Rajpal Supreme Court Cheque Bounce Case

Rajpal Supreme Court Cheque Bounce Case


36 मिनट पहले

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Rajpal Supreme Court Cheque Bounce Case

राजपाल यादव का चेक बाउंस मामला साल 2010 में उनकी बतौर डायरेक्टर डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए लिए गए एक कथित कर्ज से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक्टर राजपाल यादव को निर्देश दिया कि चेक बाउंस मामले में सरेंडर से छूट पाने की शर्त के तौर पर वे बुधवार तक कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपए जमा करें। यह मामला फिल्म प्रोड्यूसर-फाइनेंसर मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है।

कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई के फैसले को चुनौती देने वाली यादव की याचिका पर सशर्त नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत सात मामलों में उनकी दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा बरकरार रखी थी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

12 दिनों तक तिहाड़ जेल में रहने के बाद 17 फरवरी को रिहा हुए राजपाल।

12 दिनों तक तिहाड़ जेल में रहने के बाद 17 फरवरी को रिहा हुए राजपाल।

चीफ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यादव की याचिका पर मौखिक रूप से सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें सजा काटने के लिए सरेंडर करने का निर्देश दिया था, जिसकी अंतिम तारीख 10 सितंबर थी।

यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ दायर सात शिकायतों से जुड़ा है। ये शिकायतें फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए जारी सात चेक बाउंस होने के बाद दर्ज की गई थीं।

मामले के रिकॉर्ड के मुताबिक, मुरली प्रोजेक्ट्स ने 2010 में फिल्म पूरी करने के लिए 5 करोड़ रुपए दिए थे। फिल्म की रिलीज में देरी के बाद पक्षों के बीच कई समझौते हुए और अलग-अलग चरणों में रकम की वापसी की राशि में बदलाव किया गया।

यादव की याचिका में कहा गया है कि मूल लेन-देन फिल्म में निवेश था, कर्ज नहीं, और चेक सिक्योरिटी के तौर पर दिए गए थे। अगस्त 2012 के तीसरे सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट के तहत आठ पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे और भुगतान की जिम्मेदारी फिल्म की रिलीज से जोड़ी गई थी।

2012 में मुरली प्रोजेक्ट्स ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था

विवाद बढ़ने के बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने 2012 में फिल्म को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फिल्म के अधिकारों में तीसरे पक्ष का हित बनाने से रोक दिया था। इसके बाद सात चेक बाउंस होने पर एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत सात शिकायतें दर्ज की गईं।

यादव की ओर से बाद में हुए 21 अप्रैल 2013 के सहमति समझौते पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत दोनों पक्षों ने 10.40 करोड़ रुपए के पूर्ण और अंतिम समझौते पर सहमति जताई थी, जिसमें 40 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए पहले ही दिए जा चुके थे। समझौते की सुरक्षा के लिए चार नए पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे।

यादव की याचिका के मुताबिक, इस समझौते के तहत पहले जारी किए गए आठ सिक्योरिटी चेक वापस किए जाने थे, लेकिन मुरली प्रोजेक्ट्स ने बाउंस हुए चेक के मामलों को आगे बढ़ाया।

सुप्रीम कोर्ट में यादव ने कहा कि बाद के समझौते के बाद मूल शिकायतें जारी नहीं रह सकतीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘जिम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम मनोज गोयल’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि समझौता होने के बाद पुराने चेक के बाउंस से जुड़ी शिकायत खत्म हो जाती है और नए समझौते के तहत जारी चेक बाउंस होने पर ही नया मामला बन सकता है।

2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल को दोषी ठहराया था

ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में सातों मामलों में यादव और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। शुरुआत में यादव को हर मामले में छह महीने की जेल और 1.60 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

बाद में सजा कम की गई। 22 मई 2019 को उन्हें सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया।

सेशंस कोर्ट ने 2024 में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए तीन महीने की सजा और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए का जुर्माना कायम रखा। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 के फैसले में सजा में दखल देने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट ने प्रोबेशन की मांग खारिज की थी

हाईकोर्ट ने यादव की प्रोबेशन की मांग भी खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक चली कार्यवाही के दौरान उनके आचरण और विवाद सुलझाने के लिए दिए गए कई मौकों को देखते हुए उन्हें प्रोबेशन का लाभ नहीं दिया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा था कि यादव ने शिकायतकर्ता को भुगतान करने के लिए कई बार आश्वासन दिए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। कार्यवाही के दौरान करीब 2.25 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था, लेकिन बाद में यादव ने और भुगतान करने से इनकार कर दिया।

हालांकि, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पहले जमा कर मुरली प्रोजेक्ट्स को दी गई 2.25 करोड़ रुपए की राशि को जुर्माने के तौर पर देय रकम में समायोजित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश से राजपाल यादव को फिलहाल सरेंडर से अंतरिम राहत मिली है। यह राहत 9 सितंबर तक रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त पर है।

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