सऊदी की लंका लगाने आ रहे हूती! बंदरगाह शहर मोचा पर किया कब्जा, धरा रह गया ‘इस्लामिक नाटो’, International Hindi News

सऊदी की लंका लगाने आ रहे हूती! बंदरगाह शहर मोचा पर किया कब्जा, धरा रह गया ‘इस्लामिक नाटो’, International Hindi News

लाइव हिन्दुस्तान, सना
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सऊदी पर हूती हमलों और मोचा बंदरगाह पर कब्जे से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। मक्का रक्षा समझौते के बावजूद पाकिस्तान ने कहा कि अभी सैन्य प्रतिक्रिया पर कोई चर्चा नहीं हुई। जानिए ‘इस्लामिक NATO’ की ताकत और पूरा जियोपॉलिटिकल खेल।

हूती बने सऊदी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द: मोचा पर कब्जे के बाद ‘इस्लामिक NATO’ के सामने बड़ी चुनौती

हूती बने सऊदी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द: मोचा पर कब्जे के बाद ‘इस्लामिक NATO’ के सामने बड़ी चुनौती

मध्य पूर्व में पहले से चल रही अमेरिका-ईरान जंग का दायरा अब तेजी से फैलता दिख रहा है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के किनारे मौजूद रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही हूतियों की नजर अब बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पर और मजबूत होती दिख रही है। यही वह समुद्री रास्ता है जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और एशिया-यूरोप के बीच समुद्री व्यापार की बेहद अहम कड़ी है।

उधर हूतियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया है। सऊदी अरब ने जवाबी कार्रवाई में यमन में हवाई हमले तेज किए हैं। ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर हूती हमले सऊदी अरब पर और बढ़ते हैं तो क्या पाकिस्तान युद्ध में उतरेगा? यही सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि महज एक महीने पहले सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने ऐसा रक्षा समझौता किया है जिसे कई विश्लेषक ‘इस्लामिक NATO’ कह रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान ने अब संकेत दिया है कि अभी वह सीधे सैन्य मोर्चे पर उतरने के लिए तैयार नहीं है।

मोचा पर कब्जा क्यों इतना बड़ा मामला है?

पहले मोचा को समझिए। मोचा यमन के लाल सागर तट पर स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह शहर है। कभी यह दुनिया में कॉफी के व्यापार के लिए मशहूर था। लेकिन आज इसकी अहमियत कॉफी से कहीं ज्यादा रणनीतिक है। कारण है इसकी भौगोलिक स्थिति।

मोचा बाब-अल-मंदेब के बेहद करीब है। यह समुद्री रास्ता अपने सबसे संकरे हिस्से में करीब 29 किलोमीटर चौड़ा है और इसके रास्ते से एशिया और यूरोप के बीच बड़ी मात्रा में समुद्री माल गुजरता है। दक्षिण से लाल सागर में प्रवेश करने वाले जहाजों के लिए यह स्वेज नहर तक पहुंचने का अहम रास्ता है।

यानी आसान भाषा में समझें तो हॉर्मुज पर ईरान दबाव बना रहा है और बाब-अल-मंदेब पर हूती। अगर दोनों समुद्री रास्ते लंबे समय तक बाधित होते हैं तो दुनिया के ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर बहुत बड़ा असर पड़ सकता है। रॉयटर्स के मुताबिक, जून में बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले पेट्रोलियम की मात्रा दुनिया के कुल तेल उत्पादन की करीब 7 फीसदी थी।

हूती मोचा के बाद क्या चाहते हैं?

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