Indore Shastri Bridge: शास्त्री रेलवे ओवरब्रिज का काम दो साल चलेगा और इस दौरान यातायात डायवर्ट करना आसान नहीं होगा।

HighLights
- शास्त्री रेलवे ओवरब्रिज की स्टेशन तरफ वाली भुजा पुल के नीचे आएगी
- स्टेशन भवन के ऊपर से ब्रिज निकालना होगा, जो सभी प्लेटफार्म के ऊपर से निकलेगा
- सिंहस्थ से पहले काम शुरू करने पर यह समय पर पूरा नहीं हो पाएगा
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शास्त्री रेलवे ओवरब्रिज को नए सिरे से बनाने से पहले इस पर से निकलने वाले भारी यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करना होगा। इसे लेकर रेलवे अधिकारियों और शहर के जानकारों के साथ चर्चा की जाएगी। एमटीएच कंपाउंड से झाबुआ टावर तक दोपहिया वाहनों के लिए नया ब्रिज बनाने के सुझाव पर भी मंथन होगा।
रेलवे बोर्ड चेयरमैन सतीश कुमार ने रविवार को रेलवे स्टेशन पर चल रहे काम का जायजा लिया और शास्त्री ब्रिज का भी निरीक्षण किया। इसे तोड़कर नया बनाया जाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण शुरू करने से पहले ट्रैफिक डायवर्शन का ठोस प्लान तैयार किया जाए। यातायात व्यवस्था को लंबे समय तक रोकना उचित नहीं होगा।
अभी पिलर का काम शुरू कराया जाए
जरूरत होने पर चरणबद्ध तरीके से काम शुरू किया जाए, ताकि पिलर का निर्माण भी आगे बढ़े और यातायात भी चलता रहे। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ से पहले काम शुरू करने पर यह समय पर पूरा नहीं हो पाएगा। रेलवे स्टेशन भवन का काम भी चल रहा है। पुल का काम रोकना नहीं है, अभी पिलर का काम शुरू कराया जाए और सिंहस्थ के बाद शेष काम किया जाए।
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि शास्त्री पुल को कभी भी हटाएं, लेकिन उससे पहले वैकल्पिक रास्ता देना होगा। पुल का काम दो साल चलेगा और इस दौरान यातायात डायवर्ट करना आसान नहीं होगा। राजकुमार रेलवे ओवरब्रिज और पटेल रेलवे ओवरब्रिज पर पहले से यातायात का दबाव अधिक है। एमटीएच कंपाउंड-पालिका प्लाजा की तरफ से दोपहिया वाहनों के लिए नया पुल बनाकर झाबुआ टावर वाली गली में उतारने का सुझाव दिया गया।
हालांकि, इसमें भी तकनीकी दिक्कतें बताई गईं। शास्त्री रेलवे ओवरब्रिज की स्टेशन तरफ वाली भुजा पुल के नीचे आएगी। स्टेशन भवन के ऊपर से ब्रिज निकालना होगा, जो सभी प्लेटफार्म के ऊपर से गुजरेगा। वहीं झाबुआ टावर वाली गली की चौड़ाई भी कम है।
सभी तकनीकी पहलुओं पर विचार के लिए शहर के जानकारों के साथ संवाद करने का निर्णय लिया गया। सांसद ने कहा कि वे खुद इसके लिए लोगों को बुलाएंगे और अधिकारी उनके सुझाव सुनेंगे। कोई भी फैसला लेने से पहले सभी को विश्वास में लेना होगा।
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