बेंगलुरु पुलिस ने मजदूरी कर रहे 503 बच्चे छुड़ाए:5000 से ज्यादा जगहों पर छापा, 18 FIR; दावा- भारत में बाल मजदूरी के 18 लाख मामले

बेंगलुरु पुलिस ने मजदूरी कर रहे 503 बच्चे छुड़ाए:5000 से ज्यादा जगहों पर छापा, 18 FIR; दावा- भारत में बाल मजदूरी के 18 लाख मामले

बेंगलुरु पुलिस ने मजदूरी कर रहे 503 बच्चे छुड़ाए:5000 से ज्यादा जगहों पर छापा, 18 FIR; दावा- भारत में बाल मजदूरी के 18 लाख मामले


बेंगलुरु में शनिवार को बाल मजदूरी रोकने के लिए चलाए गए विशेष अभियान में 503 बच्चों को छुड़ाया गया। शहर के 12 पुलिस डिविजन की टीमों ने 5,897 जगहों की जांच की। इस दौरान बच्चों से काम कराने वाले दुकानदारों के खिलाफ 18 मामले दर्ज किए गए। यह अभियान शहर के पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह के निर्देश पर चलाया गया। इसका उद्देश्य बाल मजदूरी रोकना और काम कर रहे बच्चों को पहचानकर छुड़ाना था। UNICEF का दावा है भारत में अभी भी बाल मजदूरी के 18 लाख से ज्यादा मामले हैं। इन जगहों पर हुई जांच पुलिस के अनुसार, शहर के सभी थाना क्षेत्रों में जांच के लिए टीमें बनाई गई थीं। इन टीमों में पुलिस अधिकारियों के साथ श्रम निरीक्षक भी शामिल थे। टीमों ने गोदामों, बाजारों, होटलों, लॉज, बेकरी, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन, अपार्टमेंट और निर्माण स्थलों की जांच की। पुलिस ने बताया कि अभियान के बाद बच्चों को काम पर रखने वाले दुकानदारों के खिलाफ 18 मामले दर्ज किए गए। रेस्क्यू के बाद बच्चों का क्या होता है? सुरक्षित ठिकाना: बच्चों को तुरंत शेल्टर होम में रखा जाता है। मुफ्त पढ़ाई: उम्र के हिसाब से सरकारी स्कूल में सीधा दाखिला कराया जाता है। हुनर की सीख (14+ उम्र): बड़े बच्चों को काम सिखाया जाता है ताकि आगे कमाई कर सकें। आर्थिक मदद: दोषी मालिक से वसूला गया जुर्माना बच्चे के खाते में जमा होता है और परिवार को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… भारत में 30% महिलाओं ने पार्टनर से हिंसा झेली:15-49 एज ग्रुप की हर पांचवीं महिला पीड़ित; दुनिया में 84 करोड़ महिलाओं के साथ सेक्शुअल एब्यूज वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 30% महिलाएं इंटीमेट पार्टनर वॉयलेंस का शिकार हुई हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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