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आलीराजपुर शहर में अनंत चतुर्दशी पर शुक्रवार को गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। शहर के अलग-अलग इलाकों से गणेश प्रतिमाओं के जुलूस निकले। डीजे और ढोल की धुन पर लोग गणपति बप्पा को विदाई देने विसर्जन वाली जगहों तक पहुंचे। प्रशासन और नगर पालिका ने प्राकृतिक जलस्रोतों की बजाय पंचेश्वर महादेव मंदिर परिसर और राक्सा नदी किनारे बने कृत्रिम पोखरों में प्रतिमाओं का विसर्जन करवाया। बड़ी प्रतिमाओं को जुलूस के तौर पर विसर्जन वाली जगह तक लाया गया, जबकि छोटी प्रतिमाएं लोग खुद लेकर पहुंचे। विसर्जन के दौरान लोगों ने ‘गणपति बप्पा मोरया’ और ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ के नारे लगाए। भावुक माहौल में लोगों ने भगवान गणेश को विदाई दी। जवान रहे तैनात विसर्जन के दौरान सुरक्षा के लिए होमगार्ड, आपदा मित्र और पुलिस बल मौजूद रहा। जिला होमगार्ड कमांडेंट गुलाब सिंह ने बताया कि जिले के कई नदी-तालाबों पर 11 ट्रेंड तैराक लगाए गए थे। हर तैराक के साथ दो ट्रेंड आपदा मित्रों की ड्यूटी थी। टीम आखिरी प्रतिमा के विसर्जन तक वहां रही। आलीराजपुर शहर में पंचेश्वर महादेव मंदिर, राक्सा नदी, रामसिंह की चौकी, पटेल फार्म हाउस के पास तालाब, भोरियाकुआं और बोरखड़ तालाब समेत कई और जगहों पर सुरक्षा टीम मौजूद थी। जोबट, खट्ठाली, चंद्रशेखर आजाद नगर, बरझर और बड़गांव इलाके में भी बचाव दल लगाए गए थे। होमगार्ड ने नगर सुरक्षा समिति की तरह आपदा मित्र दल बनाया है। करीब 250 युवाओं को बाढ़, भूकंप, गंभीर दुर्घटना और डूबने जैसी इमरजेंसी में बचाव की ट्रेनिंग दी गई है। इनमें तैराकी में माहिर युवाओं को भी शामिल किया गया है। इधर, कुछ श्रद्धालु पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए घर पर ही मिट्टी की गणेश प्रतिमा का विसर्जन कर रहे हैं। प्रतिमा की मिट्टी से तुलसी का पौधा लगाने की पहल भी की जा रही है।
श्रद्धालु धर्मेंद्र राठौर ने बताया कि गणेश प्रतिमा का विसर्जन श्रद्धा और भावनाओं से जुड़ा अवसर है। इस बार कृत्रिम पोखर में विसर्जन की व्यवस्था से प्राकृतिक जलस्रोतों को सुरक्षित रखने का संदेश भी मिल रहा है। घर पर मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन कर पौधा लगाने से पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंच रहा है।
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