मौत के बाद भी कौन चला रहा था दिशा का फोन?:सीबीआई की एफआईआर में विरोधाभास, जानें कैसे आया ठाकरे परिवार का नाम – Disha Salian Death Case: Cbi Fir Flags Mobile Phone Contradictions, What Are The Allegations?

मौत के बाद भी कौन चला रहा था दिशा का फोन?:सीबीआई की एफआईआर में विरोधाभास, जानें कैसे आया ठाकरे परिवार का नाम – Disha Salian Death Case: Cbi Fir Flags Mobile Phone Contradictions, What Are The Allegations?

दिशा सालियान मौत मामले में सीबीआई की एफआईआर में उनके मोबाइल फोन को लेकर ‘असाधारण विरोधाभास’ का आरोप लगाया गया है। एफआईआर के मुताबिक, दिशा के तत्कालीन मंगेतर रोहन रॉय के बयान और एक इंटरव्यू में कही गई बात के अनुसार, पुलिस ने 9 जून 2020 को सुबह 9:40 बजे ही दिशा का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया था। हालांकि, फोन जब्त किए जाने के बावजूद बाद में मीडिया रिपोर्टों में आरोप सामने आया कि दिशा का मोबाइल फोन लगातार एक्टिव रहा और उसके बाद भी उसका इस्तेमाल किया गया।

पुलिस ने क्या स्पष्टीकरण दिया?

जब यह बात सार्वजनिक हुई तो पुलिस की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद यह पता लगाने के लिए दिशा का फोन दोबारा खोला गया था कि दिशा की मौत का सुशांत की मौत से कोई संभावित संबंध है या नहीं। हालांकि, शिकायतकर्ता और दिशा के पिता सतीश सालियान के मुताबिक, पुलिस का यह स्पष्टीकरण भी उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता था।

मौत के बाद भी कौन चला रहा था दिशा का फोन?:सीबीआई की एफआईआर में विरोधाभास, जानें कैसे आया ठाकरे परिवार का नाम – Disha Salian Death Case: Cbi Fir Flags Mobile Phone Contradictions, What Are The Allegations?


कौन इस्तेमाल कर रहा था दिशा का फोन?


  • सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, इसके बाद आरोप लगाया गया कि फोन की पहले की जब्ती से जुड़े रिकॉर्ड को कथित तौर पर दबा दिया गया या नष्ट कर दिया गया। बाद में फोन कब और किन परिस्थितियों में जब्त किया गया, इसे लेकर सरकारी रिकॉर्ड में अलग विवरण दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने सीबीआई से आरोप लगाया है कि दिशा का मोबाइल फोन वास्तव में पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे और आदित्य ठाकरे के पास था और वही लोग उसका इस्तेमाल कर रहे थे।

  • एफआईआर में दिए गए बयान के मुताबिक, दिशा के फोन का इस्तेमाल उन लोगों की पहचान करने के लिए किया गया, जिनके साथ दिशा ने अपनी मौत से पहले घटना से जुड़ी जानकारी साझा की थी। इसके अलावा मोबाइल से उन लोगों की भी पहचान की गई, जो इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह हो सकते थे या कथित तौर पर इसमें शामिल लोगों के लिए खतरा बन सकते थे।

  • एफआईआर में आगे आरोप लगाया गया है कि दिशा के मोबाइल डेटा से ऐसे लोगों की पहचान होने के बाद संभावित गवाहों को या तो खत्म कर दिया गया, धमकाया गया, उन पर दबाव बनाया गया या उन्हें अपने पास मौजूद जानकारी सामने लाने से रोका गया। साथ ही आरोप है कि सबूतों के निशान मिटाने के लिए दिशा के मोबाइल फोन का जरूरी डेटा देखा गया, उसे डिलीट किया गया, उसमें हेरफेर की गई या उसके साथ छेड़छाड़ की गई।

सीबीआई ने मामले पर क्या कहा?

बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा दिशा सालियान की मौत की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के 12 दिन बाद केंद्रीय एजेंसी ने सोमवार को बताया कि उसने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने अपनी जांच की शुरुआत दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज करने से की। शुक्रवार को बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित सीबीआई के मुंबई कार्यालय में सतीश सालियान का बयान दर्ज किया गया था। इसके बाद एजेंसी ने एफआईआर दर्ज की।


 सीबीआई कार्यालय में किसके बयान हुए दर्ज?


  • बीकेसी स्थित सीबीआई कार्यालय में बयान दर्ज कराने के बाद शुक्रवार को सतीश सालियान ने कहा था कि उन्होंने सीबीआई के सामने अपना बयान दर्ज करा दिया है और उन लोगों के बारे में जानकारी दी है, जो उनके मुताबिक इस मामले में शामिल थे। उनके वकील एडवोकेट नीलेश ओझा ने शुक्रवार को दावा किया था कि सतीश सालियान ने अपने बयान में हाई कोर्ट में पहले से जमा की गई जानकारी के अलावा कुछ और जानकारियां भी सीबीआई को दी हैं, जो एफआईआर का हिस्सा बनी हैं।

  • ओझा ने आरोप लगाया था कि दिशा सालियान के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि इस अपराध को छिपाने के लिए लीपापोती की गई और इसमें उस समय के कुछ पुलिस अधिकारी तथा कई हाई प्रोफाइल लोग शामिल थे।

  • हाई कोर्ट के आदेश के बाद रविवार को दर्ज की गई सीबीआई की एफआईआर सतीश सालियान के बयान पर आधारित है। एफआईआर के विवरण के मुताबिक, इसमें अभी किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है। हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को दिए अपने आदेश में साफ कहा था कि जब तक जांच अधिकारी को किसी व्यक्ति के खिलाफ उचित संदेह पैदा करने के पर्याप्त आधार नहीं मिलते, तब तक उसे आरोपी नहीं माना जाएगा।

  • यह एफआईआर आईपीसी की उन धाराओं के तहत दर्ज की गई है, जो आपराधिक साजिश, सामूहिक बलात्कार, हत्या, सबूत मिटाने या अपराधियों को बचाने के लिए गलत जानकारी देने जैसे अपराधों से जुड़ी हैं। इसके अलावा इसमें किसी व्यक्ति को सजा से बचाने के इरादे से सरकारी अधिकारियों द्वारा कानून के निर्देशों की अवहेलना करने और गलत रिकॉर्ड तैयार करने से जुड़ी धाराएं भी शामिल हैं।

दिशा सालियान वाला पूरा मामला क्या?

