भोजन में इस्तेमाल होने वाली हल्दी में जहरीली भारी धातु सीसे (लेड) की मिलावट का गंभीर मामला सामने आया है। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, प. बंगाल और छत्तीसगढ़ में लिए गए हल्दी के 30 फीसदी नमूनों में लेड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। बिहार में स्थिति चिंताजनक रही, जहां एक नमूने में लेड की मात्रा तय मानक से 642 गुना अधिक मिली।
अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने 2021 से 2023 के बीच 34 शहरों से हल्दी के 503 नमूने एकत्र किए। इसके अलावा हल्दी की सप्लाई चेन से जुड़े 128 लोगों से बातचीत की गई। अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल एनपीजे साइंस ऑफ फूड में प्रकाशित हुए हैं। भारत में हल्दी में लेड की निर्धारित सीमा 10 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम है। बिहार के नमूनों में लेड का औसत स्तर 48 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम मिला, जो तय सीमा से करीब पांच गुना अधिक है। वहीं एक नमूने में यह मात्रा 6,416 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम पहुंच गई। यह करीब 642 गुना ज्यादा है। शोधकर्ताओं के अनुसार हल्दी में लेड का इस्तेमाल उसे अधिक चमकीला पीला रंग देने और उत्पाद की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए किया जाता है।
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बच्चों की सेहत के लिए खतरा
बच्चों की सेहत के लिए सीसा बेेहद नुकसानदायक है। यह मस्तिष्क के विकास और संज्ञानात्मक क्षमता को प्रभावित कर सकता है तथा सीखने-समझने की क्षमता पर असर डाल सकता है। अध्ययन की आबादी-स्तरीय मॉडलिंग के अनुसार हल्दी में लेड क्रोमेट की मिलावट पूरी तरह रोकने पर बच्चों के आईक्यू में 2.3 अंक तक सुधार हो सकता है।