गणेश जी को मंगलमूर्ति क्यों कहते हैं? आपके शरीर में ही छिपा है इसका उत्तर – Ganesh Chaturthi Ganesh Ji Murti Life Lessons Mangalmoorti Vighnaharta

गणेश जी को मंगलमूर्ति क्यों कहते हैं? आपके शरीर में ही छिपा है इसका उत्तर – Ganesh Chaturthi Ganesh Ji Murti Life Lessons Mangalmoorti Vighnaharta

आज घर-घर में गणेश जी की स्थापना हो रही है। हम श्रद्धा से उन्हें गणपति, विनायक, अष्टविनायक, विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति जैसे अनेक नामों से पुकारते हैं। लेकिन क्या हमने कभी विचार किया है कि गणेश जी को “मंगलमूर्ति” क्यों कहा जाता है?

कलियुग पुराण में कृष्णा गुरुजी बताते हैं कि गणेश जी केवल मंदिर या मूर्ति में ही विराजमान नहीं हैं। उनका स्वरूप और संदेश हमारे शरीर, हमारी बुद्धि तथा हमारी इंद्रियों में भी उपस्थित है। यदि हम अपनी आँखों, कानों, नाक, मुख और बुद्धि का सही उपयोग करना सीख लें, तो हम भी अपने और दूसरों के जीवन में मंगल लाकर मंगलमूर्ति बन सकते हैं।

गण का अर्थ क्या है?

“गण” का अर्थ है- समूह और “ईश” का अर्थ है- स्वामी।

इस प्रकार गणेश का अर्थ हुआ- समूह के स्वामी अथवा सभी को साथ लेकर चलने वाले देवता। गणेश जी हमें अपने शरीर, मन, बुद्धि और समस्त इंद्रियों के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देते हैं। भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों में पहचानी जाने वाली गणेश जी की मूर्ति अपने प्रत्येक अंग के माध्यम से मानव जीवन को एक महत्त्वपूर्ण संदेश देती है।

गणेश चतुर्थी 2026: गणपति की कृपा पाने के लिए राशि अनुसार करें ये उपाय, जानें किसके लिए क्या चढ़ाना शुभ

गणेश चतुर्थी 2026: कैसे बने गणपति प्रथम पूज्य, जानें गणेश चतुर्थी का महत्व और पूजन का शुभ मुहूर्त




Ganesh Chaturthi Ganesh Ji Murti Life Lessons Mangalmoorti Vighnaharta

गणेश जी की मूर्ति हमें क्या सिखाती है?
– फोटो : freepik


गणेश जी की मूर्ति हमें क्या सिखाती है?

1. छोटा मुख: कम और सोच-समझकर बोलिए

गणेश जी का छोटा मुख संदेश देता है कि मनुष्य को आवश्यकता से अधिक नहीं बोलना चाहिए। बोलने से पहले यह विचार करना चाहिए कि उसके शब्द किसी को जोड़ेंगे या तोड़ेंगे। कम बोलना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मसंयम और समझदारी का प्रतीक है।

2. बड़े कान: अधिक सुनिए, कम बोलिए

गणेश जी के बड़े कान हमें दूसरों की बात ध्यानपूर्वक सुनने की प्रेरणा देते हैं। बहुत-सी समस्याएं केवल इसलिए उत्पन्न होती हैं क्योंकि हम सामने वाले की बात समझने से पहले ही उत्तर देना शुरू कर देते हैं। जो व्यक्ति धैर्यपूर्वक सुनना सीख लेता है, वह परिवार और समाज की अनेक समस्याओं का समाधान कर सकता है।

3. बड़ा मस्तक: भावनाओं के साथ बुद्धि का भी उपयोग कीजिए

गणेश जी का विशाल मस्तक विवेक, ज्ञान और दूरदर्शिता का प्रतीक है। जीवन के निर्णय केवल भावनाओं में बहकर नहीं लेने चाहिए। भावना के साथ बुद्धि और विवेक का संतुलन आवश्यक है। सही समय पर सही निर्णय लेने वाला व्यक्ति अपने जीवन के अनेक विघ्न स्वयं दूर कर सकता है।

4. बड़ा पेट: बातों को संभालकर रखना सीखिए

गणेश जी का बड़ा पेट हमें सिखाता है कि प्रत्येक बात हर व्यक्ति को बताना आवश्यक नहीं है। किसकी बात, कब और किससे कहनी है, इसका विवेक होना चाहिए। किसी की गोपनीय बात को सुरक्षित रखना भी विश्वास, संबंध और अच्छे चरित्र की पहचान है। 


Ganesh Chaturthi Ganesh Ji Murti Life Lessons Mangalmoorti Vighnaharta

मनुष्य स्वयं मंगलमूर्ति कैसे बन सकता है?
– फोटो : freepik


मनुष्य स्वयं मंगलमूर्ति कैसे बन सकता है?

जो व्यक्ति:

  • कम और मधुर बोलता है,
  • दूसरों की बात ध्यान से सुनता है,
  • अपनी आंखों से अच्छाई देखता है,
  • बुद्धि और विवेक से निर्णय लेता है,
  • किसी की गोपनीय बात को सुरक्षित रखता है,
  • तथा अपने कारण किसी के जीवन में दुःख नहीं, सुख उत्पन्न करता है,

वह स्वयं भी मंगलमूर्ति बन सकता है।

मंगलमूर्ति होने का अर्थ केवल शुभ दिखाई देना नहीं, बल्कि अपने विचारों, वाणी और कर्मों से दूसरों के जीवन में मंगल लाना है।

गणेश जी को विघ्नहर्ता क्यों कहते हैं?