24 वर्षीय दिशा सालियान की 9 जून 2020 को मांलाड स्थित एक इमारत की 12वीं मंजिल के फ्लैट से गिरने के बाद मौत हो गई थी। मालवाणी पुलिस ने इस घटना के संबंध में दुर्घटनावश मौत रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने निष्कर्ष निकाला था कि दिशा ने आत्महत्या की थी और घटना में किसी साजिश या गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला था। दिसंबर 2023 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी दिशा की मौत में किसी साजिश की बात नहीं पाई थी।

शुरुआत में सतीश सालियान और उनकी पत्नी को भी अपनी बेटी की मौत में किसी साजिश का संदेह नहीं था और उन्होंने मालवाणी पुलिस को दिए बयानों में इसका उल्लेख किया था। हालांकि, पिछले साल सतीश सालियान ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि उनकी बेटी के साथ बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। अदालत ने माना कि एडीआर की जांच पर्याप्त नहीं थी और जांच रिपोर्ट में भी कुछ विरोधाभास थे। इसके बाद नए सिरे से सीबीआई जांच का आदेश दिया गया।

ठाकरे का परिवार का कैसे आया नाम?


  • सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता सतीश सालियान ने आरोप लगाया है कि आदित्य ठाकरे के पिता और महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे समेत कई अन्य लोगों ने कथित साजिश और उसके बाद मामले की लीपापोती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एफआईआर के मुताबिक, संबंधित सरकारी अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी इस बात को लेकर जांच के दायरे में है कि क्या उन्होंने केस से जुड़े कागजात, फाइलें और अन्य सरकारी रिकॉर्ड नष्ट किए या दबाए।

  • इसके अलावा सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और गैरकानूनी कामों के लिए सरकारी पैसे, कर्मचारियों और पुलिस तंत्र के इस्तेमाल की भी जांच की जानी है। आरोप है कि ऐसा अपराध में शामिल लोगों को बचाने के लिए किया गया।

  • शिकायतकर्ता की ओर से जिन लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है, उनमें आदित्य ठाकरे, दिशा के तत्कालीन मंगेतर रोहन रॉय, बॉलीवुड अभिनेता डिनो मोरिया और सूरज पंचोली शामिल हैं। इसके अलावा आदित्य ठाकरे के अंगरक्षक, अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की तत्कालीन गर्ल फ्रेंड रिया चक्रवर्ती, उनके भाई, पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, तत्कालीन मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, डीसीपी विशाल ठाकुर और तत्कालीन महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के नाम भी एफआईआर में उन लोगों के तौर पर आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की मांग की गई है।

  • एफआईआर के मुताबिक, इन लोगों की भूमिका कथित मुख्य अपराध, आपराधिक साजिश, दिशा की मौत को लेकर ‘झूठी आत्महत्या की कहानी’ तैयार करने और उसे प्रचारित करने तथा सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें कथित हेरफेर करने के आरोपों के संबंध में जांची जानी है। हालांकि, एफआईआर में इन लोगों को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है।

  • शिकायतकर्ता सतीश सालियान के मुताबिक, सीबीआई की जांच में मालवाणी पुलिस स्टेशन के उन तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी देखी जानी चाहिए, जिन्होंने शुरुआत में दिशा की मौत की जांच की थी। इसके अलावा देर से हुए पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टरों और कर्मचारियों, कलिना स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के संबंधित अधिकारियों और उस इमारत के सुरक्षा गार्ड की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है, जहां दिशा की मौत हुई थी।

क्या एसआईटी की भूमिका की भी होगी जांच?


  • इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी के वरिष्ठ सदस्यों की भूमिका भी जांच के दायरे में रखने की मांग की गई है, जिसने दिशा की मौत में किसी साजिश की बात नहीं पाई थी। शिकायतकर्ता ने उन सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है, जिनकी निगरानी में कथित तौर पर गलत तरीके से जांच हुई थी। साथ ही उन अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है, जो कथित अपराध और उसके बाद की लीपापोती में शामिल हो सकते हैं।

  • एफआईआर में यह भी कहा गया है कि मेडिकल और पुलिस रिकॉर्ड से यह बात सामने आती है कि दिशा के योनि और गुदा से स्वैब लिए गए थे और उन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया था। दिशा सालियान ने कुछ समय तक बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ काम किया था।

  • सुशांत सिंह राजपूत की 14 जून 2020 को मुंबई में कथित आत्महत्या से मौत हुई थी और 34 वर्षीय सुशांत बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में फांसी के फंदे से लटके मिले थे। सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच भी सीबीआई ने की थी। मार्च 2025 में सीबीआई ने अपनी जांच के बाद मामले को बंद कर दिया था और एजेंसी ने परिवार की ओर से जताई गई किसी भी साजिश की आशंका को खारिज कर दिया था।

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