइफगार्ड्स ने मुझे बाहर निकाला। अस्पताल में मेरा इलाज चल रहा था, पर मेरे आंसू थम नहीं रहे थे, ‘जुबान पर यही शब्द थे… दोस्त अभी समुद्र में है, उसे बचाइए। रात बीत गई, सुबह हो गई, पर कोई खबर नहीं मिली। तभी अगले दिन सुबह 11 बजे कोस्ट गार्ड का फोन आया- ‘हमने पॉल को ढूंढ लिया है, वह जिंदा है।’ पूरे 15 घंटे बाद जब मैंने यह सुना, तो लगा मेरी मेहनत रंग लाई। उस खौफनाक रात ने हमें जिंदगी की कीमत सिखा दी, लेकिन समंदर का वह मंजर शायद ताउम्र मेरा पीछा नहीं छोड़ेगा।’ – डोना



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