हम प्रार्थना करते हैं कि गणेश जी हमारे जीवन के सभी विघ्न दूर करें। लेकिन कलियुग पुराण का मानवीय संदेश हमें एक प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करता है, क्या हम किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन के विघ्नहर्ता बन सकते हैं?

यदि हमारी बुद्धि, सामर्थ्य, शिक्षा, संपर्क या सेवा से किसी व्यक्ति की परेशानी दूर हो सकती है, तो हमें उसकी सहायता अवश्य करनी चाहिए। हर इंसान के भीतर किसी न किसी का विघ्नहर्ता बनने की क्षमता मौजूद है। आवश्यकता केवल परमार्थ की भावना की है। हमारा विचार यह नहीं होना चाहिए-

“यह व्यक्ति मेरे क्या काम आएगा?” बल्कि हमें सोचना चाहिए

“मैं इस व्यक्ति के क्या काम आ सकता हूँ?” यही गणेश जी की वास्तविक पूजा है।


Ganesh Chaturthi Ganesh Ji Murti Life Lessons Mangalmoorti Vighnaharta

गणेश आरती का मानवीय संदेश
– फोटो : freepik


गणेश आरती का मानवीय संदेश

कृष्णा गुरुजी कई वर्षों से गणेश जी की आरती के भावों का मानवीयकरण करते हुए उन्हें सेवा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। गणेश आरती की प्रसिद्ध पंक्ति है-

“अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।”

कृष्णा गुरुजी इसका मानवीय और वर्तमान समय के अनुरूप संदेश इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं-

“अंधन को आंख देत”

इसका संदेश है कि हम नेत्रदान का संकल्प लें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। हमारे जाने के बाद हमारी आँखें किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में प्रकाश ला सकती हैं। किसी व्यक्ति को देखने की शक्ति देकर हम उसके जीवन में गणेश और विघ्नहर्ता बन सकते हैं।

“कोढ़िन को काया”

इस भावना के साथ कृष्णा गुरुजी कुष्ठाश्रमों में गणेश जी की स्थापना करके वहां सेवा का कार्य करते रहे हैं। कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्तियों को केवल वस्तुओं की नहीं, बल्कि सम्मान, अपनत्व और सामाजिक स्वीकार्यता की भी आवश्यकता होती है। उनसे भेदभाव दूर करना भी गणेश सेवा है।

“बांझन को पुत्र देत”

पुरानी आरती में “बांझन को पुत्र देत” कहा गया है, लेकिन कृष्णा गुरुजी का सुझाव है कि वर्तमान समय में इसे-

“बांझन को गर्भ देत”

गाया जाना चाहिए। प्रार्थना संतान की होनी चाहिए, उसके लिंग की नहीं। इसी भावना के अंतर्गत IVF एवं सहायक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से निःसंतान दंपतियों के जीवन में संतान-सुख लाने वाले चिकित्सकों का सम्मान किया जाता है।

“निर्धन को माया”

निर्धनता का स्थायी समाधान केवल धन बांटना नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। कृष्णा गुरुजी मजदूरों और कर्मचारियों को यह संदेश देते हैं कि वे अपने बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, क्योंकि शिक्षा ही निर्धनता के चक्र को तोड़ सकती है।

भिक्षा नहीं, आत्मनिर्भरता का संदेश 

कृष्णा गुरुजी भिक्षुकों के बीच जाकर उनसे कहते हैं-

“आप इस धरती पर केवल मांगने के लिए नहीं, कुछ देने के लिए भी आए हैं।” हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई योग्यता अवश्य होती है। आवश्यकता उस योग्यता को पहचानकर आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने की है।


Ganesh Chaturthi Ganesh Ji Murti Life Lessons Mangalmoorti Vighnaharta

आरती गाने के साथ सेवा भी कीजिए
– फोटो : AI


आरती गाने के साथ सेवा भी कीजिए

गणेश जी की मूर्ति और उनकी आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव सेवा का जीवंत संदेश हैं। केवल यह प्रार्थना करना पर्याप्त नहीं कि गणेश जी हमारे विघ्न दूर करें। हमें भी अपने आसपास देखना चाहिए कि किस व्यक्ति के जीवन की कोई परेशानी हम दूर कर सकते हैं।

  • किसी की आंखों का प्रकाश बनिए।
  • किसी रोगी का सहारा बनिए।
  • किसी निःसंतान दंपति की आशा का सम्मान कीजिए।
  • किसी निर्धन बच्चे की शिक्षा में सहयोग कीजिए।
  • किसी निराश व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दीजिए।
  • आरती गाने के साथ किसी के जीवन के विघ्न भी दूर कीजिए।

विघ्नहर्ता अवॉर्ड- समाज के वास्तविक गणेशों का सम्मान

इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए कृष्णा गुरुजी समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को “विघ्नहर्ता अवॉर्ड” से सम्मानित करते हैं। यह सम्मान उन लोगों को समर्पित है जो अपनी बुद्धि, क्षमता, सेवा और करुणा के माध्यम से दूसरों के जीवन की बाधाएँ दूर कर रहे हैं। वास्तविक विघ्नहर्ता वही है, जो किसी असहाय व्यक्ति की समस्या को देखकर उससे मुँह न मोड़े, बल्कि स्वयं से पूछे- “मैं इसके क्या काम आ सकता हूँ?”


Source link
#गणश #ज #क #मगलमरत #कय #कहत #ह #आपक #शरर #म #ह #छप #ह #इसक #उततर #Ganesh #Chaturthi #Ganesh #Murti #Life #Lessons #Mangalmoorti #Vighnaharta

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *