इंदौर में 60 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी और महज 5.90 करोड़ रुपये बचे

इंदौर में 60 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी और महज 5.90 करोड़ रुपये बचे

साइबर ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के लिए क्राइम ब्रांच ने 10 हजार से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज या लीन कराया है।

Publish Date: Thu, 10 Sep 2026 09:40:32 AM (IST)Updated Date: Thu, 10 Sep 2026 09:43:28 AM (IST)

इंदौर में 60 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी और महज 5.90 करोड़ रुपये बचे

HighLights

  1. जनवरी से अगस्त तक करीब 7000 शिकायतें मिलीं
  2. 200 मामलों में 1.20 करोड़ रुपये लौटाने के लिए कोर्ट आर्डर बैंकों को भेजे
  3. साइबर ठगी के 400 से ज्यादा मामलों में रकम वापस हुई

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। साइबर ठगों ने इस साल इंदौर में लोगों को 60 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाने की कोशिश की, लेकिन क्राइम ब्रांच की त्वरित कार्रवाई से हजारों पीड़ितों को राहत मिली है। जनवरी से अगस्त 2026 तक क्राइम ब्रांच को साइबर फ्रॉड से जुड़ी करीब 7000 शिकायतें मिलीं।

इनमें से 400 से ज्यादा मामलों में पुलिस ने पांच करोड़ 90 लाख 4685 रुपये की राशि सुरक्षित कर आवेदकों के खातों में वापस पहुंचाई है।

एडिशनल डीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया के अनुसार, इसके अलावा 200 से ज्यादा मामलों में करीब 1.20 करोड़ रुपये की राशि वापस कराने के लिए न्यायालय से कोर्ट आर्डर प्राप्त कर संबंधित बैंकों को ई-मेल किए जा चुके हैं। यह रकम जल्द ही पीड़ितों के खातों में पहुंचेगी।

जुलाई में सबसे ज्यादा रकम वापस

क्राइम ब्रांच के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में 36.46 लाख, फरवरी में 91.95 लाख, मार्च में 59.05 लाख, अप्रैल में 49.29 लाख, मई में 47.31 लाख और जून में 40.88 लाख रुपये वापस कराए गए। जुलाई में सबसे ज्यादा 1.50 करोड़ रुपये और अगस्त में 1.14 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस मिले। आठ महीनों में कुल राशि 5.90 करोड़ रुपये रही।

10 हजार से ज्यादा खाते फ्रीज

साइबर ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के लिए क्राइम ब्रांच ने 10 हजार से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज या लीन कराया है। इसके अलावा ठगी में इस्तेमाल हो रहे 80 से ज्यादा मोबाइल नंबर और 15 से ज्यादा मोबाइल के आइएमईआइ नंबर ब्लाक कराए गए हैं।

पुलिस ने हैक किए गए 250 से ज्यादा फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट रिकवर कराए हैं, जबकि लोगों के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर बनाए गए 350 से ज्यादा फर्जी इंटरनेट मीडिया अकाउंट भी ब्लाक करवाए गए हैं।

एक क्लिक से बैंक खाता खाली

क्राइम ब्रांच के सामने आने वाले मामलों में ठगी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। इंटरनेट मीडिया पर विज्ञापन देकर मैलिशियस एपीके या फर्जी एप डाउनलोड करवाए जाते हैं। एक्सेसिबिलिटी परमिशन मिलने के बाद ठग मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर बैंक खाते तक पहुंच बना लेते हैं। इसी तरह इन्वेस्टमेंट और टास्क फ्राड में ऑनलाइन ट्रेडिंग, गेमिंग, वर्क फ्राम होम या यूट्यूब वीडियो लाइक-सब्सक्राइब करने के नाम पर पहले छोटा भुगतान कर भरोसा जीता जाता है और बाद में बड़ी रकम जमा कराई जाती है।

डिजिटल अरेस्ट से लेकर एआइ आवाज तक

  • डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग पुलिस, कस्टम या सीबीआइ अधिकारी बनकर वीडियो काल करते हैं और पार्सल में ड्रग्स अथवा प्रतिबंधित सामान मिलने का डर दिखाकर रकम ऐंठते हैं।
  • एआई डीपफेक और वाइस क्लोनिंग के जरिये परिचित की आवाज या चेहरा बनाकर दुर्घटना अथवा अस्पताल में भर्ती होने की कहानी सुनाकर पैसे मांगे जा रहे हैं।
  • फर्जी लोन एप, केवाईसी अपडेट, पैन लिंक, क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने, रिवार्ड पाइंट और बिजली बिल अपडेट के नाम पर रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड करवाकर भी ठगी की जा रही है।
  • ठगी होते ही 1930 पर करें कालक्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि आनलाइन ठगी होने पर बिना देर किए 1930 पर शिकायत करें।
  • इंदौर पुलिस की साइबर हेल्पलाइन 704912-4445 और एनसीआरपी पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

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