यूपीआई:₹2000 से ज्यादा के भुगतान पर एमडीआर लगाने के फैसले में विदेशी दबाव नहीं, वित्त मंत्रालय ने किया साफ – Upi Mdr: Finance Ministry Rejects Foreign Influence Behind 0.4% Charge On Transactions Above Rs 2000

यूपीआई:₹2000 से ज्यादा के भुगतान पर एमडीआर लगाने के फैसले में विदेशी दबाव नहीं, वित्त मंत्रालय ने किया साफ – Upi Mdr: Finance Ministry Rejects Foreign Influence Behind 0.4% Charge On Transactions Above Rs 2000

₹2,000 से अधिक के कुछ यूपीआई व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के फैसले को लेकर उठे सवालों के बीच वित्त मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि इस निर्णय के पीछे किसी तरह का विदेशी प्रभाव नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले भारत अपने स्तर पर लेता है।

मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह दावा गलत है कि यूपीआई पर एमडीआर लगाने का फैसला किसी विदेशी दबाव के कारण लिया गया है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा डिजिटल भुगतान तंत्र तैयार करना है, जो लंबे समय तक टिकाऊ, समावेशी और किफायती बना रहे।

रोजमर्रा के ज्यादातर UPI भुगतान रहेंगे मुफ्त

वित्त मंत्रालय के अनुसार, ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए तय जीरो-एमडीआर व्यवस्था के तहत आने वाले लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा। मंत्रालय का कहना है कि करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन नए प्रावधान से प्रभावित नहीं होंगे। यूपीआई क्यूआर के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को भी नए एमडीआर से छूट जारी रहेगी। इसमें स्ट्रीट वेंडर्स, मोहल्ले की दुकानें और अन्य छोटे कारोबारी शामिल हैं।

सरकार ने रोलबैक की संभावना से किया इनकार

इससे पहले सरकारी सूत्रों ने कहा कि एमडीआर लागू करने के फैसले पर पुनर्विचार का सवाल नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी से जब इसे वापस लेने की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि फैसला लिया जा चुका है और इसे पलटने का सवाल नहीं है।

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जरूरी सेवाओं और कैपिटल मार्केट के लिए अलग दर

रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे जरूरी क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर प्रति ट्रांजेक्शन ₹5 का फ्लैट एमडीआर लागू होगा। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर से जुड़े भुगतान के लिए एमडीआर 0.02 प्रतिशत रखा गया है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन होगी।

15 अक्तूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा

नए प्रावधान के तहत 15 अक्तूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन रखी गई है। वहीं, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) भुगतान पर किसी भी राशि के लिए एमडीआर नहीं लगेगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि एमडीआर ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। यह व्यापारी भुगतान के इकोसिस्टम में लागू शुल्क है, जिसे बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और यूपीआई एप्लिकेशन प्रदाताओं समेत संबंधित भागीदारों के बीच बांटा जाएगा।

UPI को टिकाऊ बनाने की दलील

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, एमडीआर कोई टैक्स नहीं है और न ही सरकार या एनपीसीआई इसे अपने पास जमा करेगा। इससे मिलने वाला राजस्व भुगतान इकोसिस्टम के अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटा जाएगा। इसका इस्तेमाल डिजिटल भुगतान ढांचे, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने, नवाचार और ग्राहक सेवाओं को मजबूत करने में किया जाना है।

एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में यूपीआई पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 24.5 अरब लेन-देन हुए, जिनकी कुल राशि करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये रही। अगस्त में यूपीआई से जुड़े बैंकों की संख्या 752 थी।

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